राम मंदिर चढ़ावा चोरी: कांग्रेस ने कहा- माफ़ी मांगें पीएम मोदी, उन्होंने चंपत राय को नियुक्त किया था

राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन और चोरी के मामले को लेकर कांग्रेस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की तत्काल गिरफ़्तारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों को चुनने में हुई ग़लती के लिए माफ़ी की मांग की है. कांग्रेस का कहना है कि पीएम मोदी अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकते क्योंकि उन्होंने ही चंपत राय को नियुक्त किया था.

अयोध्या में राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो साभार: facebook/@BJP4India)

नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावे की कथित चोरी और गबन को लेकर जारी विवाद के बीच प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने बुधवार (8 जुलाई) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों को चुनने में हुई गलती के लिए माफी की मांग की है.

पार्टी ने यह भी मांग की है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और ट्रस्ट को भंग कर, गबन के आरोपों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराई जाए.

नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस के पूर्व सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकते क्योंकि उन्होंने ही चंपत राय को नियुक्त किया था.

मालूम हो कि राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले में चौतरफा आलोचनाओं से घिरे चंपत राय और अनिल मिश्रा ने मंदिर ट्रस्ट के सदस्य के पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

इस संबंध में कांग्रेस के पूर्व सांसद ने कहा, ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाए और उसकी जगह नया ट्रस्ट गठित किया जाए, जिसमें कौन लोग शामिल होंगे, उस बारे में सभी शंकराचार्य जी, उच्चतम न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश, निर्मोही अखाड़ा के प्रतिनिधि तथा साधु-संत मिलकर तय करें.’

गोहिल ने आगे कहा, ‘चंपत राय कह रहे हैं कि उन्होंने चाबियां अपने ड्राइवर को सौंप दी थीं. अगर चाबियां, जिनकी ज़िम्मेदारी आपकी थी, आपके ड्राइवर को सौंप दी गई थीं, तो इसके लिए सीधे तौर पर आप ही ज़िम्मेदार हैं.’

हालांकि, एसआईटी ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंप दी है, लेकिन उसमें राय का ज़िक्र नहीं है. उनके सहयोगी ‘टिन्नू’ यादव इस मामले में आरोपियों में से एक हैं और एसआईटी ने उनका नाम अनिल मिश्रा और इस मामले में पहले ही गिरफ़्तार किए गए आठ लोगों के साथ शामिल किया है.

गोहिल ने कहा कि पीएम मोदी को देश से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि यह उनकी गलती थी कि उन्होंने संतों के बजाय चंपत राय को ट्रस्ट में नियुक्त किया. इसके साथ ही मोदी को देश की जनता को बताना चाहिए कि चंपत राय ने उन्हें भगवान विष्णु का अवतार बताकर हिंदू भावनाओं का अपमान किया है, और वह एक आम इंसान हैं, न कि विष्णु के अवतार. वे आजतक चुप रहे इसके लिए उन्हें माफ़ी मांगनी चाहिए.

उन्होंने आगे कहा कि भगवान श्री राम के मंदिर के लिए करोड़ों लोगों ने पूरी श्रद्धा के साथ चंदा दिया था, लेकिन ट्रस्ट ने उनका कोई हिसाब ही नहीं रखा. जब तक राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की बात सामने नहीं आई थी, तब तक हर रोज 16-18 लाख रुपये दान के रूप में जमा होते थे. लेकिन जैसे ही मंदिर में चोरी का खुलासा हुआ, उस दिन से रोजाना 24-26 लाख रुपये जमा होने लगे. यानी- हर दिन करीब 10 लाख रुपये का हेरफेर किया जाता था.

उन्होंने आगे कहा, ‘राम मंदिर के मुख्य पुजारी महंत लाल दास ने रथ यात्रा के दौरान कहा था कि इसे धार्मिक स्थान ही रहने दो, राजनीति का अखाड़ा मत बनाइए. इसके बाद, पहले उन्हें पद से हटाया गया और फिर बाद में उनकी हत्या कर दी गई.’

गोहिल ने कहा कि पीएम मोदी, जिन्होंने राय जैसे लोगों को ट्रस्ट का सदस्य नियुक्त किया था, उन्हें भी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘अगर मैं किसी को नियुक्त करता हूं और वह व्यक्ति कोई गलत काम करता है, तो उसकी ज़िम्मेदारी मेरी भी होती है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे बहुत अच्छे ढंग से कहा था कि अगर रखवाली करने वाला कुत्ता नहीं भौंकता, तो आपको समझ लेना चाहिए कि वह चोरों को जानता है.’

कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि सनातन में शंकराचार्य जी का आदेश आखिरी माना जाता है. शंकराचार्य जी ने कहा था कि राम मंदिर में कार्यक्रम के लिए मुहूर्त ठीक नहीं है, लेकिन भाजपा ने चुनावी लाभ के लिए बात नहीं मानी. सच्चाई ये है कि भाजपा के नेता भगवान के नाम पर अपनी रोटी सेकते हैं. हर राम मंदिर में पूरा राम दरबार मौजूद होता है, लेकिन ये पहला मंदिर है, जहां सीता मैया का स्थान ही नहीं है.

शक्ति सिंह गोहिल के अनुसार, ‘अयोध्या राम मंदिर में 40 दिन की सीसीटीवी फुटेज मिली है, जिसमें 70 बार चोरी की वारदात नजर आई है. 2023 से 2025 तक के ऑडिट रिपोर्ट में भी लिखा है कि मंदिर में चढ़ावा चोरी किया जा रहा है. इतना ही नहीं सीसीटीवी का कवरेज भी सही जगह पर नहीं है- लेकिन इन बातों की जांच नहीं की गई. सच्चाई ये है कि जब ट्रस्ट ने 2.9 करोड़ रुपये की जमीन को 18 करोड़ रुपये में खरीदा था, इसे तभी बर्खास्त कर देना चाहिए था.’

उन्होंने आगे कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और उसमें किसी भी तरह की कथित वित्तीय अनियमितता को स्वीकार नहीं किया जा सकता.