अरुणाचल: भारी बारिश से भूस्खलन के कारण नदी का बहाव रुका, असम के निचले इलाकों में बाढ़ का ख़तरा

अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण हुए बड़े भूस्खलन से सिजी नदी का बहाव रुक गया और एक झील जैसी बन गई है, जिससे बांध के टूटने और अचानक बाढ़ आने की आशंका बढ़ गई है. असम सीमा से लगे होने के कारण वहां चेतावनी जारी की गई. वहीं, लगातार बारिश के कारण केयी पैन्योर और पापुम पारे ज़िलों में सड़क के 45 किलोमीटर के हिस्से में कई जगह ज़मीन खिसकी और सड़क टूट गई.

अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में अचानक आई बाढ़ के कारण असम में ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर बढ़ा. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश के निचले सियांग जिले में रविवार (28 जून) को भारी बारिश के कारण हुए बड़े भूस्खलन से सिजी नदी का बहाव रुक गया, जिससे नदी के निचले इलाकों में लोगों की जान और बुनियादी ढांचे को खतरा पैदा हो गया है.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, जिला अधिकारियों ने बताया कि मलबे ने सिजी-मागी ब्लॉक पॉइंट पर नदी को रोक दिया है, जिससे एक कृत्रिम झील बन गई है. उन्होंने कहा कि बारिश के कारण जमा हुए पानी से बांध के टूटने और अचानक बाढ़ आने की आशंका बढ़ गई है. यह जगह असम की सीमा पर स्थित लिकाबाली शहर से कुछ मील ऊपर है.

जिला प्रशासन ने लिकाबाली शहर और सिजी नदी के किनारे बसे गांवों के लोगों को सतर्क कर दिया है; यही नदी असम में जाकर ‘गाई नदी’ बन जाती है.

एक अधिकारी ने कहा, ‘हमने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि अगर कृत्रिम बांध टूटता है तो बिना किसी चेतावनी के ज़बरदस्त अचानक बाढ़ आ सकती है. ऐसी घटना से निचले इलाकों में लोगों की जान, घरों, मवेशियों, सड़कों, पुलों और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को खतरा हो सकता है.’

लोगों को सलाह दी गई है कि वे नदी के किनारों से दूर रहें, नदी के पास अनावश्यक रूप से न जाएं, प्रशासन के निर्देश मिलने पर निचले और बाढ़ की आशंका वाले इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं और कम समय की सूचना पर सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए तैयार रहें.

निवासियों से यह भी कहा गया है कि वे नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी, अजीब आवाज़ों या रुकावट के कमज़ोर होने के किसी भी संकेत की सूचना तुरंत नजदीकी प्रशासनिक या पुलिस अधिकारी को दें.

लगातार बारिश के कारण केयी पैन्योर और पापुम पारे ज़िलों में सड़क के 45 किलोमीटर के हिस्से में कई जगह ज़मीन खिसकी और सड़क टूट गई; सड़क के कुछ हिस्से बह गए और कई इलाके कीचड़, बड़े पत्थरों और उखड़े हुए पेड़ों के नीचे दब गए. यह सड़क केयी पैन्योर से ज़्यादा ऊंचाई पर स्थित पांच ज़िलों के लिए जीवन रेखा है.

अरुणाचल प्रदेश के केयी पैन्योर ज़िले भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ के बाद बिखरा मलबा. (फोटो: पीटीआई)

इस रुकावट के कारण गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह से बंद हो गई थी और पोटिन, यज़ाली, याचुली, जोरम और ज़िरो समेत कई अहम जगहों से संपर्क टूट गया था.

अखबार के अनुसार, इस बीच, बचावकर्मी तीन लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है. ये लोग 24 जून को अरुणाचल प्रदेश के केयी पान्योर जिले में एक पनबिजली परियोजना की कॉलोनी में अचानक बाढ़ आने के बाद लापता हो गए थे. दो पीड़ितों के शव बरामद कर लिए गए हैं.

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और बचाव कार्यों का समन्वय कर रही है.

असम में बाढ़

असम के पड़ोसी धेमाजी जिले के अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ से चार राजस्व क्षेत्र- जोनाई, सिसिबोरगांव, धेमाजी और गोगमुख प्रभावित हुए हैं. बाढ़ से जिले के 69 गांवों में 15,483 लोग प्रभावित हुए हैं.

जिले के एक अधिकारी ने बताया, ‘सिमेन नदी पर बना रेलवे पुल ढह गया है, एक लोहे का पुल बह गया है और मुख्य नेशनल हाईवे 52 के अहम हिस्सों में तटबंध के कटाव की खबर मिली है.’

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, असम के धेमाजी जिले में नदी के कटाव से एक रेलवे पुल क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके कारण रेल सेवाएं बाधित हो गई हैं.

धेमाजी जिले में आर्चीपाथर और सिमेन चापरी रेलवे स्टेशनों के बीच स्थित एक रेलवे पुल नदी के तेज कटाव से क्षतिग्रस्त हो गया. उफनती नदी का पानी पुल के पास का बड़ा हिस्सा बहा ले गया, जिससे पुल का एक खंभा अस्थिर हो गया.

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (Northeast Frontier Railway – NFR) के अनुसार, भारी बारिश से हुए कटाव के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई. हालांकि, पहले से ही बाढ़ के कारण रेल परिचालन रोक दिया गया था, इसलिए किसी ट्रेन को नुकसान नहीं पहुंचा और न ही किसी के हताहत होने की सूचना है.

एनएफआर ने मुरकोंगसेलेक-सिलापाथर रेलखंड पर अगली सूचना तक ट्रेन सेवाएं स्थगित कर दी हैं.

इस मार्ग पर चलने वाली ट्रेनों का संचालन अब सिलापाथर तक ही किया जाएगा. यात्रियों की सुविधा के लिए मुरकोंगसेलेक और सिलापाथर के बीच बसों की व्यवस्था की गई है. साथ ही धेमाजी, सिलापाथर और मुरकोंगसेलेक रेलवे स्टेशनों पर सहायता केंद्र भी खोले गए हैं.