नई दिल्ली: केरल के वायनाड ज़िले की मेप्पाडी ग्राम पंचायत में मंगलवार (7 जुलाई) को कल्लाडी टनल निर्माण स्थल पर भूस्खलन होने से कम से कम तीन प्रवासी श्रमिकों की मौत हो गई है और कई अन्य लापता हैं.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बुधवार को जानकारी दी कि घटना के बाद से लापता पांच लोगों की तलाश के लिए व्यापक खोज एवं बचाव अभियान जारी है. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) पुलिस, अग्निशमन दल और अन्य सरकारी विभागों समेत कई एजेंसियां खोज और बचाव अभियान में जुटी हुई हैं.
वायनाड जनसंपर्क विभाग के अनुसार, यह भूस्खलन तब हुआ जब टनल बनाने की परियोजना के तहत खोदी गई भारी मात्रा में मिट्टी निर्माण स्थल पर गिर गई.
विभाग ने बताया कि अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. इलाज के लिए नौ घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, और क्योंकि प्रभावित क्षेत्र में मलबे में दबे लोगों का पता लगाने के लिए खोज और बचाव कार्य जारी है, इसलिए हताहतों की संख्या बढ़ सकती है.
इस बीच बचाव कार्यों में तालमेल बिठाने के लिए कल्लाडी में विधायक आईसी बालकृष्णन की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक हुई. बैठक में विधायक सीके आशा, ज़िला पंचायत अध्यक्ष चंद्रिका कृष्णन, ज़िला कलेक्टर डीआर मेघाश्री, ज़िला पुलिस प्रमुख देवा मनोहर, एडीएम के अजीश, सब-कलेक्टर अतुल सागर, स्थानीय चुने हुए प्रतिनिधि और अधिकारी शामिल हुए.
पुल के दोनों तरफ फंसे लोगों के लिए मुंडक्कई फॉरेस्ट स्टेशन और चूरलमला चर्च हॉल में अस्थायी आश्रय स्थल बनाए गए हैं. अधिकारियों ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और एराट्टुकुंडु, अट्टमाला, मम्मिक्कुन्नु और आंबेडकर कॉलोनी जैसे जोखिम वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए भी कदम उठाए हैं.
घटना को लेकर अधिकारियों ने बताया कि ज़िला प्रशासन के पहले के निर्देशों के बाद भारी बारिश की वजह से टनल साइट पर निर्माण कार्य पहले ही रोक दिया गया था. मलबे को हटाने के बाद लोक निर्माण विभाग को मीनाक्षी पुल की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच करने का निर्देश दिया गया है.
मीडिया से बात करते हुए भूस्खलन में बचे लोगों ने बताया कि यह घटना अचानक सुबह करीब 11 बजे हुई. जब वहां जमा की गई मिट्टी का पूरा ढेर एकदम से ढह गया और नीचे गिर पड़ा.
एक चश्मदीद अजमल ने बताया कि एक ज़ोरदार आवाज़ सुनने के बाद जब लोग पास की दुकानों से बाहर निकले, तो कुछ ही पल में यह घटना हो गई.
उन्होंने कहा, ‘हमने सबसे पहले एक आवाज़ सुनी और सभी तुरंत दुकान से बाहर भाग आए. शुरू में हमने मिट्टी का एक छोटा-सा हिस्सा नीचे खिसकते हुए देखा. मिट्टी का वह छोटा सा खिसकाव अचानक एक बड़े भूस्खलन में बदल गया. हमने आस-पास के सभी लोगों को दूर हटने के लिए आगाह किया. बस स्टॉप पर लोग इंतज़ार कर रहे थे और उस इलाके में मज़दूर काम कर रहे थे.’
पर्यावरणविदों ने ट्विन टनल परियोजना की जांच की मांग की
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, मंगलवार को पर्यावरणविदों ने केरल सरकार से मांग की कि वह वायनाड की विवादित ट्विन टनल परियोजना के भू-वैज्ञानिक और सामाजिक असर की स्वतंत्र जांच का आदेश दे.
इस संबंध में पत्रकारों से बात करते हुए लेखक और एक्टिविस्ट सीआर नीलकंदन ने मांग की कि इस प्रोजेक्ट के तहत सभी जगहों पर निर्माण कार्य रोक दिया जाए.
उन्होंने कहा, ‘मिट्टी खिसकने की घटना टनल प्रोजेक्ट और वायनाड में इस तरह की विकास गतिविधियों के लिए एक चेतावनी है. इस प्रोजेक्ट को बिना सही और भरोसेमंद जियोलॉजिकल और हाइड्रोलॉजिकल अध्ययनों के ही मंज़ूरी दे दी गई थी. यह इलाका ऐसा है जहां ‘सॉइल पाइपिंग’ (soil pipping) देखी गई है, जिससे मॉनसून के दौरान लैंडस्लाइड हो सकता है. इसलिए, टनल का काम दोबारा शुरू करने से पहले राज्य सरकार को एक्सपर्ट और स्वतंत्र एजेंसियों से ऐसी स्टडीज़ करवाने का आदेश देना चाहिए.’
उन्होंने आगे कहा कि यदि अध्ययनों से पता चलता है कि परियोजना अव्यवहार्य है, तो वायनाड के लोगों के लिए वैकल्पिक यात्रा विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए.
वहीं, पर्यावरण पर्यवेक्षक श्रीधर राधाकृष्णन ने कहा कि टनल परियोजना ‘प्रगति का प्रतीक नहीं, बल्कि एक संभावित कृत्रिम आपदा है.’
