नई दिल्ली: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया में 34 सवालों वाला एक गूगल फॉर्म भरना भी शामिल है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल फॉर्म में उम्मीदवार से यह भी पूछा गया है कि वह शाकाहारी है या नहीं.
रिपोर्ट के अनुसार, गूगल फॉर्म में कुछ सवाल इस तरह थे- ‘क्या आप शिखा (चोटी) रखते हैं?’, ‘क्या आप जनेऊ (यज्ञोपवीत) पहनते हैं?’, ‘क्या आप पूरी तरह शाकाहारी हैं या मांसाहारी भोजन करते हैं?’, ‘क्या आप शराब का सेवन करते हैं या पूर्णतः शराब से परहेज करते हैं?’ और ‘क्या आप कट्टर हिंदू हैं?’
जैसा कि इंडियन एक्सप्रेस ने पहले रिपोर्ट किया था, राम मंदिर ट्रस्ट के अगले सीईओ के चयन की जिम्मेदारी वाली तीन सदस्यीय समिति ने 5,000 आवेदनों में से 18 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया है.
सीईओ के पद के लिए तय प्रमुख जिम्मेदारियों में ट्रस्ट से जुड़े कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय मामलों का प्रबंधन करना, यह सुनिश्चित करना कि ट्रस्ट अपने ट्रस्ट डीड में तय प्रावधानों का पालन करे और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है.
द वायर ने पहले रिपोर्ट किया था कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जून 2026 में किए गए एक ट्वीट के बाद पूर्व कारसेवक संतोष दुबे समेत कई अन्य शिकायतकर्ताओं ने मंदिर ट्रस्ट के धन के गबन के आरोप लगाए थे. उत्तर प्रदेश सरकार ने 17 जून को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था.
अपनी अंतरिम रिपोर्ट में एसआईटी ने निष्कर्ष निकाला कि, ‘प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि चढ़ावे की गिनती के लिए जिम्मेदार कुछ कर्मचारी नकदी की चोरी और गबन में शामिल थे.’ इसके बाद धन के कथित गबन के मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया.
इस बीच, लखनऊ के पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर, जो अब राजनीतिक दल आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पत्र लिखकर चल रही चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने की मांग की है.
11 अगस्त 2026 को लिखे अपने पत्र में ठाकुर, जिन्होंने सीईओ पद के लिए आवेदन भी किया था, ने कहा, ‘मुझे व्यक्तिगत तौर पर इस बात से कोई शिकायत नहीं है कि मेरा चयन होता है या नहीं. हालांकि, जिस बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं, उसे देखते हुए यह स्वाभाविक है कि कम से कम शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के नाम तो सार्वजनिक किए जाने चाहिए.’
पत्र में यह भी मांग की गई है कि शॉर्टलिस्ट में शामिल किसी खास उम्मीदवार के चयन के संबंध में अपनाई गई प्रक्रिया और मानदंडों को भी सार्वजनिक किया जाए.
