क़तर: रास लाफ़ान इंडस्ट्रियल सिटी में धमाके से 12 भारतीय नागरिकों की मौत, कई घायल

भारत ने पुष्टि की है कि क़तर के रास लाफ़ान इंडस्ट्रियल सिटी के एक फैक्ट्री में हुए धमाके में 12 भारतीयों की मौत हो गई है. इस घटना में 66 अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ भारतीय भी शामिल हैं. बाकी घायल लोग कतर, पाकिस्तान, बांग्लादेश, केन्या, घाना, तंजानिया, नाइजीरिया और नेपाल के रहने वाले हैं.

क़तर का राष्ट्रीय झंडा. (प्रतीकात्मक फोटो साभार: Visit Qatar/Unsplash)

नई दिल्ली: क़तर के रास लाफ़ान इंडस्ट्रियल सिटी में हाल ही में दोबारा शुरू हुई बरज़ान गैस फ़ैसिलिटी में रविवार (21 जून) को ‘तकनीकी खराबी’ के कारण हुए धमाके और आग लगने से 12 भारतीयों और एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हो गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, दोहा में भारतीय दूतावास ने सोमवार शाम को बताया कि रविवार को हुए इस हादसे में 12 भारतीय नागरिकों की मौत हो गई है. इससे पहले दिन में क़तर के अधिकारियों ने कहा था कि भारत और पाकिस्तान से कुल 13 लोगों की मौत हुई है, लेकिन यह नहीं बताया गया था कि मरने वालों में कौन से देश के कितने नागरिक हैं.

दोहा के अनुसार, इस घटना में 66 अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ भारतीय भी शामिल हैं. बाकी घायल लोग क़तर, पाकिस्तान, बांग्लादेश, केन्या, घाना, तंजानिया, नाइजीरिया और नेपाल के रहने वाले हैं.

बरज़ान प्लांट चलाने वाली कंपनी ‘क़तर एनर्जी’ ने बताया कि किसी भी घायल व्यक्ति की हालत गंभीर नहीं है.

कंपनी ने सोमवार शाम एक बयान में कहा कि यह घटना ‘एक ऑपरेशनल हादसा था, न कि कोई तोड़-फोड़ या दुश्मनी के कारण हुई घटना.’

कंपनी ने बताया कि ‘ज़रूरी मेंटेनेंस की ज़रूरतों’ के कारण पिछले साल दिसंबर में बरज़ान में उत्पादन पूरी तरह रोक दिया गया था और इसे बीते शुक्रवार को ही दोबारा शुरू किया गया था.

इस घटना के बाद गैस लीक होने की कोई खबर नहीं मिली है और धमाके व आग लगने की वजह का पता लगाने के लिए जांच जारी है.

उल्लेखनीय है कि इस घटना से वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में और उथल-पुथल देखने को मिल सकती है, क्योंकि क़तर दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस उत्पादकों में से एक है.

मालूम हो कि ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के चलते दोहा को ग्राहकों तक माल पहुंचाने में बाधा का सामना करना पड़ रहा था, जिसके चलते इसका उत्पादन बंद कर दिया गया था.

अधिकारियों के मुताबिक, ईरान ने मार्च में रास लाफ़ान इंडस्ट्रियल सिटी पर हमला किया था, जिससे इसमें आग लग गई थी और आग बुझने से पहले ‘काफ़ी’ नुकसान हुआ था. ईरानी हमलों के कारण क़तर ने वहां पहले ही उत्पादन रोक दिया था.

उस समय क़तर एनर्जी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी साद शेरिदा अल-काबी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया था कि ईरान के हमलों से क़तर की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) निर्यात क्षमता में लगभग 17% की कमी आएगी और हर साल 12.8 मिलियन टन गैस का उत्पादन बंद हो जाएगा.

उल्लेखनीय है कि बरज़ान प्लांट की क्षमता लगभग 39.6 मिलियन क्यूबिक मीटर सेल्स गैस प्रति दिन थी और क़तर इस प्लांट का इस्तेमाल मुख्य रूप से स्थानीय बिजली उत्पादन और पानी को खारेपन से मुक्त करने वाली अपनी अहम सुविधाओं को चलाने के लिए करता था.

भारत अपनी प्राकृतिक गैस की ज़रूरत का लगभग आधा हिस्सा आयात से पूरा करता है और इसमें से 40% सप्लाई क़तर से आती है. इस वजह से भारत पर रास लाफ़ान – जो दुनिया का सबसे बड़ा लिक्विफाइड प्राकृतिक गैस एक्सपोर्ट हब है – में होने वाली रुकावट और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा जवाबी कार्रवाई में की गई नाकेबंदी का असर पड़ने का खतरा है.

मालूम हो कि क़तर पर ईरान के हमलों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमीर तमीम बिन हमद अल-थानी से फोन पर बातचीत की थी और दोहा के प्रति अपना समर्थन जताया था.

इसके साथ ही पीएम मोदी ने ‘क्षेत्र के ऊर्जा अवसंरचना पर हुए हमलों की कड़ी निंदा’ भी की थी. उस दौरान प्रधानमंत्री ने जॉर्डन और ओमान के नेताओं से भी बात की थी.

हालांकि, तब उन्होंने उन्होंने ईरान का नाम नहीं लिया था, लेकिन इस बातचीत के बारे में क़तर की तरफ से जारी बयान में कहा गया था कि पीएम मोदी ने ‘रास लाफ़ान इंडस्ट्रियल ज़ोन पर ईरान की बर्बर आक्रामकता की निंदा की है.’

इसी रुख को दोहराते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने पहले ही पूरे इलाके में आम लोगों से जुड़ी सुविधाओं, जिनमें ‘ऊर्जा से जुड़ी सुविधाएं’ भी शामिल हैं, को निशाना बनाने से बचने की अपील की थी.

उन्होंने कई जगहों पर ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं पर हुए हालिया हमलों को ‘बेहद चिंताजनक’ बताया.

खास बात यह है कि उस बयान में ईरान का अलग से ज़िक्र नहीं किया गया, जबकि नई दिल्ली ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों की निंदा बिना नाम लिए की थी.

इसके साथ ही बयान में ‘पूरे इलाके’ में हुए हमलों का ज़िक्र यह संकेत देता है कि यह आलोचना व्यापक है और इसमें सभी पक्ष शामिल हैं, जिनमें ईरान पर इज़रायल के हमले भी शामिल हैं.