नई दिल्ली: मेघालय के शिलॉन्ग में विभिन्न मुद्दों, जिनमें सरकारी भर्ती में सुधार भी शामिल है, को लेकर खासी स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) द्वारा बुधवार (19 अगस्त) को आयोजित काले झंडे दिखाने वाली बाइक रैली में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई. पुलिस के अनुसार, शहर के कई हिस्सों में वाहनों को क्षतिग्रस्त किया गया, लोगों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और सरकारी संपत्तियों में तोड़फोड़ की गई.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मेघालय में केएसयू के तीन वरिष्ठ नेताओं, जिनमें संगठन के अध्यक्ष भी शामिल हैं, के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. ये मामले हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाने, आम नागरिकों के साथ मारपीट और अन्य अपराधों के संबंध में दर्ज किए गए हैं.
पुलिस के अनुसार, रैली के दौरान कम से कम 31 वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया और सड़कों पर चल रहे लोगों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई. अधिकारियों ने बताया कि तोड़फोड़ की घटनाएं कथित तौर पर रात तक जारी रहीं और इस दौरान कम से कम दो सरकारी वाहनों में आग लगा दी गई.
ऐसा दावा किया जा रहा है कि शहर में स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमाओं में भी जुलूस के दौरान कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई. यह कॉलोनी उन लोगों के लिए बसाई गई थी, जो 1960 के दशक में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से भागकर आए थे.
केएसयू के सदस्यों ने अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हुए रैली को शिलॉन्ग के कई हिस्सों से निकाला. छात्र संगठन लंबे समय से मेघालय रेजिडेंट्स सेफ्टी एंड सिक्योरिटी एक्ट को लागू करने, मेघालय लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) और जिला चयन समितियों के माध्यम से होने वाली भर्ती प्रक्रिया में सुधार और प्रवासी मजदूरों के नियमन को और सख्त करने की मांग कर रहा है.
केएसयू ने नॉर्थ ईस्टर्न इंदिरा गांधी रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज में नर्सों की भर्ती को लेकर भी चिंता जताई है और भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की मांग की है.
इसके अलावा, संगठन ने ईस्ट जयंतिया हिल्स में लुम सिरमन में श्री सीमेंट लिमिटेड की प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना के लिए आयोजित जनसुनवाई के तरीके का भी विरोध किया है. केएसयू ने मांग की है कि इस जनसुनवाई की पूरी कार्यवाही को शून्य और अमान्य घोषित किया जाए.
केएसयू ने इससे पहले राज्य सरकार को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया था और चेतावनी दी थी कि अगर उसकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह आंदोलन करेगा. इसके बाद संगठन ने शिलॉन्ग में काले झंडे दिखाने वाली बाइक रैली निकालने की घोषणा की थी.
प्रदर्शन के दौरान केएसयू के सदस्य मेघालय सचिवालय के मुख्य द्वार तक भी पहुंचे और वहां झंडे लगा दिए. बाद में पुलिसकर्मियों ने इन झंडों को हटा दिया.
रैली के शहर से गुजरने के दौरान हिंसा बढ़ गई और वाहनों पर हमला किया गया तथा उन्हें आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त किया गया. इसके बाद पुलिस और सुरक्षा बलों को कई स्थानों पर तैनात किया गया, ताकि आगे की घटनाओं को रोका जा सके.
हाईकोर्ट ने हिंसा पर कार्रवाई करने का आदेश दिया
इस बीच, मेघालय हाईकोर्ट ने गुरुवार (20 अगस्त) को शिलॉन्ग में केएसयू की बाइक रैली के दौरान हुई हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने का आदेश दिया.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया. अदालत ने कहा कि 24 अगस्त तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल की जानी चाहिए.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने ईस्ट खासी हिल्स के पुलिस अधीक्षक विवेक सियेम के हवाले से बताया कि कम से कम 31 वाहन क्षतिग्रस्त हुए, 16 लोग घायल हुए और दो वाहनों में आग लगा दी गई.
जस्टिस एचएस थांगख्यू और जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगदोह की पीठ ने कहा कि सरकारी वाहनों, पुलिस थानों के वाहनों और सार्वजनिक परिवहन के वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया, जबकि स्कूली बच्चों समेत आम नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डाला गया.
अदालत ने राष्ट्रीय नायकों की मूर्तियों के कथित अपमान का भी संज्ञान लिया. अदालत ने राज्य सरकार की ओर से दी गई इस जानकारी को रिकॉर्ड पर लिया कि कुछ कार्रवाई की जा चुकी है और घटना में शामिल संगठन के कुछ पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है.
केएसयू के तीन वरिष्ठ नेताओं – अध्यक्ष रेमंड खारजाना, उपाध्यक्ष पिनकमेनलांग सनमीट और महासचिव रूबेन नजीयार – को गिरफ्तार कर 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
हालांकि, पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी के लिए और अधिक व्यापक और तत्काल कदम उठाए जाएं. इस मामले पर 24 अगस्त को फिर सुनवाई होगी, जब अधिकारियों को अदालत के समक्ष की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करनी होगी.
विरोध रैली के मद्देनज़र ईस्ट खासी हिल्स में धारा 163 लागू
मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स जिला प्रशासन ने खासी स्टूडेंट्स यूनियन की प्रस्तावित विरोध रैली से पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू कर दी है.
नॉर्थईस्ट टुडे के मुताबिक, केएसयू ने शुक्रवार को ईस्ट खासी हिल्स में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की थी. प्रस्तावित रैली और शिलॉन्ग में हाल में हुई हिंसा की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है.
प्रस्तावित प्रदर्शन स्थलों पर सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है, जबकि प्रशासन ने पूरे शिलॉन्ग में सतर्कता बढ़ा दी है.
धारा 163 लागू करने का उद्देश्य बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने को रोकना और प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था और शांति बनाए रखना है.
केएसयू की हालिया रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद शिलॉन्ग में तनाव अभी भी बना हुआ है. अधिकारियों ने निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाए हैं.
