70 साल पुराने मशहूर आरके स्टूडियो को बेचेगा कपूर परिवार

शोमैन राजकपूर के स्टूडियो को बेचने के बारे में उनके बेटे ऋषि कपूर का कहना है कि कपूर परिवार इससे काफी जुड़ाव रखता है लेकिन आने वाली पीढ़ी का कुछ पता नहीं, इसलिए छाती पर पत्थर रखकर यह फैसला लेना पड़ रहा है.

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शोमैन राजकपूर के स्टूडियो को बेचने के बारे में उनके बेटे ऋषि कपूर का कहना है कि कपूर परिवार इससे काफी जुड़ाव रखता है लेकिन आने वाली पीढ़ी का कुछ पता नहीं, इसलिए  छाती पर पत्थर रखकर यह फैसला लेना पड़ रहा है.

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आरके स्टूडियो (फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स)

मुंबई: मुंबई के चेंबूर स्थित कपूर परिवार ने मशहूर आरके स्टूडियो बेचने का फैसला कर लिया है. 70 साल पहले बने इस ऐतिहासिक स्टूडियो में पिछले साल भीषण आग लग गई थी और इसका एक बड़ा हिस्सा जलकर तबाह हो गया था.

परिवार के अनुसार इसका पुननिर्माण आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं था.

शोमैन राजकपूर ने 1948 में उपनगरीय क्षेत्र चेंबूर में इसकी स्थापना की थी. राजकपूर की कई फिल्मों का निर्माण इस स्टूडियो में किया था.

पिछले साल 16 सितंबर को स्टूडियो में रियलिटी कार्यक्रम ‘सुपर डांसर’ के सेट पर आग लग गई थी, जिससे इसका ग्राउंड फ्लोर तबाह हो गया था. उस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ था.

राजकपूर के बेटे और अभिनेता ऋषि कपूर ने स्टूडियो को आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ फिर से तैयार कराने की इच्छा व्यक्त की थी, लेकिन उनके बड़े भाई रणधीर कपूर ने कहा कि यह व्यावहारिक नहीं था.

इस फैसले पर परिवार की तरफ से ऋषि कपूर ने कहा, ‘कपूर परिवार इस फैसले को लेकर काफी इमोशनल है. हम लोग तो इससे काफी अटैच्ड हैं लेकिन आने वाली पीढ़ी का कुछ पता नहीं. छाती पर पत्थर रखकर यह फैसला लेना पड़ रहा है.’

मुंबई मिरर को दिए एक साक्षात्कार में ऋषि कपूर ने कहा, ‘पहले हमने अत्याधुनिक तकनीक के साथ स्टूडियो का नवीनीकरण करने के विचार किया था. हालांकि, ये संभव नहीं पाया. आग के बाद पुनर्निर्माण में लगने वाला खर्च प्रैक्टिकल नहीं है. इसमें लगने वाला पैसा वापस नहीं आएगा. वैसे भी जब आग नहीं लगी थी, तब भी ये स्टूडियो हमारे लिए सफ़ेद हाथी बन चुका था क्योंकि ज़्यादा बुकिंग नहीं होती थी. कुछ फिल्मों, कार्यक्रम या विज्ञापन की शूटिंग होती थी, वो भी बहुत सुविधा मांगते थे, जो आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं था और नुकसान ज़्यादा हो रहा था.’

रणधीर कपूर ने भी कहा, ‘हां, हमने आरके स्टूडियो को बेचने का फैसला किया है. यह बिक्री के लिए उपलब्ध है. स्टूडियो में आग लगने के बाद उसे फिर से बनाना आर्थिक रूप से प्रैक्टिकल नहीं था.’

आरके बैनर के तले आग, बरसात, आवारा, श्री 420, जिस देश में गंगा बहती है, मेरा नाम जोकर, बॉबी, सत्यम शिव सुंदरम, राम तेरी गंगा मैली जैसी मशहूर फिल्में बनी थीं. इस बैनर के तले बनी आखिरी फिल्म ‘आ अब लौट चलें’ (1999) थी, जिसे ऋषि कपूर ने निर्देशित किया था.

1988 में राजकपूर के निधन के बाद उनके बड़े पुत्र रणधीर कपूर ने स्टूडियो का जिम्मा संभाला. बाद में राजकपूर के सबसे छोटे पुत्र राजीव कपूर ने ‘प्रेम ग्रंथ’ का निर्देशन किया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)