नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 11 और 12 की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने के लिए एक नई टीम गठित की है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, इस टीम में कम से कम चार ऐसे सदस्य हैं, जिनका संबंध भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या उससे जुड़े संगठनों से रहा है.
पैनल में आरएसएस के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के पूर्व पदाधिकारी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठनों के सदस्य और भाजपा के लिए राजनीतिक सलाहकार के रूप में काम कर चुके व्यक्ति शामिल हैं.
नई टीम को इस वर्ष नवंबर तक कक्षा 11 की नई पाठ्यपुस्तक तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि कक्षा 12 की पाठ्यपुस्तक तैयार करने की अंतिम समय-सीमा जुलाई 2027 तय की गई है.
एनसीईआरटी की अधिसूचना के अनुसार, पैनल को पाठ्यक्रम में ‘सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव’ और ‘भारतीय ज्ञान प्रणली’ को शामिल करने का काम सौंपा गया है.
पैनल में कौन-कौन शामिल हैं?
इस टीम का नेतृत्व शिक्षाविद और राजनीतिक विश्लेषक संदीप शास्त्री करेंगे, जो कर्नाटक स्थित डीम्ड यूनिवर्सिटी निट्टे के उपाध्यक्ष हैं.
पैनल के सदस्यों में यदुनाथ देशपांडे और वंदना मिश्रा शामिल हैं, जिनका संबंध एबीवीपी से रहा है. इसके अलावा प्रशांत दिवेकर और रवि रामचंद्र शुक्ला भी पैनल में हैं, जिनका संबंध आरएसएस से जुड़े संगठनों से है.
देशपांडे फिलहाल शिक्षा मंत्रालय में वरिष्ठ सलाहकार हैं. वह महाराष्ट्र में एबीवीपी के संयुक्त राज्य संगठन सचिव और एबीवीपी के मुंबई-कोंकण संगठन में संगठन सचिव के रूप में काम कर चुके हैं. वह भाजपा के लिए राजनीतिक सलाहकार के तौर पर भी काम कर चुके हैं.
वंदना मिश्रा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज में प्रोफेसर हैं और एबीवीपी की पूर्व राष्ट्रीय सचिव रह चुकी हैं.
दिवेकर पुणे स्थित ज्ञान प्रबोधिनी से जुड़े हैं. यह आरएसएस से संबद्ध संस्था है, जिसकी स्थापना 1962 में आरएसएस के विनायक विश्वनाथ ने की थी. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन के नेशनल मिशन फॉर मेंटरिंग पोर्टल पर अपनी प्रोफाइल में दिवेकर ने अपने दृष्टिकोण को ‘भारतीय शैक्षिक दर्शन पर आधारित’ बताया है और कहा है कि उन्होंने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क) में योगदान दिया है.
शुक्ला जेएनयू के सेंटर फॉर कंपेरेटिव पॉलिटिक्स एंड पॉलिटिकल थ्योरी में एसोसिएट प्रोफेसर हैं. वह आरएसएस से जुड़े इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेटिक लीडरशिप-रंभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी से संबद्ध हैं. शुक्ला इस संगठन द्वारा प्रकाशित इंडियन जर्नल ऑफ डेमोक्रेटिक गवर्नेंस के संपादकीय बोर्ड के सदस्य भी हैं.
पैनल के अन्य सदस्यों में जेएनयू से प्रकाश कंडपाल, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से निधि गुप्ता, चाणक्य यूनिवर्सिटी से चेतन सिंघई, दिल्ली यूनिवर्सिटी से सुकांशिका वत्सा, इग्नू से सतीश कुमार, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ से देवांशु श्रीवास्तव, जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल से प्रणव गुप्ता, पांडिचेरी यूनिवर्सिटी से नंदा किशोर और उत्कल यूनिवर्सिटी से स्वप्ना प्रभु शामिल हैं.
इसके अलावा एनसीईआरटी की सविता सागर, बेंगलुरु स्थित गवर्नमेंट फर्स्ट ग्रेड कॉलेज से एम.एन. सुरेश कुमार, नवी मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन स्कूल से डायना इसाबेल और एसएचवीएनएम गवर्नमेंट पीयू कॉलेज फॉर गर्ल्स से एन. भारणी भी टीम का हिस्सा हैं.
एनसीईआरटी के वांथांगपुई खोबुंग और सुभाष सिंह क्रमशः पैनल के सदस्य समन्वयक और सह-समन्वयक होंगे.
रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीईआरटी की अधिसूचना में कहा गया है कि यह टीम सामाजिक विज्ञान, भाषाओं, भारतीय ज्ञान प्रणालियों, पर्यावरण शिक्षा, नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति और शिक्षण-अधिगम सामग्री से संबंधित पाठ्यक्रम क्षेत्र समूह से मार्गदर्शन लेगी.
एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि प्रत्येक पाठ्यपुस्तक की समीक्षा की जाएगी, ताकि ‘सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव, भारतीय ज्ञान प्रणालियों, समावेशन, शैक्षिक तकनीक, मूल्यांकन’ आदि जैसे विभिन्न विषयों को पाठ्यपुस्तकों में समुचित रूप से शामिल किया जा सके.
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब आरएसएस के प्रभावशाली नेता प्रह्लाद जोशी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पद संभाला है. उनके पूर्ववर्ती धर्मेंद्र प्रधान को पेपर लीक से जुड़े विवादों की एक श्रृंखला और कम से कम 21 नीट अभ्यर्थियों की आत्महत्या के बाद बड़े पैमाने पर चले युवा आंदोलन के बीच पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था.