उन्होंने फेसबुक पर लिखा, ‘राज्य सरकार को राज्य स्तरीय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (सीईएसी) की सिफारिश और राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) से मिली पर्यावरण मंज़ूरी को तुरंत रद्द कर देना चाहिए. उसे एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से पर्यावरण और समाज पर पड़ने वाले असर का विस्तृत अध्ययन करवाना चाहिए. सीईआईएए की मंज़ूरी वैज्ञानिक सबूतों पर आधारित नहीं थी. यह राजनीतिक कारणों से प्रेरित थी. प्रोजेक्ट को मंज़ूरी देते समय पहले हुए अहम अध्ययनों और चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया गया.’
उल्लेखनीय है कि इस प्रोजेक्ट के तहत वायनाड ज़िले के मेप्पाडी और कोझिकोड ज़िले के अनाक्कमपोयिल के बीच 8.11 किलोमीटर लंबी ट्यूब टनल बनाई जानी है. इसकी घोषणा 2020 में भीड़-भाड़ वाले थामारासेरी घाट रोड के विकल्प के तौर पर पहाड़ी ज़िले तक पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक रास्ते के रूप में की गई थी.
पर्यावरण कार्यकर्ताओं के कड़े विरोध और सीईएसी की शुरुआती आपत्तियों के बावजूद 2024 में इसका काम शुरू किया गया. यह काम मेप्पाडी के पास हुए एक बड़े भूस्खलन में 300 से ज़्यादा लोगों की मौत के कुछ हफ़्तों बाद ही शुरू किया गया था.
इस निर्माण कार्य में पश्चिमी घाट के बहुत नाज़ुक हिस्से में ड्रिलिंग करना और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाके (ESZ) में कम से कम 14 हॉटस्पॉट से होकर टनल बनाना शामिल है.
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का तर्क है कि टनल बनाने और ड्रिलिंग करने से इलाके की ऊपरी मिट्टी और ढीली हो जाएगी, जिससे ज़मीन खिसकने और ढलानों के अस्थिर होने का खतरा बढ़ जाएगा. साथ ही,इससे ऊपर के जंगलों में जंगली हाथियों की आवाजाही में भी रुकावट आएगी.
मालूम हो कि प्रोजेक्ट को मंज़ूरी देने से पहले सीईएसी ने जून 2024 में इसके पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर सावधानी बरतने की बात कही थी.
इसमें कहा गया था, ‘प्रस्तावित टनल रोड के आस-पास के इलाकों को ज़मीन खिसकने के ज़्यादा या मध्यम जोखिम वाले ज़ोन के तौर पर बांटा गया है…स्थिरता विश्लेषण से पता चलता है कि प्रोजेक्ट वाले इलाकों में इसके फेल होने की संभावना है. ज़मीन की ऊपरी परत (ओवरबर्डन) और उसके नीचे की चट्टान की सतह पर अधिक दबाव से खिसकने या बहने की संभावना है.’
2023 में कोंकण रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केआरसीएल) और किटको की पर्यावरण पर असर का आकलन करने वाली रिपोर्ट में भी यह माना गया कि प्रोजेक्ट वाला इलाका ‘खासकर मॉनसून के दौरान पहाड़ी ढलानों पर बार-बार होने वाले भूस्खलन के लिए जाना जाता है.’
केरल सरकार ने भूस्खलन की वजहों की जांच के आदेश दिए
इस बीच केरल सरकार ने बुधवार को ट्विन टनल प्रोजेक्ट साइट पर हुए भूस्खलन की वजहों की जांच के आदेश दिए हैं.
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कहा कि कैबिनेट ने इस मामले पर विस्तार से चर्चा की और घटना की व्यापक जांच कराने का फैसला किया है.
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस मामले में दो अलग-अलग जांच की जाएंगी- एक भूस्खलन की वजह का पता लगाने के लिए और दूसरी यह जांचने के लिए कि क्या प्रोजेक्ट को पूरा करने के दौरान केंद्र सरकार के पर्यावरण संबंधी दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया गया था.
उन्होंने कहा कि इलाके में और हादसों की संभावना का आकलन करने के बाद ही साइट पर निर्माण कार्य फिर से शुरू किया जाएगा.
इससे पहले मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने आरोप लगाया था कि ठेकेदारों ने ज़िला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बार-बार चेतावनी के बावजूद खुदाई से निकली मिट्टी नहीं हटाई.
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर केरल के मंत्री टी सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि वायनाड के कल्लाडी में हुआ भूस्खलन ‘मानव निर्मित आपदा’ है.
उनका कहना था कि अधिकारियों ने पहले हीकोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड को संभावित खतरे की चेतावनी दी थी, लेकिन कोई रोकथाम के कदम नहीं उठाए गए.
वायनाड से लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस भूस्खलन में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताई और इस मुश्किल समय में उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया.
प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बचाव अभियान जारी है और मुख्यमंत्री वीडी सतीशन स्वयं राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं.
All efforts are on to rescue those still trapped in the landslide. Respected CM, Shri. V D Satheesan is monitoring relief efforts himself, the police and NDRF have been at the site for some time, SDRF teams and civil defence volunteers have also reached.
We are all coordinating…
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) July 7, 2026
उन्होंने लिखा कि भूस्खलन में फंसे लोगों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं. पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर मौजूद हैं. हम जिला प्रशासन, मंत्री टी. सिद्दीक और एपी अनिल कुमार, स्थानीय पार्टी पदाधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए हैं.
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता पी. विजयन ने इस हादसे पर दुख जताते हुए घटना की जांच की मांग है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि यह घटना किसी चूक या ‘आपराधिक लापरवाही’ के चलते तो नहीं हुई.
