मणिपुर: अज्ञात हथियारबंद लोगों ने पांच खाली घरों में आग लगाई

हिंसाग्रस्त मणिपुर में सेनापति ज़िले के कैलेनजंग गांव में सोमवार दोपहर अज्ञात हथियारबंद लोगों ने कुकी गांव के करीब पांच घरों में आग लगा दी. घटना के बाद हालात और बिगड़ने के डर से कई निवासी अस्थायी आश्रय की तलाश में तापहोउ कुकी की ओर भाग गए हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: X/@manipur_police)

नई दिल्ली: हिंसाग्रस्त मणिपुर के सेनापति ज़िले के कैलेनजंग गांव में सोमवार (10 अगस्त) को अज्ञात हथियारबंद लोगों ने कम से कम पांच खाली घरों में आग लगा दी.

हिंदुस्तान टाइम्स ने पुलिस के हवाले से बताया कि यह घटना दोपहर करीब 1.30 बजे सेनापति पुलिस थाने से लगभग 5 किलोमीटर पश्चिम में स्थित कैलेनजंग गांव में हुई. पुलिस ने कहा कि अज्ञात लोगों ने इलाके से भागने से पहले कुकी गांव के करीब पांच घरों में आग लगा दी.

अखबार के अनुसार, नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘ज़मीन के मुद्दों को लेकर 1992 में हुए नगा-कुकी संघर्ष के बाद से ही यह गांव खाली पड़ा था. उस समय लगभग आठ से दस परिवार विस्थापित हो गए थे और 2023 से पहले कुकी ग्रामीण गांव में फिर से बस गए थे.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हालांकि, मणिपुर के नोनी और कांगपोकपी ज़िलों में 13 मई को हुए दोहरे हमले- जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी- और एक कुकी समूह द्वारा कथित तौर पर छह नगाओं के अपहरण और हत्या के बाद नगा-कुकी-ज़ो संघर्ष और बढ़ गया. इसके चलते कैलेनजंग गांव के कुकी ग्रामीण फिर से विस्थापित हो गए और सेनापति ज़िले के तापहोऊ कुकी गांव में शरण ली.’

पुलिस ने कहा कि सोमवार को हुई आगज़नी की घटना में शामिल लोगों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है.

नॉर्थईस्ट नाउ के अनुसार, हालात और बिगड़ने के डर से कई निवासी अस्थायी आश्रय की तलाश में तापहोउ कुकी की ओर भाग गए. स्थानीय अधिकारी और सुरक्षाकर्मी तनावपूर्ण सीमावर्ती इलाके पर कड़ी नज़र रख रहे हैं.

बताया गया है कि घटना के बाद असम राइफल्स की एक टीम घटना की जांच के लिए मौके पर पहुंची. हालांकि, ज़्यादातर खाली घर क्षतिग्रस्त पाए गए.

इलाके के स्थानीय लोगों ने अखबार को बताया, ‘घटना के दौरान गोलीबारी की कोई आवाज़ नहीं सुनी गई.’

ज्ञात हो कि बंधक बनाकर हत्या किए गए छह नगाओं के लिए न्याय की मांग करते हुए नगाओं की शीर्ष संस्था यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) ने 17 मई से मणिपुर के सभी नगा-बहुल इलाकों में अनिश्चितकालीन अंतर-ज़िला आर्थिक नाकेबंदी लागू कर दी है. इसके जवाब में कुकी सिविल सोसाइटी संगठनों की वर्किंग कमेटी ने 26 जुलाई की आधी रात से जवाबी अंतर-ज़िला आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर दी.

इस बीच, मणिपुर सरकार और यूएनसी के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को तापहोऊ गांव में राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों पर चल रही आर्थिक नाकेबंदी को हटाने के लिए बातचीत का पहला दौर किया.

यह घटनाक्रम 8 जुलाई को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद के कांगपोकपी ज़िले के दौरे के बाद हुआ. दौरे के दौरान खेमचंद ने उपमुख्यमंत्री नेमचा किपजेन के साथ मिलकर सभी समुदायों की आवाजाही के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों को तुरंत फिर से खोलने की घोषणा की थी. बैठक में कोई आपसी सहमति वाला समाधान नहीं निकल सका. हालांकि, यूएनसी ने बताया कि बैठक में राज्य में शांति बहाल करने के लिए कई एजेंडों पर चर्चा की गई.

ज्ञात हो कि मणिपुर में मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय तनाव मई 2023 में हिंसा में बदल गया था. इसके बाद से हुई हिंसा में नागरिकों तथा राज्य और केंद्रीय सुरक्षा बलों के कर्मियों सहित 290 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं.

दोनों समुदाय अभी भी एक-दूसरे से भौतिक रूप से अलग हैं और उनके बीच ‘बफर ज़ोन’ बने हुए हैं, जहां सुरक्षा बल गश्त करते हैं.

इस साल फरवरी में राज्य में एक और जगह कुकी और नगा समुदायों के बीच संघर्ष शुरू हुआ, जिसमें दोनों समुदायों के सदस्य मारे गए, बंधक बनाए गए और उनके घर जला दिए गए.