वीबी-जी राम जी लागू होने के दो महीने बाद भी 57 लाख सक्रिय श्रमिकों का ई-केवाईसी बाक़ी: रिपोर्ट

9 अगस्त 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में वीबी-जी राम जी योजना के तहत केवल 7.67 करोड़ व्यक्ति-दिवस का रोज़गार सृजित हुआ. यह पिछले साल इसी महीने मनरेगा के तहत सृजित 15.33 करोड़ व्यक्ति-दिवस की तुलना में 49.94% कम है.

मनरेगा के श्रमिक हरियाणा के सिरसा जिले के असीर गांव में एक तालाब से गाद निकालते हुए. (फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स/मुल्क सिंह)

नई दिल्ली: नई ग्रामीण रोजगार योजना विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) शुरू होने के दो महीने बाद भी करीब 57 लाख सक्रिय श्रमिक ई-केवाईसी सत्यापन का इंतजार कर रहे हैं. द हिंदू की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है.

इस योजना को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की जगह लाया गया है.

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि मौजूदा ई-केवाईसी सत्यापित जॉब कार्ड तब तक वैध रहेंगे, जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते. इसका उद्देश्य रोजगार तक निर्बाध पहुंच और मजदूरी का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है.

हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक नई योजना शुरू होने के दो महीने बाद, पंजीकृत श्रमिकों में से केवल 71% का ही ई-केवाईसी सत्यापन हुआ था. वहीं, सक्रिय श्रमिकों, यानी जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में कम से कम एक बार काम किया है, उनके ई-केवाईसी सत्यापन की दर 94.88% है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘इसके बावजूद 57 लाख श्रमिकों का सत्यापन अभी बाकी है.’

9 अगस्त 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में वीबी-जीराम जी योजना के तहत केवल 7.67 करोड़ व्यक्ति-दिवस (person-days) का रोजगार सृजित हुआ. यह पिछले साल इसी महीने मनरेगा के तहत सृजित 15.33 करोड़ व्यक्ति-दिवस की तुलना में 49.94% कम है.

व्यक्ति-दिवस काम की मात्रा को मापने की एक इकाई है. इसका अर्थ है कि एक व्यक्ति ने एक कार्यदिवस में जितना काम किया हो.

सरकार ने कुछ मामलों में ई-केवाईसी सत्यापन नहीं होने के बावजूद जॉब कार्डधारकों को काम देने की छूट दी है. हालांकि, इसके साथ ही वीबी-जी राम जी के तहत काम पाने के लिए ई-केवाईसी सत्यापन को अनिवार्य शर्त भी बना दिया गया है.

नेशनल कैंपेन फॉर पीपल्स राइट टू इंफॉर्मेशन (एनसीपीआरआई) के चक्रधर बुद्धा द्वारा दायर एक आरटीआई आवेदन से पता चला कि 30 जनवरी को हुई एक बैठक में मंत्रालय ने राज्यों से नई वीबी-जीराम जी व्यवस्था में बदलाव के तहत बाकी सभी सक्रिय श्रमिकों का ई-केवाईसी सत्यापन एक सप्ताह के भीतर पूरा करने को कहा था.

राज्यों को 12 फरवरी को भी महीने के अंत तक यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया था. लेकिन सात महीने बाद भी आंकड़े बताते हैं कि यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, मनरेगा के सबसे ज्यादा श्रमिकों वाले चार राज्यों में तमिलनाडु में दोनों श्रेणियों में ई-केवाईसी की दर सबसे अधिक है. वहां सक्रिय श्रमिकों में 99.32% और सभी पंजीकृत श्रमिकों में 84.89% का ई-केवाईसी हो चुका है. इसके बाद राजस्थान में यह दर क्रमशः 95.66% और 69.45%, उत्तर प्रदेश में 94.21% और 58.89%, तथा आंध्र प्रदेश में 90.4% और 82.32% है.

बिहार में सक्रिय श्रमिकों में ई-केवाईसी की दर 89.19% है, जबकि सभी पंजीकृत श्रमिकों में यह दर 58.05% है. बड़े राज्यों में दूसरी श्रेणी में बिहार की ई-केवाईसी दर सबसे कम दरों में शामिल है.