नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को नीट पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े युवा प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कोई मामला दर्ज न करने को लेकर दिए आश्वासन के बावजूद तमाम युवाओं पर कार्रवाई को लेकर सीजेपी के दोबारा प्रदर्शन की चेतावनी के बाद बिहार सरकार ने अब राज्य भर में दर्ज 64 एफआईआर को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संबंध में मंगलवार (29 जुलाई) को राज्य के महाधिवक्ता एसडी संजय ने सभी जिलाधिकारियों और लोक अभियोजकों को पत्र लिखकर सरकार के फैसले को लागू करने के निर्देश दिए हैं. पत्र में कहा गया कि सरकार के निर्णय के अनुसार 26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे से पहले नीट-यूजी आंदोलन के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए.
अखबार के अनुसार, जिन 64 मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है, उसमें पटना में 27 मामले, सारण और सीवान में छह-छह मामले और इसके अलावा अन्य जिलों में दर्ज 15 मामले शामिल हैं. इन मामलों को अदालत के माध्यम से वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
वहीं, 25 जुलाई के विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए 694 लोगों में से 339 नाबालिगों और छात्रों को रिहा कर दिया गया, जबकि 355 लोग हिंसा में कथित तौर पर शामिल होने के कारण अभी भी हिरासत में हैं.
हालांकि, बिहार पुलिस ने साफ किया है कि सरकार केवल वे मामले वापस ले रही है, जो पुलिस अधिकारियों द्वारा दर्ज कराए गए थे. यदि किसी निजी व्यक्ति ने अलग से शिकायत या एफआईआर दर्ज कराई है तो वे मामले स्वतः वापस नहीं होंगे और उनकी कानूनी प्रक्रिया अलग रहेगी.
मालूम हो कि पटना, सारण और सीवान के अलावा, 15 अन्य जिलों में भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे. जिन मामलों को अब वापस लिया जा रहा है, उनमें किशनगंज के रहने वाले सदाकत का मामला भी शामिल है; उनका दावा है कि वह रूस में रहते हैं और विरोध प्रदर्शनों के दौरान वहीं मौजूद थे.
सदाकत पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत कई आरोप लगाए गए हैं.
हालांकि, बिहार पुलिस का कहना है कि सीवान हिंसा में शामिल होने के आरोप में 21 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज हैं. सीवान पुलिस ने इन लोगों की एक सूची जारी की है, जिनके बारे में पुलिस का दावा है कि उनका ‘आपराधिक इतिहास’ रहा है.
प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में घायल होने वालों में सीवान के एसपी पूरन कुमार झा भी शामिल थे.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमारे पास ऐसे लोगों के खिलाफ काफी वीडियो और दूसरे सबूत हैं. जिन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, उन्हें छोड़ा नहीं जा रहा है क्योंकि छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से उनका कोई लेना-देना नहीं है.’
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सभी संदिग्धों की पहचान कर ली है.
गौरतलब है कि इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया था. सीजेपी ने कहा था कि यदि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी एफआईआर वापस नहीं ली गईं और छात्रों को पुलिस द्वारा परेशान किया जाता रहा, तो वह जल्द ही देशभर में नया आंदोलन शुरू करेंगे.
सीजेपी ने सख्त शब्दों में कहा था कि उसने 25 जुलाई को केंद्र सरकार के आश्वासन पर ही अपना आंदोलन समाप्त किया था.
इस दौरान सीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट के उस अंतरिम आदेश पर भी चिंता जताई, जिसमें सरकारों को पहले से दर्ज मामलों की जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है. संगठन का कहना है कि इस आदेश का गलत इस्तेमाल कर छात्रों को लंबे समय तक कानूनी मामलों में उलझाया जा सकता है.
