नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दिल्ली के आर्थिक सेल के संयोजक विकास गर्ग महादेव ऑनलाइन बुक/स्काईएक्सचेंज अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में कथित तौर पर शामिल होने के चलते प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में हैं.
विकास गर्ग को 8 जुलाई को हिरासत में लिया गया था. ईडी ने 10 जुलाई को जारी एक बयान में उन पर लगे आरोपों की पुष्टि की.
इससे पहले अप्रैल 2025 में उनकी कंपनियों पर छापेमारी की गई थी, लेकिन तब यह साफ नहीं किया गया था कि छापेमारी किस बारे में थी.
इस संबंध में प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर में कहा गया है कि ईडी ने विकास गर्ग, उनके परिवार और उनकी कंपनियों की लगभग 940.77 करोड़ रुपये की संपत्ति का पता लगाया है. इन संपत्तियों को अवैध सट्टेबाजी के कारोबार से हुई कमाई बताया गया है, जिसे ‘विकास गर्ग के मालिकाना हक और नियंत्रण वाली कंपनियों में भेजा गया था.’
खबरों के अनुसार, इन संपत्तियों में रिहायशी प्रॉपर्टी, ज़मीन खंड, इक्विटी शेयर और अन्य सिक्योरिटीज शामिल हैं.
विकास गर्ग पर मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत मुकदमा चलाया जा रहा है. उन्हें अगस्त 2024 में भाजपा की दिल्ली इकोनॉमिक सेल का संयोजक नियुक्त किया गया था; इस पद की पुष्टि उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल और पार्टी की पदाधिकारियों की सूची से होती है.
इसके अलावा वह कई लिस्टेड कंपनियों के प्रमोटर हैं: विकास लाइफकेयर लिमिटेड और विकास इकोटेक लिमिटेड (ये दोनों नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड केमिकल बनाने वाली कंपनियां हैं); एबिक्स लिमिटेड (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड एक ग्लोबल डिजिटल और फाइनेंशियल एक्सचेंज फर्म) और एबिक्स इंक (जो अमेरिका में नैस्डैक में लिस्टेड है).
महादेव केस
उल्लेखनीय है कि महादेव बुक एक मोबाइल ऐप है जिसके दस लाख से ज़्यादा यूज़र्स हैं और यह खुद को ‘स्पोर्ट्स इनसाइट्स’ प्लेटफॉर्म बताता है. यह दुबई में मौजूद ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म ‘स्काईएक्सचेंज’ से जुड़ा है. 2022 से केंद्रीय एजेंसियां इस ऐप के प्रमोटर्स – सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल – की जांच कर रही हैं. उन पर गैर-कानूनी बेटिंग सिंडिकेट चलाने और बेनामी बैंक अकाउंट, हवाला नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी से हुई कमाई को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए ठिकाने लगाने के आरोप हैं.
कहा जाता है कि इस कमाई के कुछ हिस्से का इस्तेमाल भारत में स्टॉक की कीमतों में हेरफेर करने के लिए भी किया गया था.
ज्ञात हो कि यह मामला 2023 में तब चर्चा में आया जब ईडी ने आरोप लगाया कि प्रमोटरों ने छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (जो कांग्रेस से जुड़े हैं) को लगभग 508 करोड़ रुपये का भुगतान किया था.
इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा और इसमें भारतीय कंपनियों, विदेशी संस्थागत निवेशकों और बॉलीवुड हस्तियों के नाम भी सामने आए, जिनके तार 2023 में चंद्राकर से जुड़े थे.
ईडी की मार्च 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एजेंसी ने इस केस के सिलसिले में देश में कुल 175 ठिकानों पर छापा मारा, 13 लोगों को गिरफ्तार किया और 74 चार्जशीट दाखिल करके भारत और विदेश में कुल 4336 करोड़ की चल-अचल संपत्ति जब्त की.
इस मामले में गर्ग के कथित संबंधों पर हाल तक व्यापक जांच के दौरान बहुत कम ध्यान दिया गया था और जनता की नज़रों में भी यह मामला कम आया था.
हालांकि, ‘स्क्रॉल’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, गर्ग की कंपनियों ने 2024 में शेयर बाज़ार में अनिवार्य खुलासों के दौरान ईडी की जांच की बात स्वीकार की थी.
कोलकाता-दुबई मनी ट्रेल
स्क्रॉल की रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की फाइलिंग से पता चलता है कि 2022 के आखिर तक दुबई की कंपनी इकोटेक जनरल ट्रेडिंग एलएलसी के पास विकास लाइफकेयर में 1.76% हिस्सेदारी थी, जिसकी कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये थी.
