केन-बेतवा आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता ने अनिश्चितकालीन अनशन स्थगित किया

मध्य प्रदेश के छतरपुर ज़िले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के ख़िलाफ़ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने अपना अनशन 19वें दिन स्थगित करने की घोषणा करते हुए कहा कि संघर्ष अभी ख़त्म नहीं हुआ है. जब तक इस परियोजना से प्रभावित अंतिम पात्र व्यक्ति को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे.

मध्य प्रदेश, छतरपुर के ज़िला अस्पताल में 'जय किसान संगठन' के नेता अमित भटनागर ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म कर दी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने अपना अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल फिलहाल स्थगित कर दिया है. गुरुवार ( 23 जुलाई) की रात जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि उनका अनशन ‘फिलहाल के लिए रोक दिया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि प्रशासन ने ‘सकारात्मक रुख’ दिखाते हुए घोषणा की है कि परियोजना से प्रभावित हर गांव का दौरा किया जाएगा और उन लोगों की पहचान की जाएगी, जिनके नाम मुआवजे की सूची में शामिल नहीं किए गए हैं. इस प्रक्रिया में जय किसान संगठन का एक प्रतिनिधि भी शामिल रहेगा.

हालांकि, भटनागर ने स्पष्ट किया कि संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है.

उन्होंने अपने बयान में कहा, ‘मैंने अपना आमरण अनशन अभी समाप्त नहीं, बल्कि स्थगित कर दिया है. आज से मैं ‘न्याय सत्याग्रह’ का संकल्प लेता हूं. जब तक इस परियोजना से प्रभावित अंतिम पात्र व्यक्ति को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक मैं चैन से नहीं बैठूंगा.’

उन्होंने कहा कि वह गांव-गांव जाकर इस संघर्ष का नेतृत्व करेंगे, प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले हर सकारात्मक कदम में सहयोग करेंगे और किए गए हर वादे के पालन की निगरानी करेंगे.

उन्होंने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो आंदोलन के अगले चरण भी शुरू किए जाएंगे.

सामाजिक कार्यकर्ता अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं. उन्हें 19 जुलाई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और स्वास्थ्य में सुधार होने तक वहीं रखा जाएगा. 23 जुलाई को उनके अनशन का 18वां दिन था.

आंदोलन के साथ ही शुरू हुआ था अनशन

मध्य प्रदेश पुलिस ने 19 जुलाई को अमित भटनागर को जबरन हटाकर छतरपुर जिला अस्पताल पहुंचाया था और कुपी गांव के पास बारना नदी के किनारे विरोध स्थल से अन्य प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया था.

प्रदर्शनकारी, जिनमें ज़्यादातर आदिवासी समुदायों के लोग थे, 3 जुलाई से केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे और परियोजना के कारण अपनी ज़मीन और घर खोने की स्थिति में उचित मुआवजे की मांग कर रहे थे.

उनका यह आंदोलन अप्रैल में हुए उनके पिछले विरोध प्रदर्शन जैसा ही था, जिसमें उन्होंने विरोध के अनोखे तरीके अपनाए थे – जैसे चेहरे पर कीचड़ मलना, नदी के किनारे लकड़ी की चिताओं पर लेटना और गले में ढीले फंदे पहनना.

19 जुलाई को जब पुलिस अमित भटनागर को अस्पताल ले गई थी, तब भी उन्होंने कहा था कि वे अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे.

उन्होंने कहा था, ‘मैं अपना अनशन नहीं तोड़ूंगा, चाहे इसके लिए मुझे अपनी जान ही क्यों न गंवानी पड़े. अगर मुझे जबरन खिलाने की कोशिश की गई, तो मैं पानी पीना और सांस लेना भी छोड़ दूंगा.’

भूख हड़ताल खत्म करने की अपील

इस बीच, देशभर के 300 से अधिक सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरुक नागरिकों ने एक पत्र लिखकर अमित भटनागर से अपना अनशन खत्म करने की अपील की थी.

20 जुलाई को जारी एक खुले पत्र में उन्होंने लिखा था कि वे चाहते हैं कि वह अपना अनशन खत्म करें ताकि वह जीवित रहकर इस परियोजना और उससे जुड़ी नाइंसाफी, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ सकें.

पत्र में कहा गया था, ‘सरकार का ‘चिता आंदोलन’ के फिर से शुरू होने के 17वें दिन प्रदर्शनकारियों और आपको आंदोलन स्थल से हटाना इस बात की स्वीकारोक्ति थी कि यह आंदोलन प्रशासन की गलतियों को उजागर कर रहा था और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन रहा था… अब हम आपसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध करते हैं कि आप न्याय और पुनर्वास की लड़ाई में प्रभावित समुदायों का नेतृत्व करें.’

उन्होंने आगे लिखा था, ‘आपने पीड़ित लोगों और पूरे भारत के नागरिकों को अपनी आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित किया है. देश को नेतृत्व करने और रास्ता दिखाने के लिए आप जैसे लोगों की ज़रूरत है. पूरा देश आपके साथ है. हम आपको देख रहे हैं. हम आपकी बात सुन रहे हैं. कृपया अपना अनशन खत्म करें, ताकि आप उन लोगों के साथ मिलकर अपना काम पूरा कर सकें जिन्हें आपकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है.’

मेधा पाटकर ने भी की थी अपील

20 जुलाई को अमित भटनागर के नाम भेजे एक वीडियो संदेश में नर्मदा बचाओ आंदोलन की संस्थापक और नेशनल अलायंस ऑफ़ पीपुल्स मूवमेंट की सह-संस्थापक मेधा पाटकर ने कहा था कि वह केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की प्रेरणा और ताकत हैं.

उन्होंने कहा, ‘आपके साथ खड़े लोग जीने के अधिकार के लिए लड़ रहे हैं. सरकार को रचनात्मक बातचीत शुरू करनी चाहिए, यही हमारी मांग है. आप बहुत लंबे समय से अनशन पर हैं. कृपया अब अपना अनशन खत्म करें. आगे चलकर और भी संगठन इस संघर्ष से जुड़ेंगे.’

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावित होने वाले मध्य प्रदेश के गांवों की महिलाओं ने अमित भटनागर को अनशन खत्म करने के लिए मनाने के उद्देश्य से अपने घरों में खाना पकाने से इनकार कर दिया.

अमित भटनागर ने गुरुवार सुबह फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा, ‘आज मेरे आमरण अनशन का 18वां दिन है. मुझे देश भर से अपनी भूख हड़ताल खत्म करने की अपीलें मिल रही हैं. लेकिन जिस चीज़ ने मुझे सबसे ज़्यादा झकझोर दिया, वह थी आप लोगों के बुझे हुए चूल्हे. मुझे यह मंज़ूर नहीं है कि मेरी वजह से कोई बच्चा, मां या बुज़ुर्ग भूखा रहे.’

उन्होंने अपने बयान में कहा, ‘बार-बार की गई अपीलों और सबसे जो मार्मिक पहलू था कि हमारी माताएं जो छतरपुर और पन्ना जिले की थीं, उन्होंने चूल्हा बंदी और खुद भी खाना नहीं खा रही थीं, तो उसका एक नैतिक दबाव भी मेरे ऊपर था. जिस कारण अभी मैंने अपना अनशन स्थगित किया है.’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन आंदोलन चलता रहेगा और ये एक लंबी लड़ाई है, पर्यावरण को लेकर, आदिवासियों के न्याय अधिकार को लेकर, विस्थापन कानून को लेकर और हम अपनी मांगें लगातार उठाते रहेंगे, अपनी बात लगातार कहते रहेंगे.’