नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में चल रहे आदिवासियों के आंदोलन को रविवार (19 जुलाई) तड़के पुलिस ने जबरन समाप्त कराने की कोशिश की है. फिलहाल पुलिस ने आंदोलन स्थल को खाली करा दिया है और पिछले 14 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे आंदोलनकारी अमित भटनागर को अस्पताल ले जाया गया. इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग और महिलाओं के साथ बदसलूकी के आरोप लगाए हैं.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन बाराना नदी के किनारे कूपी गांव के पास चल रहा था. पुलिस और प्रशासन का कहना है कि लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ रहा था और आंदोलन स्थल सुरक्षित नहीं रह गया था. इसी वजह से प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने का फैसला लिया गया.
पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर बनाए गए अस्थायी ढांचे और नदी के भीतर प्रतीकात्मक रूप से बनाई गई चिताओं को भी हटा दिया. आंदोलनकारी इन्हीं चिताओं पर लेटकर और गले में फंदा डालकर ‘न्याय दो, वरना मार दो’ का प्रतीकात्मक प्रदर्शन कर रहे थे.
हालांकि, कई प्रदर्शनकारियों ने वहां से हटने से इनकार कर दिया. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कुछ महिलाएं पुलिस कार्रवाई का विरोध करती दिख रही हैं. कुछ वीडियो में पुलिसकर्मियों को महिलाओं को किनारे से खींचते हुए भी देखा जा सकता है. वहीं, दूसरी ओर कुछ वीडियो में प्रदर्शनकारी, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है, तेज बहाव के बीच एक-दूसरे का हाथ पकड़कर नदी पार करने की कोशिश करते दिखाई देते हैं, जबकि पुलिसकर्मी उन्हें बाहर आने के लिए कहते सुनाई देते हैं.

पुलिस ने अमित भटनागर को अस्पताल पहुंचाया
छतरपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदित्य पाटले ने कहा कि अमित भटनागर कई दिनों से अनशन पर थे, इसलिए डॉक्टरों की टीम पुलिस और प्रशासन के साथ उनका स्वास्थ्य परीक्षण करने पहुंची थी.
पाटले के अनुसार, भटनागर ने स्वयं भी अधिकारियों से संपर्क कर बताया था कि उनकी तबीयत कुछ बिगड़ रही है. इसके बाद पुलिस, डॉक्टरों और प्रशासन की मौजूदगी में उन्हें शांतिपूर्वक अस्पताल भेजा गया.
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन स्थल पर मौजूद महिलाओं को बसों के जरिए उनके घर पहुंचा दिया गया है.

पाटले ने कहा कि जहां प्रदर्शन हो रहा था, वहां पुल का निर्माण कार्य चल रहा है और लगातार बारिश से नदी का जलस्तर बढ़ रहा था. ऐसे में लोगों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें वहां से हटाया गया. उनका दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन का सहयोग किया.
करीब दो सप्ताह से चल रहा था आंदोलन
पन्ना और छतरपुर जिलों के कई गांवों के निवासी, जिनमें बड़ी संख्या आदिवासियों की है, पिछले करीब दो सप्ताह से बाराना नदी के किनारे धरना दे रहे थे. वे केंद्र सरकार की लगभग 44,000 करोड़ रुपये की केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और राज्य सरकार की अन्य सिंचाई परियोजनाओं का विरोध कर रहे हैं.
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग बेहतर पुनर्वास और मुआवजा पैकेज की है. उनका आरोप है कि विस्थापन सर्वेक्षण में कई प्रभावित परिवारों को शामिल ही नहीं किया गया.

‘न्याय दो, वरना मार दो’ के नारे के साथ इस अनोखे विरोध प्रदर्शन की शुरुआत पहली बार अप्रैल में हुई थी. सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला. इसके बाद इसी महीने आंदोलन दोबारा शुरू किया गया.
सोनम वांगचुक की तरह यहां भी पुलिस कार्रवाई
रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब एक दिन पहले ही दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को उनके आंदोलन स्थल से हटाकर अस्पताल पहुंचाया था.
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सोनम वांगचुक 21 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे. वे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और अपने समर्थकों के साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, विशेषकर नीट पेपर लीक, के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं.
कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने असहमति की हर आवाज को दबाना ही अपनी शासन शैली बना लिया है.
उन्होंने अमित भटनागर समेत हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा करने की मांग की. साथ ही केन-बेतवा परियोजना से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग की.
सिंघार ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है, लेकिन भाजपा सरकार ने हर असहमति को कुचलना अपना तरीका बना लिया है. उनका कहना था कि सरकार ने संवाद का रास्ता छोड़कर दमन का रास्ता चुना है.
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र लाठी और गिरफ्तारियों से नहीं, बल्कि संवाद और संविधान से चलता है. उनके मुताबिक, लगातार दो दिनों में शांतिपूर्ण आंदोलनों पर हुई पुलिस कार्रवाई इस बात का संकेत है कि देश को लोकतंत्र नहीं, बल्कि भय और दमन के माहौल की ओर धकेला जा रहा है. उन्होंने मध्य प्रदेश की इस कार्रवाई की तुलना दिल्ली में सोनम वांगचुक के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई से भी की.