वहीं, मई 2023 तक कोलकाता की पांच कंपनियों – ब्रिलियंट इंवेस्टमेंट कंसल्टेंट्स, डिस्कवरी बिल्डकॉन, ड्रीम अचीवर्स कंसल्टेंसी सर्विसेज, फॉरेस्ट विंकॉम और स्वर्णभूमि वाणिज्य – ने लगभग 38 करोड़ रुपये में विकास लाइफकेयर की करीब 8% हिस्सेदारी खरीद ली थी, जबकि स्वर्णभूमि के पास अकेले विकास इकोटेक में लगभग 5 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी थी.
कोलकाता की पांच कंपनियों के कॉमन डायरेक्टर, सूरज चोखानी का नाम ईडी ने मार्च 2024 में दुबई के बिज़नेसमैन हरि शंकर टिबरेवाला के सहयोगी के तौर पर लिया था.
एजेंसी ने टिबरेवाला को ‘बड़ा हवाला ऑपरेटर’ बताया था, जो स्काईएक्सचेंज के मालिक और ऑपरेटर हैं. तब से ये सभी छह कंपनियां ईडी के दस्तावेज़ों में सामने आई हैं, जिनमें फरवरी 2024 का फ्रीजिंग ऑर्डर और मनी लॉन्ड्रिंग के तहत चार्जशीट की गई 1,519 कंपनियों की लिस्ट शामिल है, जिसे वित्त मंत्रालय ने अगस्त 2024 में संसद के सामने पेश किया था.
इसके अलावा इंडिया टुडे की जुलाई 2025 की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ईडी को शक है कि टिबरेवाला की विदेशी कंपनियों ने निवेश का इस्तेमाल करके गर्ग से जुड़ी कंपनियों की वैल्यूएशन बढ़ाई थी. एजेंसी ने अभी तक सार्वजनिक रूप से इस दावे की पुष्टि नहीं की है और चोखानी और टिबरेवाला दोनों ने इन आरोपों का खंडन किया है.
भाजपा कनेक्शन
गौरतलब है कि विकास गर्ग का नाम लगातार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ जोड़ा जाता रहा है और उनके साथ उनकी तस्वीरें भी सामने आई हैं. इन नेताओं में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और सासंद मनोज तिवारी शामिल हैं.
‘स्क्रॉल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 में उन्होंने कॉरपोरेट मामलों के तत्कालीन केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा से भी मुलाकात की थी; कहा जाता है कि यह मुलाकात भाजपा के इकोनॉमिक सेल के कामकाज पर चर्चा करने के लिए हुई थी.
मालूम हो कि गर्ग एक ऐसे राजनीतिक परिवार से आते हैं जिसका भाजपा से जुड़ाव रहा है. उनके पिता, नंद किशोर गर्ग, पहले दिल्ली की त्रिनगर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर तीन बार चुने जा चुके हैं.
गर्ग ने आरोपों का खंडन किया
गर्ग की कंपनियों ने अपनी सालाना रिपोर्ट में सभी आरोपों से इनकार किया है.
‘स्क्रॉल’ के अनुसार, विकास लाइफकेयर ने अपनी 2024-2025 की सालाना रिपोर्ट में ईडी की कार्रवाई का ज़िक्र किया था और कहा था कि वह केस को रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का आदेश लेने की योजना बना रही है; हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट के ई-कोर्ट पोर्टल पर ऐसी कोई याचिका नहीं मिली.
इसके बजाय कोर्ट के रिकॉर्ड से पता चला कि गर्ग ने ईडी की रायपुर ब्रांच के खिलाफ पीएमएलए के अपीलेट ट्रिब्यूनल में अपील की है, जो महादेव ऑनलाइन बेटिंग केस की जांच कर रही है.
इस संबंध में जून 2026 में सामने आई जानकारी से पता चला है कि विकास लाइफकेयर की 13 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को ज़ब्त किया गया था. कंपनी का दावा था कि उसकी मूल कंपनी जांच में बताई गई गतिविधियों में ‘न तो शामिल थी और न ही उससे उसे कोई फ़ायदा हुआ था.’
स्क्रॉल के सवालों के जवाब में गर्ग के वकीलों ने कहा कि मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और गर्ग को ‘किसी अपराध का दोषी नहीं ठहराया गया है.’
इस बीच जांच के मुख्य आरोपी अभी भी भारतीय अदालतों की पहुंच से बाहर हैं. हालांकि, दिसंबर 2023 में संयुक्त अरब अमीरात की पुलिस ने उप्पल को गिरफ़्तार किया था, लेकिन ख़बरों के मुताबिक वह नवंबर 2025 में हिरासत से भाग निकले.
पिछले हफ़्ते ओमान में चंद्राकर को हिरासत में लिया गया था और भारत सरकार अभी उन्हें भारत लाने (प्रत्यर्पण या डिपोर्टेशन के जरिए) की कोशिश कर रही है.
