नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (15 अगस्त) को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली के लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया. यह लगातार 13वीं बार था, जब उन्होंने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से देश को संबोधित किया. इस बार उनका भाषण करीब 75 मिनट लंबा था, जो पिछले चार वर्षों में उनका सबसे छोटा स्वतंत्रता दिवस भाषण और अब तक का उनका चौथा सबसे छोटा संबोधन रहा.
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ का ज़िक्र करते हुए कहा, ‘यह एक ऐतिहासिक दिन है. आज़ादी के बाद यह वह समय है जब लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ की गूंज सुनाई दी है.’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, ‘आज हम सभी 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं. आज हर दिल की धड़कन ‘वंदे मातरम्’ के नाद से गूंज रही है. आज हर घर में तिरंगा लहरा रहा है और हर मन में तिरंगा बसा हुआ है. राष्ट्र उत्साह और उमंग के साथ नए संकल्पों को लेकर आगे बढ़ रहा है.’
अपने संबोधन में उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू समेत कई स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनिर्माताओं का ज़िक्र किया.
पीएम मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित जवाहरलाल नेहरू का नाम लेते हुए कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. भीमराव आंबेडकर, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, भगवान बिरसा मुंडा और ज्योतिबा फुले के सपनों से प्रेरणा लेकर देश को आगे बढ़ना चाहिए.
इस दौरान पीएम मोदी ने अपनी सरकार के 12 साल के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं. उन्होंने युवाओं, महिलाओं, किसानों, गरीबों और मध्य वर्ग को केंद्र में रखते हुए 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के संकल्प को दोहराया.
प्रधानमंत्री ने भारत के मैन्युफैक्चरिंग और टेक्सटाइल उद्योग से लेकर रक्षा, रेलवे, कनेक्टिविटी, फार्मा और स्टार्टअप क्षेत्र तक की उपलब्धियां गिनाते हुए कोरोना महामारी और हाल के युद्धों से पैदा हुए ऊर्जा संकट का भी उल्लेख किया और कहा कि उनकी सरकार ने इन चुनौतियों के बावजूद देश की ज़रूरतों को पूरा किया.
उन्होंने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की. साथ ही विकसित भारत के निर्माण के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का विज़न सामने रखा.
नक्सलवाद समाप्त, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ चुनौती
पीएम मोदी ने कहा कि नक्सलवाद और माओवाद ने लाखों युवाओं के भविष्य को तबाह किया और माता-पिता के सपनों को चूर-चूर किया. उन्होंने कहा कि चार दशकों तक देश के बड़े हिस्से और बड़ी आबादी को बंदूक की नोक पर दबाकर रखा गया और इस दौरान 3,500 से अधिक पुलिस और सुरक्षा बलों के जवान शहीद हुए.
उन्होंने कहा कि 2014 में उनकी सरकार ने देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प लिया था और आज नक्सली तथा माओवादी हिंसा अंतिम चरण में है. जिन इलाक़ों में कभी नक्सलियों की गोलियां चलती थीं, वहां अब विकास, विश्वास और प्रयास का तिरंगा लहरा रहा है.
उन्होंने कहा कि जंगलों में हथियारबंद नक्सलियों के ख़िलाफ़ सफलता मिली है, लेकिन ‘दिमाग़ी नक्सल’ अब भी मौके की तलाश में हैं और हिंसा तथा अराजकता का रास्ता खोलने की कोशिश कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को पहचानना और उन्हें अलग-थलग करना ज़रूरी है.
Places once affected by Naxal violence are witnessing peace, development and new hope. pic.twitter.com/QTRhWI1dpx
— PMO India (@PMOIndia) August 15, 2026
पश्चिम एशिया संकट और किसान
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश को कई संकटों का सामना करना पड़ा. कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया की व्यवस्था को प्रभावित किया और इसके बाद रूस-यूक्रेन युद्ध तथा पश्चिम एशिया के संघर्ष ने नई चुनौतियां खड़ी कर दीं.
उन्होंने कहा कि कोरोना के दौरान कुछ लोगों ने वैक्सीन की कमी और बड़ी संख्या में लोगों की मौत की आशंका जताकर डर का माहौल बनाने की कोशिश की. इसी तरह पश्चिम एशिया संकट के दौरान पेट्रोल, गैस और खाद की कमी को लेकर भी आशंकाएं जताई गईं.
पीएम मोदी ने कहा कि इन सभी संकटों के बावजूद भारत ने नागरिकों की ज़रूरतों को पूरा किया और आज देश में गैस, पेट्रोल और यूरिया उपलब्ध है.
उन्होंने कहा कि वैश्विक बाज़ार में यूरिया की कीमत करीब 3,000 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गई, लेकिन भारत अपने किसानों को इसे करीब 300 रुपये में उपलब्ध करा रहा है. इसी तरह डीएपी की वैश्विक कीमत बढ़ने के बावजूद किसानों को यह कम कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा है.
India has set a big goal… To become a developed nation by 2047. pic.twitter.com/FOQIgsK3lF
— PMO India (@PMOIndia) August 15, 2026
‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ और ‘शक्ति की सप्तधारा’
पीएम मोदी ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य मज़बूत नींव पर खड़ा है और अब देश रुक नहीं सकता. उन्होंने कहा कि अगले 25 वर्ष बेहद महत्वपूर्ण हैं और देश को अपना वर्क कल्चर तथा काम की गति बदलनी होगी.
