मणिपुर: कांगपोकपी ज़िले में हथियारबंद लोगों ने की गोलीबारी, दस घरों व एक चर्च को आग लगाई गई

कांगपोकपी ज़िले के चम्फाई इलाके में स्थित तोपका नगा गांव में 11 अगस्त की रात हथियारबंद लोगो ने घरों में आग लगा दी. नगा संगठन ने इस हमले की कड़ी निंदा की और आरोप लगाया कि हमलावरों ने जानबूझकर आम नागरिकों के घरों और पूजा स्थल को निशाना बनाया.

मणिपुर हिंसा के दौरान जलाया गया एक घर. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: हिंसाग्रस्त मणिपुर के कांगपोकपी ज़िले के चम्फाई इलाके में स्थित तोपका नगा गांव में मंगलवार (11 अगस्त) की रात हिंसा भड़क उठी, जिसमें लगभग दस घरों और एक चर्च को आग लगा दी गई.

लियांगमाई नगा काउंसिल (एलएनसी) के अनुसार, यह घटना रात करीब 9:30 बजे हुई, जब हथियारबंद लोग गांव में घुसे और घरों में आग लगाने से पहले गोलीबारी की.

यह ताज़ा घटनाक्रम ज़िले में महीनों से चल रही हिंसक अशांति के बीच हुआ है, जहां सुरक्षा की नाज़ुक स्थिति और गहरे होते जातीय मतभेदों ने रोज़मर्रा की ज़िंदगी को अनिश्चित और जोखिम भरा बना दिया है.

एलएनसी ने अपने बयान में इस हमले की कड़ी निंदा की और आरोप लगाया कि हमलावरों ने जानबूझकर आम नागरिकों के घरों और पूजा स्थल को निशाना बनाया, जो ‘हिंसा का एक गंभीर और निंदनीय कृत्य’ था.

काउंसिल ने कहा, ‘काउंसिल उन खबरों से बेहद हैरान और चिंतित है कि प्रभावित इलाके से कुछ ही मीटर की दूरी पर सुरक्षाकर्मी तैनात थे, क्योंकि यह इलाका बेहद संवेदनशील ‘रेड-ज़ोन’ है.’

काउंसिल ने हमले के समय गांव के आसपास तैनात सुरक्षा बलों की तैयारी और कामकाज पर भी सवाल उठाए. उन्होंने सुरक्षा बलों की संभावित लापरवाही और अपने कर्तव्यों का पालन न कर पाने को लेकर चिंता जताई.

एलएनसी ने दोषियों के ख़िलाफ़ त्वरित और कड़ी कार्रवाई की मांग की और आदिवासी समुदायों पर आगे और हमलों के ख़िलाफ़ चेतावनी दी. साथ ही, उन्होंने प्रभावित इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने, पुनर्वास और मुआवज़े की सहायता तथा पीड़ितों के परिवारों के लिए पर्याप्त राहत की भी मांग की.

फिलहाल, आगजनी की इस घटना को लेकर पुलिस, ज़िला प्रशासन या सरकारी अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.

बता दें कि बीते 10 अगस्त को सेनापति ज़िले के कैलेनजंग गांव में अज्ञात हथियारबंद लोगों ने कुकी गांव के कम से कम पांच खाली घरों में आग लगा दी थी.

ज्ञात हो कि मणिपुर में मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय तनाव मई 2023 में हिंसा में बदल गया था. इसके बाद से हुई हिंसा में नागरिकों तथा राज्य और केंद्रीय सुरक्षा बलों के कर्मियों सहित 290 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं.

दोनों समुदाय अभी भी एक-दूसरे से भौतिक रूप से अलग हैं और उनके बीच ‘बफर ज़ोन’ बने हुए हैं, जहां सुरक्षा बल गश्त करते हैं.

इस साल फरवरी में राज्य में एक और जगह कुकी और नगा समुदायों के बीच संघर्ष शुरू हुआ, जिसमें दोनों समुदायों के सदस्य मारे गए, बंधक बनाए गए और उनके घर जला दिए गए.