नई दिल्ली: तीन साल से अधिक समय से हिंसा से जूझ रहे मणिपुर में अब एक छात्र समूह ने एनआरसी की मांग उठाई है. द जस्ट एंड फेयर डीलिमिटेशन (जेएफडी) नाम के इस समूह ने राज्य में 2027 की जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने से पहले एनआरसी लागू करने की मांग को लेकर दो दिन की आम हड़ताल की घोषणा की है.
सोमवार (17 अगस्त) की आधी रात को शुरू हुई यह हड़ताल, इंफाल में छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी समूहों के उस विरोध के बीच हो रही है जो 2027 की जनगणना की तैयारियों के खिलाफ है.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जेएफडी ने मांग की है कि जनगणना से जुड़ी सभी गतिविधियां तब तक रोक दी जाएं जब तक कि ‘अवैध प्रवासियों’ की पहचान न हो जाए; इसके लिए 1951 को आधार वर्ष बनाने का प्रस्ताव है.
यह हड़ताल मणिपुर में 2027 की जनगणना के घरों की सूची बनाने (हाउस-लिस्टिंग) के चरण के दौरान हो रही है, जिसके तहत 17 अगस्त को ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ (खुद जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया) शुरू हुई थी. मुख्य हाउस-लिस्टिंग का काम 1 सितंबर से 30 सितंबर के बीच होना है. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे इस प्रक्रिया का पूरी तरह से बहिष्कार करेंगे.
अख़बार के अनुसार, इस हड़ताल को कई सिविल सोसाइटी संगठनों का समर्थन मिला है, जिनमें यूनाइटेड मेइतेई नगा कमेटी मणिपुर, फेडरेशन ऑफ नगा सिविल सोसाइटी, चंदेल नगा पीपल्स ऑर्गनाइजेशन, यूनाइटेड मेइतेई पांगल कमेटी और नेटिव पीपल्स कमेटी मणिपुर शामिल हैं.
इस समूह के हड़ताल के ऐलान के बाद, सोमवार (17 अगस्त) को इंफाल घाटी के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन की खबरें आईं. आंदोलन के समर्थन में एक बड़ा व्यावसायिक इलाका-ख्वाइरामबंद कीथेल बंद रहा. इसके साथ ही धनमंजुरी यूनिवर्सिटी में जब छात्रों ने दो संस्थानों में जनगणना से जुड़ी ट्रेनिंग को रोकने की कोशिश की, तब छात्रों और पुलिस के बीच टकराव हुआ. अख़बार के मुताबिक, पुलिस के कथित लाठीचार्ज में कम से कम दो प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं.
इसी दौरान छात्रों ने क्वाइथेल से केइसमपट तक का एक जुलूस निकाला, जिसमें शामिल लोगों ने जनगणना के खिलाफ नारेबाजी की और लोगों से इसका बहिष्कार करने की अपील की. रिपोर्ट के अनुसार, सीसी हायर सेकेंडरी स्कूल के छात्रों ने भी आंदोलन में हिस्सा लिया.
उधर, ‘ऑल मणिपुर स्टूडेंट्स यूनियन’ ने भारत और म्यांमार के बीच संभावित ‘ज़मीन की अदला-बदली’ को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि इस कदम का मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता पर गहरा असर पड़ सकता है.
अभी घरों की लिस्टिंग का काम चल रहा है, ऐसे में अगले साल होने वाली जनगणना से पहले एनआरसी का मुद्दा मौजूदा छात्र विरोध प्रदर्शनों का मुख्य कारण बन गया है.