उन्होंने कहा कि जो काम पिछले पांच दशकों में नहीं हो सके, उन्हें अगले पांच वर्षों में पूरा करना होगा. इसके लिए लगातार सुधारों की ज़रूरत है. उन्होंने इसे ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की दिशा में आगे बढ़ना बताया.
पीएम मोदी ने विकसित भारत के निर्माण के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि देश की युवा शक्ति की क्षमता को भारत के विकास से जोड़ा जाएगा.
उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर ज़ोर देते हुए कहा कि भारत को छोटे-छोटे पुर्जों से लेकर बड़ी मशीनरी तक का उत्पादन बढ़ाना होगा. डिज़ाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक पूरी वैल्यू चेन में भारत को दुनिया का भरोसेमंद केंद्र बनना होगा.
These Saptadharas will drive India forward and take the nation to new heights. pic.twitter.com/hHukVE7FrW
— PMO India (@PMOIndia) August 15, 2026
उन्होंने कहा कि लागत, गुणवत्ता और उत्पादन के स्तर पर भारत को वैश्विक मानदंडों पर खरा उतरना होगा. ‘ज़ीरो डिफेक्ट’ को भारतीय मैन्युफैक्चरिंग की पहचान बनाने की बात कहते हुए उन्होंने उद्योग जगत से गुणवत्ता से समझौता न करने की अपील की.
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की बड़ी भूमिका होगी और इसका सबसे बड़ा लाभ भी युवाओं को मिलेगा. पीएम मोदी ने बताया कि देश में ढाई लाख से अधिक रजिस्टर्ड स्टार्टअप हैं और युवाओं के सपनों को पंख देने के लिए एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
पीएम मोदी ने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का इनोवेशन फंड आवंटित किया गया है. उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, खेलो इंडिया और नई शिक्षा नीति जैसी योजनाओं से युवाओं को सीधे लाभ मिला है.
उन्होंने घोषणा की कि अगले एक वर्ष में एक करोड़ से अधिक युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग दी जाएगी.
पीएम मोदी ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए मुफ़्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की भी घोषणा की.
उन्होंने कहा कि 2036 के ओलंपिक में भारत उन खेलों की श्रेणियों में भी हिस्सा लेने का लक्ष्य रखेगा, जिनमें देश अब तक नहीं उतरा है. इसके लिए 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों की प्रतिभा तलाशने के लिए ‘टैलेंट हंट’ अभियान चलाया जाएगा.
“गरीब और मिडिल क्लास परिवारों की चिंता करते हुए, हम युवाओं के लिए विभिन्न परीक्षाओं की फ्री ऑनलाइन कोचिंग देने का नेटवर्क खड़ा करने वाले हैं।”#IndiaIndependenceDay pic.twitter.com/yuVjuJ8cmT
— BJP (@BJP4India) August 15, 2026
महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण की अपील
पीएम मोदी ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का ज़िक्र करते हुए सभी राजनीतिक दलों से महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने के लिए सहयोग की अपील की.
उन्होंने लाल किले से तिरंगे के नीचे सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे महिलाओं के सम्मान और राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में आगे आएं.
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री के भाषण पर विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस की प्रतिक्रिया सामने आई है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ वाली टिप्पणी को लेकर उन पर निशाना साधा है.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री पर अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों को लेकर सवाल उठाया.
जयराम रमेश ने कहा, ‘प्रधानमंत्री पहले अपने विरोधियों को ‘अर्बन नक्सल’ कहते थे और अब उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कह रहे हैं.’
उन्होंने इसे प्रधानमंत्री की ‘हताशा’ का संकेत बताया.
First He called his opponents ‘urban naxals.’
Now He calls them ‘dimaagi naxals.’
It is a sure sign of His desperation. It is a separate matter that He ends up doing whatever these so-called ‘urban naxals’ or now ‘dimaagi naxals’ are demanding or advocating.
It is not for…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) August 15, 2026
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री जिन लोगों को ‘अर्बन नक्सल’ या अब ‘दिमागी नक्सल’ कहते हैं, उनकी ओर से उठाए गए मुद्दों या मांगों पर सरकार बाद में कदम उठाती है.
जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री के लिए ‘मास्टर एब्यूज़र इन एंटायर पॉलिटिकल साइंस’ जैसी टिप्पणी भी की.
गौरतलब है कि नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर आधिकारिक समारोह में इस बार 80 साल की परंपरा में पहली बार बदलाव देखने को मिला. नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के लिखे राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ गाया गया.
मालूम हो कि हाल ही में नरेंद्र मोदी सरकार ने कानून में संशोधन कर ‘वंदे मातरम’ को ‘जन गण मन’ के बराबर दर्जा दिया है. इससे पहले राष्ट्रगान को सरकारी और राजकीय समारोहों में बजाया जाता था, जबकि राष्ट्रीय गीत मुख्य रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित था.
स्वतंत्रता दिवस समारोह की ज़िम्मेदारी संभालने वाले रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में घोषणा की थी कि ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष को यादगार बनाने के लिए पहली बार इसे विशेष सम्मान दिया जाएगा.
