नई दिल्ली: तमिलनाडु में ऑल इंडिया रेडियो-आकाशवाणी (एआईआर) के त्रिची एफएम 102.1 ने अप्रैल महीने से अपने रात्रिकालीन प्रसारण में तमिल के बजाय हिंदी सामग्री का प्रसारण शुरू किया है. इसकी खासी आलोचना हो रही है. सांसद दुरई वाइको और अन्य श्रोताओं ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जो इसे भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार द्वारा तमिल भाषी क्षेत्र में हिंदी थोपने की मंशा का एक और उदाहरण मानते हैं.
उल्लेखनीय है कि नई शिक्षा नीति (एनईपी) के त्रि-भाषा फॉर्मूले पर हुए विवाद, जिसमें केंद्र से मिलने वाले फंड को तमिल सरकारी स्कूलों में हिंदी पढ़ाने से जोड़ा गया है, जिसे हिंदी को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया अभियान माना जा रहा है, की चिंगारी अभी ठंडी भी नहीं हुई है.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 9 अप्रैल से एआईआर त्रिची दिन में तमिल में प्रसारण कर रहा है, लेकिन रात 11 बजे से सुबह 5.50 बजे तक हिंदी में प्रसारण करने का फैसला लिया गया है. अखबार ने इस फैसले का श्रेय केंद्रीय सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती को दिया है.
जुलाई 2024 से चेन्नई के एफएम रेनबो 101.4 के साथ भी यही पैटर्न देखने को मिला था. लेकिन फिर इस कदम की ‘राजनीतिक नेताओं ने आलोचना की, जिन्होंने केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय से पूर्णकालिक तमिल प्रोग्रामिंग को तुरंत बहाल करने का आग्रह किया.’
दुरई वाइको ने शनिवार को कहा, ‘यह तमिलनाडु में हिंदी थोपने के लिए एक छोटा लेकिन जानबूझकर किया गया प्रयास है, और भाषाई अधिकारों पर हमला है. हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे.’
सूबे के एक निवासी एन. पेरियासामी ने इस बाबत 20 से अधिक शिकायतें भेजी हैं. उन्होंने अखबार से कहा, ‘एफएम गोल्ड के हिंदी शो रात में प्रसारित किए जा रहे हैं जबकि हमारी अपनी तमिल सामग्री रोक दी गई है. मैंने एआईआर और प्रसार भारती को 20 से अधिक शिकायतें भेजी हैं, लेकिन उधर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.’
त्रिची एफएम 102.1 तमिलनाडु में सबसे अधिक वाणिज्यिक राजस्व अर्जित करने वाले एआईआर स्टेशनों में से एक है. बताया जाता है कि यह दस जिलों तक पहुंचता है. हिंदी थोपे जाने की चिंताओं के साथ-साथ, लोगों में यह डर भी है कि ‘त्रिची के प्रसारण को चेन्नई के एफएम रेनबो, जो दिल्ली से आने वाले कंटेट को रिले करता है, से जोड़ने से क्षेत्रीय प्रोग्रामिंग और कमजोर होगी.’
मीडिया द्वारा संपर्क किए जाने पर आकाशवाणी त्रिची के एक अधिकारी ने सार्वजनिक प्रतिक्रिया को स्वीकार किया. उन्होंने यह भी कहा कि इस बात की प्रबल संभावना है कि रात्रिकालीन प्रसारण में तमिल कार्यक्रम को जल्द ही फिर से शुरू किया जा सकता है.
