नई दिल्ली: बिहार में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए छात्र आंदोलन के बाद राज्य में पुलिस कार्रवाई तेज हो गई है. विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में छात्रों और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है, कई मामलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं और पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगे हैं.
इस बीच, सीवान में प्रदर्शनकारियों पर एके-47 से गोली चलाने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है, जबकि राजद सांसद मनोज कुमार झा इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं.
25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान पटना, सीवान, जहानाबाद, सारण, भागलपुर, सीतामढ़ी सहित कई जिलों में प्रदर्शन हिंसक हो गए थे. कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, वाहनों में तोड़फोड़ हुई और पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले तथा कुछ स्थानों पर गोलीबारी का सहारा लिया.
सीवान में एके-47 से फायरिंग, पुलिसकर्मी निलंबित
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 25 जुलाई के ‘बिहार बंद’ के दौरान सीवान में छात्र प्रदर्शन के समय एके-47 से फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मी की पहचान अभिषेक पटेल के रूप में हुई है, जो जिला खुफिया इकाई में तैनात कॉन्स्टेबल हैं.
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में नीले रंग का हेलमेट और बुलेटप्रूफ जैकेट पहने पटेल प्रदर्शनकारियों की ओर बढ़ते हुए एके-47 से फायरिंग करते दिखाई देते हैं. वीडियो में कम से कम एक गोली चलने की आवाज और दृश्य दर्ज है, हालांकि सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि मौके पर चार से पांच राउंड फायर किए गए थे.
घटना के बाद सीवान के पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा ने बताया कि कॉन्स्टेबल अभिषेक पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है.
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस को गोली न चलाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे और यह भी जांच की जा रही है कि किन परिस्थितियों में कॉन्स्टेबल ने एके-47 का इस्तेमाल किया.
इंडिया टुडे के अनुसार, स्थानीय समाचारों में दावा किया गया है कि फायरिंग में तीन प्रदर्शनकारी घायल हुए, जिनका पटना के जयप्रभा मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई गई है. घायलों में 15 वर्षीय मोहम्मद आरिफ भी शामिल हैं. परिवार का कहना है कि वह बंद के दौरान अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तभी उनके गले में गोली लगी. बाद में डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर गोली निकाल दी.
हालांकि, पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा ने पीटीआई से कहा कि पुलिस फायरिंग में किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है.
सीवान के अलावा जहानाबाद में भी 24 जुलाई को हिंसक प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोलीबारी की खबर सामने आई थी.
देखिए कैसे बिहार में छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिसकर्मी एके-47 से गोली चला रहा है? संपूर्ण देश में किसी भी छात्र प्रदर्शन में Police Manual का उल्लंघन कर एके-47 से गोली चलाने का यह प्रथम मामला है.
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है. अगर यही… pic.twitter.com/fEmJXK8CjQ
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) July 27, 2026
छात्रों पर एके-47 के इस्तेमाल की निंदा करते हुए बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा है, ‘7 हत्याओं का आरोपी बिहार का मुख्यमंत्री सड़कछाप अपराधी है जिसने तमाम लोकतांत्रिक परंपराओं को त्याग देश में पहली बार प्रदर्शनकारी छात्रों पर एके-47 से गोली चलवाई है. छात्रों से समझौते के बाद भी बिहार में हज़ारों छात्रों पर फर्जी केस दर्ज कर हिरासत में लिया जा रहा है, परिजनों को प्रताड़ित किया जा रहा है. अगर छात्रों को रिहा नहीं किया गया तो एनडीए सरकार को महंगा पड़ेगा.’
पटना में बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां
पटना में 22 और 25 जुलाई के प्रदर्शनों के बाद बड़ी संख्या में छात्रों और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया. प्रदर्शनकारियों की ओर से दावा किया गया कि करीब 200 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जबकि पुलिस का कहना है कि 25 जुलाई की हिंसा के मामले में 86 लोगों को न्यायिक हिरासत भेजा गया और महिलाओं तथा नाबालिगों सहित 60 लोगों को निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया.
पुलिस के अनुसार, 22 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़े मामलों में शहर के अलग-अलग थानों में 23 एफआईआर दर्ज की गईं और 67 लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया.
