मणिपुर: अगवा किए गए छह नगा बंधकों के शव मिलने के बाद तनाव फिर बढ़ा, उपमुख्यमंत्री को हटाने की मांग

नगा समूहों द्वारा अगवा किए गए 14 कुकी लोगों को रिहा करने के एक दिन बाद सुरक्षा बलों ने कांगपोकपी ज़िले के एक गांव के पास चार हफ़्ते पहले हथियारबंद समूहों द्वारा अगवा किए गए छह नगा लोगों के शव बरामद किए. इस बीच, यूनाइटेड नगा काउंसिल ने हत्या की निंदा करते हुए उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को हटाने की मांग की. आरोप लगाया जा रहा है कि उनके पति नगा नागरिकों की हत्या में संलिप्त थे.

11 जून 2026 की सुबह इंफाल, मणिपुर के जेएनआईएमएस मॉर्चरी में उन छह लोगों के शव लाए गए, जिनके लेइलोन वाइफेई गांव से अगवा किए गए नगा समुदाय के लोगों के होने संदेह है. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: जातीय हिंसाग्रस्त मणिपुर में सुरक्षा बलों ने बुधवार (10 जून) को कांगपोकपी ज़िले के एक गांव के पास अज्ञात जगह पर उन छह नगाओं के शव बरामद किए, जिन्हें चार हफ़्ते पहले हथियारबंद समूहों ने अगवा किया था. इस घटना के बाद राज्य में फिर से तनाव बढ़ गया है.

ये शव सेनापति ज़िले में नगा समूहों द्वारा अगवा किए गए 14 कुकी लोगों की रिहाई के एक दिन बाद बरामद किए गए.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मणिपुर में नगा समुदाय का शीर्ष संगठन, यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) ने गुरुवार (11 जून) सुबह 6 बजे से नगा-बहुल इलाकों में 24 घंटे के बंद का आह्वान किया और कहा कि जब तक केंद्र और राज्य सरकारें न्याय सुनिश्चित नहीं करतीं, तब तक वे शव नहीं लेंगे.

मृतकों की पहचान कांगपोकपी के कोंसाखुल नागा गांव के रहने वाले- केनपिबू चावांग, मनु थियुमाई, फेनरोंगविबो थियुमाई, दिलीप थियुमाई, कालीवांगबू अबोनमाई और सीएच फेन्रिलुंग के तौर पर हुई है.

मणिपुर पुलिस द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, ‘मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ और असम राइफल्स के लगभग 450 जवानों द्वारा करीब 24 घंटे तक लगातार चलाए गए तलाशी अभियान के बाद खोजी कुत्तों और फॉरेंसिक विशेषज्ञ टीमों की सहायता से आज दोपहर छह व्यक्तियों के शव बरामद किए गए.’

बयान में आगे कहा गया, ‘माना जा रहा है कि ये शव उन लोगों के हैं जिन्हें 13 मई 2026 को लेइलोन वाइफेई से बंधक बनाया गया था.’

नगालैंड पोस्ट ने सूत्रों के हवाले से बताया कि शव बेहद क्षत-विक्षत अवस्था में मिले और उनकी पहचान करना लगभग असंभव था. यह भी आशंका व्यक्त की गई कि हत्या से पहले उन्हें यातनाएं दी गई थीं. पुलिस ने कहा कि आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं और मामले की जांच जारी है.

बाद में शवों को इंफाल लाया गया और पोस्टमार्टम जांच के लिए जवाहरलाल नेहरु आयुर्विज्ञान संस्थान (जेएनआईएमएस) अस्पताल के शवगृह में रखा गया.

बता दें कि बंधक संकट की शुरुआत 13 मई को हुई थी, जब कुकी और नगा समूहों ने 13 मई को एक-दूसरे के समुदाय के लोगों को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई के तहत बंधक बनाया था. यह कदम दोनों पक्षों के बीच बढ़ते जातीय हिंसा के बीच उठाया गया था, जो उसी दिन कांगपोकपी में तीन थाडो चर्च नेताओं पर घात लगाकर किए गए हमले और उनकी हत्या के बाद और भड़क गया था.

यूएनसी ने उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को हटाने की मांग की

यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) ने राज्य के नगा-बहुल इलाकों में 24 घंटे के पूर्ण बंद की घोषणा की है. साथ ही चार सूत्रीय मांगे रखी है.

एक प्रेस विज्ञप्ति में यूएनसी ने कहा कि 9 जून को 14 कुकी कैदियों की रिहाई के बाद नगा लोगों को जो उम्मीद थी, वह छह नगा बंधकों के शव मिलने से टूट गई. इन बंधकों को 13 मई को लेइलोन वैफेई गांव के लोगों और केएनएफ (पी) के उग्रवादियों ने अगवा किया था.

काउंसिल ने इस घटना को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन और इंसानी गरिमा का अपमान बताया. इसे निर्दोष नगा नागरिकों के खिलाफ ‘धर्मविरोधी और शैतानी कृत्य’ करार देते हुए इसकी निंदा की.

यूएनसी ने शोक-संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस घटना ने नगा समुदाय को गहरा आघात पहुंचाया है और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की सरकार की क्षमता पर लोगों का विश्वास डगमगा दिया है. यूएनसी ने कहा कि यह घटना नगाओं की सामूहिक पहचान और सुरक्षा के लिए सीधी चुनौती है.

संगठन ने नागरिकों से बंद को शांतिपूर्ण ढंग से सफल बनाने की अपील की और कहा कि जब तक मणिपुर सरकार और भारत सरकार उसकी मांगों पर कार्रवाई नहीं करतीं, तब तक छह बंधकों के शव स्वीकार नहीं किए जाएंगे.

अपने चार सूत्रीय मांग-पत्र में यूएनसी ने सभी कुकी उग्रवादी समूहों के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (एसओओ) समझौते को रद्द करने की मांग की. साथ ही 13 मई को दो पादरियों सहित 18 नगा नागरिकों के अपहरण तथा उसके बाद छह नगाओं की निर्मम हत्या और उसी दिन जौजांगटेक में विल्सन थांगा चिरू की हत्या में शामिल केएनएफ (पी) के सदस्यों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की.

इसके अलावा, यूएनसी ने लेइलोन वैफेई गांव के मुखिया लालबोई वैफेई तथा 18 नगा नागरिकों के अपहरण में शामिल सभी व्यक्तियों की तत्काल गिरफ्तारी और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की.

परिषद ने यह भी मांग की कि कुकी नेशनल फ्रंट–प्रेसिडेंट ग्रुप (केएनएफ-पी) को आतंकवादी संगठन घोषित किया जाए.

इसके अलावा, यूएनसी ने मणिपुर की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को तत्काल पद से हटाने की मांग की. परिषद का आरोप है कि उनके पति सेमटिनथांग उर्फ थांगबोई किपगेन, जो केएनएफ-पी के अध्यक्ष हैं, नगा नागरिकों की हत्या में संलिप्त थे.

यूएनसी के अनुसार, नेमचा को पद से हटाने से राज्य सरकार के प्रति जनता का विश्वास और भरोसा बहाल करने में मदद मिलेगी. परिषद ने आगे दावा किया कि उनका पद पर बने रहना राज्य और राष्ट्र दोनों की आंतरिक सुरक्षा संबंधी चिंताओं के साथ समझौता करने के समान होगा.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, कुकी समुदाय की शीर्ष संगठन ‘कुकी इनपी मणिपुर’ ने भी इन हत्याओं की निंदा की और अधिकारियों से जांच करने और कानून को अपना काम करने देने की अपील की.