केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ बातचीत के आश्वासन के बाद किसानों ने दिल्ली मार्च रद्द किया

भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में हरियाणा और पंजाब से दिल्ली आ रहे सैकड़ों किसानों को पुलिस ने शंभू और खनौरी बार्डर में रोक दिया और कई प्रमुख किसान नेताओं को हिरासत में लिया. बाद में हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा द्वारा किसानों से मिलकर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ औपचारिक बैठक का आश्वासन देने के बाद दिल्ली मार्च रद्द कर दिया गया.

मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को पटियाला में पंजाब-हरियाणा बॉर्डर के पास शंभू टोल प्लाज़ा के नज़दीक किसानों को रोका गया. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में मंगलवार (21 जुलाई) को इकट्टा हुए सैकड़ों किसानों को हरियाणा पुलिस ने भारी संख्या में तैनात होकर नई दिल्ली के किसान घाट जाने से रोकने की कोशिश की थी.

पुलिस ने अमृतसर-दिल्ली नेशनल हाईवे पर शंभू और खनौरी बॉर्डर पर कई स्तर की बैरिकेडिंग की, ठीक वैसी ही जैसी फरवरी 2024 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी के लिए हुए ‘दिल्ली चलो-2’ विरोध प्रदर्शन के दौरान देखी गई थी.

इसके बाद आगे बढ़ने से रोके जाने पर किसानों ने शंभू बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन किया. पुलिस ने कई प्रमुख किसान नेताओं को हिरासत में लिया, जिनमें हरियाणा के यूनियन लीडर गुरनाम सिंह चढूनी भी शामिल थे, जिन्हें सोमवार को हिरासत में लिया गया था. पंजाब के वीएम सिंह और सुरजीत सिंह फूल को दिल्ली में हिरासत में लिया गया.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, किसान नेताओं सरवन सिंह पंढेर और तेजवीर सिंह ने केंद्र, पंजाब और हरियाणा सरकारों पर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों को दबाने का आरोप लगाया.

दोनों नेताओं ने कहा, ‘हरियाणा पुलिस ने पंजाब की सीमा के अंदर बैरिकेडिंग की और पंजाब सरकार ने उन्हें नहीं रोका. केंद्र और हरियाणा में भाजपा सरकारों ने एक बार फिर अपना किसान-विरोधी चेहरा दिखाया है, जबकि प्रधानमंत्री खुद को किसानों का दोस्त बताते हैं.’

उन्होंने कहा कि किसानों ने दिल्ली में केवल चार घंटे के विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी.

किसानों को रोकने के लिए मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को हरियाणा के अंबाला ज़िले में शंभू बॉर्डर पर सुरक्षाकर्मी दंगा-रोधी गाड़ियों के साथ तैनात थे. (फोटो: पीटीआई)

खनौरी बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन (एकता आज़ाद) के मंजीत सिंह न्याल ने बताया कि लगभग 150 गाड़ियों में 1,200 से ज़्यादा किसान मौके पर पहुंचे थे. पटियाला जिले के घाग्गा, पाट्रान और आसपास के इलाकों के ग्रामीणों ने उनका समर्थन किया. महिलाओं ने स्थानीय गुरुद्वारे में लंगर तैयार किया और फंसे हुए प्रदर्शनकारियों के लिए खाने से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉलर भेजे.

यह गतिरोध तब खत्म हुआ जब हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा शंभू पहुंचे और कहा कि हिरासत में लिए गए सभी कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया जाएगा और किसानों की केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ औपचारिक बैठक होगी. ‘देश बचाओ मोर्चा’ मांग कर रहा है कि केंद्र सरकार प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़े सभी दस्तावेज़ सार्वजनिक करे.

सीमा पर भारी बैरिकेडिंग, सुरक्षा बढ़ाने और पुलिस के साथ बातचीत के बाद किसानों ने दिल्ली तक प्रस्तावित मार्च रद्द कर दिया.

एसकेएम ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और न्यूज़ीलैंड के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौतों के विरोध में बुधवार को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे एक पत्र में किसान यूनियनों के इस संगठन ने सरकार से बातचीत रोकने और व्यापार की सभी शर्तें संसद के सामने रखने का आग्रह किया.

उन्होंने चेतावनी दी कि कृषि उत्पादों, डेयरी और प्रोसेस्ड सामानों पर आयात शुल्क हटाने से घरेलू बाज़ार भर जाएंगे, फसलों की कीमतें गिर जाएंगी और छोटे किसानों की आजीविका बर्बाद हो जाएगी.

एसकेएम की इकाइयां 22 जुलाई को गांवों में बैठकें करेंगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला जलाएंगी.

प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से किसानों पर बुरा असर पड़ेगा

किसान संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से भारत में सस्ते कृषि उत्पादों का आयात बढ़ेगा, जिससे देश के किसानों की आय और कृषि अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.

उनका यह भी दावा है कि इस समझौते का असर खेतिहर मजदूरों, पशुपालकों, छोटे व्यापारियों और सूक्ष्म उद्योगों पर बुरा असर पड़ेगा.

प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह इस प्रस्तावित व्यापार समझौते को रद्द कर दे और किसानों सहित व्यापक जनहित की रक्षा करे.

किसान नेताओं ने आगे कहा कि भारत का डेयरी क्षेत्र लगभग आठ करोड़ ग्रामीण परिवारों की आजीविका का आधार है. अगर इस क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार पर दूरगामी असर पड़ेगा. इसी तरह बीज उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र, छोटे व्यवसाय और कृषि आधारित उद्योग भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं.

उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित व्यापार समझौते से जुड़े दस्तावेजों में सोयाबीन, मक्का, कपास, इथेनॉल, सेब, बादाम और अन्य कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने की मांग की गई है. साथ ही अमेरिकी डेयरी उत्पादों, पोल्ट्री, फलों, मछली उत्पादों, नारियल और अन्य वस्तुओं को भारतीय बाजार में अधिक पहुंच देने की भी बात कही गई है.

उल्लेखनीय है कि फरवरी 2024 में भी किसानों को रोकने के लिए ऐसी ही बैरिकेडिंग की गई थी, जब किसानों ने सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग करते हुए ‘दिल्ली चलो-2’ का आह्वान किया था. उस आंदोलन के दौरान किसानों ने शंभू और खनौरी बॉर्डर पर एक साल से ज़्यादा समय तक धरना दिया था.

उससे पहले साल 2020 में किसानों ने 13 महीने तक दिल्ली की सीमा बिंदुओं पर डेरा डाला था, जिसके परिणामस्वरूप केंद्र सरकार को तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा था. केंद्र ने 9 दिसंबर 2021 को उनकी अन्य लंबित मांगों पर विचार करने के लिए सहमति व्यक्त की थी. उसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने एक साल से अधिक समय से चल रहे उनके आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की थी.