मोदी को दिए त्रुटिपूर्ण प्रशस्ति-पत्र पर सफाई, सेशेल्स बोला- वह गलती से जारी हुआ वर्किंग ड्राफ्ट था

सेशेल्स सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ सम्मान के उस प्रशस्ति-पत्र को, जिसमें कई वर्तनी और टाइपिंग की गलतियां थीं, गलती से सार्वजनिक हुआ वर्किंग ड्राफ्ट बताया है. सरकार ने कहा कि अब उसका विधिवत स्वीकृत और प्रमाणिक संस्करण जारी कर दिया गया है.

बाईं ओर प्रशस्ति-पत्र का वह कथित प्रारंभिक मसौदा है, जिसे भाजपा ने एक्स पर साझा किया था. दाईं ओर सेशेल्स सरकार के बयान के साथ जारी अंतिम प्रशस्ति-पत्र है. आगे की तरफ सम्मान ग्रहण करते हुए नरेंद्र मोदी.

नई दिल्ली: सेशेल्स सरकार ने गुरुवार (2 जुलाई, 2026) को स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ सम्मान के साथ जारी प्रशस्ति-पत्र (साइटेशन) का वह संस्करण, जिसमें कई वर्तनी और टाइपिंग संबंधी गलतियां थीं, गलती से सार्वजनिक हो गया था. सरकार ने कहा कि वह केवल एक वर्किंग ड्राफ्ट था और अब उसका विधिवत अनुमोदित एवं प्रमाणिक संस्करण जारी कर दिया गया है.

सेशेल्स के विदेश एवं प्रवासी मामलों के मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन सम्मान पूरी तरह वास्तविक है. इसे 24 जून 2026 को मंत्रिमंडल ने औपचारिक रूप से स्थापित किया था और 29 जून को स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह सम्मान प्रदान किया.’

प्रधानमंत्री मोदी 27 से 29 जून के बीच आधिकारिक यात्रा पर सेशेल्स गए थे. इसी दौरान उन्हें यह सम्मान दिया गया. सम्मान स्वीकार करते हुए मोदी ने इसे जलवायु परिवर्तन से जूझ रहे देशों और आने वाली पीढ़ियों को समर्पित किया था.

हालांकि, यह सम्मान घोषित होने के तुरंत बाद विवादों में आ गया. सोशल मीडिया पर साझा किए गए प्रशस्ति-पत्र में कई स्पष्ट वर्तनी संबंधी त्रुटियां थीं. फैक्ट-चेकर मोहम्मद जुबैर ने 28 जून की रात एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा था, ‘यह OPVS नहीं बल्कि OPUS होना चाहिए था. Repubblic नहीं, Republic. Seycheeles नहीं, Seychelles.’

अब सेशेल्स सरकार ने माना है कि यह दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाने के लिए नहीं था.

बयान में कहा गया, ‘यह मसौदा सार्वजनिक रूप से जारी करने के लिए नहीं था और इसे किसी भी स्थिति में सार्वजनिक डोमेन में नहीं आना चाहिए था. मंत्रालय इस बात की समीक्षा कर रहा है कि ऐसा कैसे हुआ.’

हालांकि, सरकार ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि यही त्रुटिपूर्ण प्रशस्ति-पत्र 28 जून की दोपहर भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक एक्स अकाउंट और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा कैसे साझा किया गया.

इस दस्तावेज़ को लेकर एक और सवाल उठा था कि इसे जल्दबाजी में एआई की मदद से तैयार किया गया था. साझा की गई तस्वीर में एक वॉटरमार्क भी दिखाई दिया था, जिससे संकेत मिलता था कि इसे ओपनएआई के इमेज जनरेशन टूल्स की सहायता से बनाया गया है.

इस पर सफाई देते हुए सेशेल्स सरकार ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीर अंतिम संस्करण नहीं थी, बल्कि डिज़ाइन का शुरुआती मसौदा थी. इसमें मौजूद हस्ताक्षर भी केवल ‘प्लेसहोल्डर’ थे और आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं थे.

सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि समय की कमी के कारण इस प्रारंभिक लेआउट को तैयार करने में डिजिटल डिज़ाइन टूल्स का इस्तेमाल किया गया था.

बयान में कहा गया, ‘यह मसौदा कम समय में तैयार किया गया था और इसमें टाइपिंग तथा वर्तनी संबंधी कई त्रुटियां रह गई थीं, जिनमें आधिकारिक मुहर पर मौजूद गलतियां भी शामिल हैं. मंत्रालय इन त्रुटियों को स्वीकार करता है और इसके लिए खेद व्यक्त करता है.’

सरकार ने कहा कि इस तरह के कार्यशील मसौदे केवल आंतरिक समीक्षा और गुणवत्ता जांच के लिए तैयार किए जाते हैं. अंतिम प्रशस्ति-पत्र जारी करने से पहले उसका सत्यापन और औपचारिक अनुमोदन किया जाता है.

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी हाल के वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजे जा चुके हैं. इससे पहले वह इज़राइल की संसद नेसेट मेडल पाने वाले पहले व्यक्ति बने थे. इसके अलावा उन्हें कोटलर अवॉर्ड फॉर ग्लोबल लीडरशिप का पहला सम्मान भी दिया जा चुका है.

भारतीय जनता पार्टी ने 28 जून को एक्स पर किए गए अपने पोस्ट, जो अब भी उपलब्ध है, में कहा था कि ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की श्रृंखला में एक और उपलब्धि है. वहीं, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इसे प्रधानमंत्री का ‘चौथा वैश्विक पर्यावरण सम्मान’ बताया था.