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, कानूनी सहायता दे रहीं अधिवक्ता आकांक्षा शाही ने दावा किया कि गिरफ्तार लोगों में बड़ी संख्या छात्रों की है और कई नाबालिग भी शामिल हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि कई परिवारों को हिरासत की सूचना समय पर नहीं दी गई. वहीं, प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि कई लोगों को केवल प्रदर्शन स्थल के आसपास होने के कारण भी पकड़ लिया गया.
कई जिलों में दर्जनों एफआईआर
अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) के. सुहिता अनुपम के अनुसार, 25 जुलाई के बिहार बंद के दौरान हुई हिंसा के संबंध में सारण, सीवान, भागलपुर, सीतामढ़ी और जहानाबाद में एफआईआर दर्ज की गई हैं.
पुलिस के मुताबिक, सारण में 56 लोग गिरफ्तार किए गए, सीवान में 25, सीतामढ़ी में 13, जहानाबाद में 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि भागलपुर में 41 नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है.
पुलिस ने यह भी कहा कि हिंसा के दौरान 19 सरकारी और एक निजी वाहन क्षतिग्रस्त हुए तथा 58 पुलिसकर्मी घायल हुए.
राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला
इस बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बिहार और दिल्ली में छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए सरकार एके-47 और पैलेट गन तक का इस्तेमाल कर रही है.
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि छात्रों के खिलाफ एफआईआर नहीं करने और उन्हें रिहा करने का जो आश्वासन दिया गया था, उसका क्या हुआ.
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे मनोज कुमार झा
राजद सांसद मनोज कुमार झा ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. उन्होंने मांग की है कि प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और उनके विरुद्ध आपराधिक तथा विभागीय कार्रवाई हो.
याचिका में घायल प्रदर्शनकारियों को मुआवजा और इलाज का खर्च देने, छात्रों को डराने-धमकाने या हिरासत में लेने से रोकने तथा 20 से 25 जुलाई के बीच छात्र आंदोलनों में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने का भी अनुरोध किया गया है.
यह याचिका मंगलवार को उन अन्य मामलों के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, जिनमें 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर कथित अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया गया है.
आइसा ने सरकार पर वादा तोड़ने का आरोप लगाया
इस बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने आरोप लगाया है कि बिहार सरकार ने संवाद की जगह दमन का रास्ता चुना है. संगठन ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद छात्रों की गिरफ्तारियां, झूठे मुकदमे और कार्रवाई जारी है.
“JAIL KE TAALE TUTENGE, SARE SATHI CHUTENGE!”@neha_aisa is in Bihar, standing with student-youth protestors facing arrests, fएकेe FIRs & state repression.
We demand the immediate release of every arrested protestor and withdrawal of every false case.
This fight isn’t over. pic.twitter.com/ONLGwqgWlT
— AISA (@aisa_official_) July 27, 2026
संगठन ने अपनी राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा को बिहार भेजने की घोषणा करते हुए कहा कि वे गिरफ्तार छात्रों से मिलेंगी, प्रशासन से बातचीत करेंगी और सभी छात्रों की तत्काल रिहाई तथा झूठे मुकदमों की वापसी की मांग करेंगी.
आइसा ने कहा कि वह राजनीतिक, कानूनी और जनआंदोलन, तीनों स्तरों पर संघर्ष जारी रखेगा.
कॉकरोच जनता पार्टी ने भी जताई चिंता
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने भी बिहार सहित असम और पश्चिम बंगाल से छात्रों की गिरफ्तारी और हिरासत की खबरों पर चिंता जताई है.
संगठन ने कहा कि उसने राष्ट्रव्यापी आंदोलन केवल केंद्र सरकार के इस आश्वासन के बाद स्थगित किया था कि किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी. पार्टी ने केंद्र सरकार, विशेषकर जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह से अपने वादे का पालन करते हुए सभी गिरफ्तार लोगों को तत्काल रिहा करने और दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग की है.
🚨STATEMENT
We are deeply concerned by multiple reports reaching us of students and other protestors being targeted, detained, or arrested by various state agencies, particularly in Assam, West Bengal, and Bihar.
The Cockroach Janta Party had called off its nationwide protest…
— Saurav Das (@SauravDassss) July 27, 2026
सीजेपी ने कहा कि यदि सरकार अपने आश्वासन से पीछे हटती है तो यह केवल संगठन के साथ नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के साथ भी विश्वासघात होगा जिन्होंने संघर्ष के बजाय संवाद का रास्ता चुना. संगठन ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वह आगे की रणनीति पर निर्णय लेगा.
