एससी और ओबीसी छात्रवृत्ति पाने के लिए अब डोमिसाइल प्रमाणपत्र ज़रूरी नहीं

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने एससी और ओबीसी छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक व पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं में डोमिसाइल प्रमाणपत्र की अनिवार्यता खत्म कर दी है. इस फैसले से हर साल लगभग 1.2 करोड़ छात्रों को राहत मिलेगी. सरकार का कहना है कि इससे आवेदन प्रक्रिया सरल होगी और छात्रवृत्ति तक पहुंच आसान बनेगी.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: शिक्षा मंत्रालय)

नई दिल्ली: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के लिए संचालित प्री-मैट्रिक तथा पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं में आवेदन के लिए डोमिसाइल (स्थायी निवास) प्रमाणपत्र की अनिवार्यता समाप्त कर दिया है. इस सुधार से उन लगभग 1.2 करोड़ छात्रों को लाभ मिलेगा जो हर वर्ष इन दोनों योजनाओं के तहत सहायता प्राप्त करते हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा, ‘इस आवश्यकता को हटाने का उद्देश्य दस्तावेज़ी बोझ कम करना, अनुपालन लागत घटाना और पात्र छात्रों के लिए छात्रवृत्ति लाभों तक पहुंच को अधिक आसान बनाना है.’

डोमिसाइल प्रमाणपत्र राज्य सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक दस्तावेज़ है, जो किसी व्यक्ति के स्थायी निवास की पुष्टि करता है. अब तक यह दोनों छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए अनिवार्य दस्तावेज़ था. अपने गृह राज्य से बाहर पढ़ाई कर रहे छात्रों को इसे प्राप्त करने के लिए अक्सर बीच सत्र में घर लौटना पड़ता था, जिससे माता-पिता के कमाई का नुकसान होता था और कई मामलों में प्रक्रिया तेज कराने के लिए बिचौलियों को पैसे भी देने पड़ते थे.

शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत में उच्च शिक्षा में नामांकित कुल 4.13 करोड़ छात्रों में से लगभग 58 लाख अनुसूचित जाति (एससी) और 1.47 करोड़ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्र हैं. नेशनल सैंपल सर्वे (एनएसएस) और जनगणना के प्रवासन संबंधी आंकड़े बताते हैं कि उच्च शिक्षा के लगभग 30-35 प्रतिशत छात्र अपने गृह जिले से बाहर अध्ययन करते हैं.

छात्रवृत्ति योजनाओं का दायरा

ये दोनों योजनाएं विभिन्न आय वर्गों के बड़ी संख्या में लाभार्थियों को कवर करती हैं.

एससी छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति कक्षा 9 और 10 के उन छात्रों को दी जाती है जिनके माता-पिता की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये तक है. पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति उच्च शिक्षा से लेकर पीएचडी स्तर तक की पढ़ाई को कवर करती है.

ओबीसी छात्रों के लिए अलग प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक योजनाएं संचालित हैं, जिनमें आय सीमा क्रमशः 2.5 लाख रुपये और 1 लाख रुपये प्रति वर्ष है.

ये योजनाएं सीनियर सेकेंडरी, आईटीआई पाठ्यक्रमों से लेकर स्नातकोत्तर और व्यावसायिक डिग्रियों तक लागू होती हैं.

वित्त वर्ष 2025-26 में केवल एससी छात्रों के लिए इन योजनाओं के तहत 75 लाख से अधिक लाभार्थियों को 7,981 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई. इससे ये देश की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) आधारित शैक्षिक सहायता योजनाओं में से एक बन गई है.

दस्तावेज़ी प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ विभाग ने उमंग प्लेटफार्म पर शैक्षिक बदलाव और उत्थान के लिए स्कॉलरशिप (स्कॉलरशिप फॉर एजुकेशनल ट्रांसफॉर्मेशन एंड अपलिफ्टमेंट) लॉन्च किया है जो स्कॉलरशिप से जुड़ी सभी सेवाओं के लिए एक सिंगल-विंडो डिजिटल समाधान है. इसके जरिए छात्र आवेदन कर सकेंगे, आवेदन की स्थिति ट्रैक कर सकेंगे, संस्थागत नोडल अधिकारी (आईएनओ), जिला नोडल अधिकारी (डीएनओ), और राज्य स्तरीय अधिकारी सत्यापन और अनुमोदन की प्रक्रियाएं एक ही मंच पर पूरी कर सकेंगे. इससे पहले ये काम अलग-अलग माध्यमों और पोर्टलों  के ज़रिए होते थे.

अखबार के अनुसार, राज्य के शिक्षा विभागों ने स्कूलों को इस बारे में जागरूकता फैलाने के निर्देश देना शुरू कर दिया है. पंजाब के स्कूल शिक्षा विभाग ने ज़िला शिक्षा अधिकारियों को औपचारिक निर्देश जारी किए हैं, जिनमें छात्रों और अभिभावकों तक ज़्यादा से ज़्यादा पहुंच बनाने को कहा गया है.

मंत्रालय ने कहा, ‘ये पहल सरकार के उस बड़े मकसद के अनुरूप हैं, जिसमें सबको साथ लेकर चलने को बढ़ावा देना, प्रक्रिया से जुड़ी रुकावटों को कम करना और कल्याणकारी योजनाओं का असरदार तरीके से लाभ पहुंचाना शामिल है.’