नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित गड़बड़ी और करोड़ों रुपये व कीमती सामान के गायब होने के आरोपों के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने ‘नैतिक आधार’ पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है.
इससे पहले अयोध्या पुलिस ने मंदिर में चोरी, धन और कीमती सामान के कथित गबन से जुड़े मामले में आठ नामजद लोगों और कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. यह एफआईआर ऐसे समय दर्ज हुई है, जब करीब तीन सप्ताह पहले पहली बार यह आरोप सामने आए थे कि बाबरी मस्जिद की जगह बने राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये और बहुमूल्य चढ़ावे में गड़बड़ी हुई है.
ट्रस्ट के सदस्य की शिकायत पर दर्ज हुई एफआईआर
कोतवाली रामजन्मभूमि थाने में 26 जून को दर्ज एफआईआर मंदिर ट्रस्ट के ही एक सदस्य की शिकायत पर आधारित है.
एफआईआर में जिन लोगों को नामजद किया गया है, उनमें मंदिर में आने वाले दान की गिनती से जुड़े अविनाश मिश्रा, लवकुश मिश्रा, उनके भाई अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, गिनती करने वाले कर्मचारियों में से एक के ड्राइवर, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं.
अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार, मंदिर प्रशासन के शीर्ष पदाधिकारियों में केवल सुभाष श्रीवास्तव का नाम एफआईआर में आया है. वे दान गणना केंद्र के प्रभारी बताए गए हैं.
एफआईआर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) के तहत दर्ज की गई है. इनमें चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति को छिपाने या उससे संबंधित लेनदेन तथा आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं.
दान प्रबंधन निजी एजेंसी के जिम्मे था
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर ट्रस्ट ने दान और मंदिर निधि के प्रबंधन का काम एक बैंक को सौंप रखा था. बैंक ने आगे यह जिम्मेदारी एक निजी एजेंसी को दे दी थी. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि एफआईआर में नामजद लोग इसी आउटसोर्स व्यवस्था का हिस्सा थे या सीधे मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारी थे.
एसआईटी की जांच अभी जारी
मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच अभी पूरी नहीं हुई है. लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली इस टीम में लखनऊ रेंज की पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन भी शामिल हैं.
एसआईटी अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री के मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंप चुकी है. रिपोर्टों के अनुसार, टीम अगले कुछ दिनों में अयोध्या जाकर मंदिर का दौरा करेगी और दान प्रबंधन को अधिक पारदर्शी एवं सख्त बनाने के लिए सुझाव देगी. जांच पूरी करने के लिए एसआईटी को 15 दिन का अतिरिक्त समय भी दिया गया है.
पूछताछ के बाद दो करोड़ रुपये और सोना मिलने का दावा
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एसआईटी ने चंपत राय सहित ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों और एफआईआर में नामजद लोगों से पूछताछ की थी. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस पूछताछ के आधार पर लगभग दो करोड़ रुपये और सोना बरामद किया गया.
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दान में कथित चोरी के आरोप उठाने वालों की आलोचना की थी. हालांकि, बाद में राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया.
पहले भी दर्ज हुई थीं शिकायतें
इससे पहले 19 जून को पूर्व कारसेवक संतोष दुबे सहित तीन लोगों ने अयोध्या पुलिस में कथित चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी. इन तीनों शिकायतों में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय का उल्लेख किया गया था. इनमें से एक शिकायत में उन्हें कथित रूप से गायब हुए दान के लिए सीधे जिम्मेदार भी ठहराया गया था.
दैनिक भास्कर की 19 जून की एक रिपोर्ट के अनुसार, एसआईटी ने कई दानदाताओं के बयान भी दर्ज किए थे. इनमें मुंबई के कारोबारी अनिल विश्वकर्मा भी शामिल थे. उनका आरोप था कि उनके परिवार ने मंदिर में भगवान के लिए तीन किलो चांदी की माला और एक किलो चांदी की चरण पादुका दान की थी, लेकिन उन्हें इसकी कोई रसीद नहीं दी गई.
छह साल पहले भी मिली थी चेतावनी
इंडियन एक्सप्रेस ने 24 जून को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में बताया था कि एक निजी ऑडिट फर्म ने करीब छह वर्ष पहले ही मंदिर के वित्तीय प्रबंधन और दान व्यवस्था में गंभीर खामियों की ओर ध्यान दिलाया था. रिपोर्ट के मुताबिक, उन चेतावनियों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई.
सात जून को शुरू हुआ था विवाद
पूरा विवाद 7 जून को सामने आया था, जब उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने आरोप लगाया कि राम मंदिर से पांच से साढ़े सात करोड़ रुपये तक की राशि गायब हुई है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इन आरोपों को प्रमुखता से उठाया था. इसके लगभग एक सप्ताह बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की थी.
