अमेरिका का ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला, ट्रंप की चेतावनी- तेहरान ‘शांति’ या ‘विनाश’ चुन सकता है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को घोषणा की है कि अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों फ़ोर्दो, नतांज़ और इस्फ़हान पर हमले किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप ईरान के ये परमाणु प्रतिष्ठान पूरी तरह से नष्ट ​​हो गए हैं.

डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर अमेरिकी हमले के बारे में संबोधन. (फोटो: व्हाइट हाउस वीडियो से स्क्रीनशॉट)

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (22 जून) को घोषणा की है कि अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों फ़ोर्दो, नतांज़ और इस्फ़हान पर हमले किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप ईरान के ये परमाणु प्रतिष्ठान पूरी तरह से नष्ट’ ​​हो गए हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने ईरान को चेतावनी भी जारी की है, जिसमें कहा है कि अगर ईरान ‘शांति नहीं कायम’ करता तो तेहरान पर भविष्य में और हमले किए जाएंगे.

तेहरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने अमेरिकी हमलों को स्वीकार किया है, लेकिन यह नहीं बताया कि इन हमलों से तीनों परमाणु फैसिलिटी को कितना नुकसान हुआ है.

ब्लूमबर्ग ने ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी के हवाले से बताया है कि तेहरान ने अमेरिका की इस कार्रवाई को अवैध बताते हुए कहा है कि ‘इससे इस राष्ट्रीय उद्योग का विकास रुकेगा नहीं.’

बीबीसी के अनुसार, ईरान के सरकारी टीवी चैनल के डिप्टी पॉलिटिकल डायरेक्टर हसन अबेदिनी ने दावा किया है कि ईरान ने परमाणु ठिकानों को ‘पहले ही ख़ाली करा लिया था.’

उन्होंने ये भी कहा कि अगर ट्रंप जो कुछ कह रहे हैं वो सच भी हो तो ईरान को ‘किसी बड़े धमाके से कोई नुक़सान नहीं हुआ क्योंकि पदार्थों को पहले निकाल लिया गया था.’

वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने अमेरिका पर यूएन चार्टर का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.

उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया, ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य अमेरिका ने ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला करके संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और एनपीटी का गंभीर उल्लंघन किया है.’

अब्बास अराग़ची ने आगे कहा, ‘आज सुबह की घटनाएं क्रूर हैं और इनके दीर्घकालिक परिणाम होंगे. संयुक्त राष्ट्र के हर सदस्य को इस बेहद ख़तरनाक, अराजक और आपराधिक व्यवहार से चिंतित होना चाहिए.’

उल्लेखनीय है कि अमेरिका के हमले ट्रंप के उस बयान के कुछ दिनों बाद हुए हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह ‘अगले दो सप्ताह के भीतर’ ईरान-इजरायल संघर्ष में अमेरिका को शामिल करने के बारे में फैसला करेंगे.

उन्होंने ‘निकट भविष्य में बातचीत होने या न होने की पर्याप्त संभावना’ का हवाला दिया था.

मालूम हो कि यह संघर्ष 13 जून को शुरू हुआ था, जब इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए और उसके शीर्ष सैन्य नेताओं को मार डाला.

इजरायल ने पहले दिन ही नातान्ज़ साइट पर हमला किया था, जिसका आधार कथित तौर पर ये बताया गया कि तेहरान भयानक परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

रविवार को एक सार्वजनिक संबोधन में ट्रंप ने इस बात को फिर दोहराया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम एक खतरा पैदा करता है, जिसे रोका जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘हमारा उद्देश्य ईरान की परमाणु संवर्धन क्षमता को नष्ट करना और दुनिया के नंबर एक आतंकवाद प्रायोजक देश द्वारा उत्पन्न परमाणु खतरे को रोकना था.’

अमेरिकी हमलों को ‘शानदार सैन्य सफलता’ बताते हुए ट्रंप ने कहा कि तीनों जगहों को ‘पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है’.

उन्होंने आगे कहा, ‘या तो शांति होगी या ईरान के लिए पिछले आठ दिनों में हमने जो देखा है, उससे कहीं ज़्यादा तबाही होगी. याद रखें, अभी कई लक्ष्य बचे हैं. आज रात का हमला अब तक का सबसे मुश्किल और शायद सबसे घातक था.’

उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन अगर शांति जल्द स्थापित नहीं होती, तो हम सटीकता, गति और कौशल के साथ उन अन्य लक्ष्यों पर हमला करेंगे. उनमें से ज़्यादातर को कुछ ही मिनटों में नष्ट किया जा सकता है.’

अमेरिका के हमलों के बाद इसरायल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने एक बयान में अमेरिका को धन्यवाद देते हुए कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप और मैं अक्सर कहते हैं, ‘ताक़त के ज़रिए शांति.’ पहले ताक़त आती है और फिर शांति आती है.’

नेतन्याहू आगे कहा, ‘आज रात, राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिका ने बहुत ताक़त से कार्रवाई की है. राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया के सबसे खतरनाक शासन को दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों से वंचित करने के लिए काम किया. ये अमेरिकी हमला ‘इतिहास बदल देगा’.’

ज्ञात हो कि फोर्दो की ‘परमाणु साइट’ जिसका ट्रंप ने उल्लेख किया है और जिस पर इजरायल ने अपने आठ दिन से अधिक लंबे ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ में हमला करने से परहेज किया है, एक पहाड़ के नीचे स्थित है और इसे तेहरान ने 2000 के दशक की शुरुआत में गुप्त रूप से स्थापित किया था.

ऐसा माना जाता है कि 2012 से अब तक इस भूमिगत स्थल पर लगभग 3,000 संवर्धन सेंट्रीफ्यूज लगाए जा चुके हैं.

हालांकि, फ़ोर्दो, नतांज़ से छोटा परिसर है, लेकिन यह कथित तौर पर शुद्ध ग्रेड के यूरेनियम का उत्पादन करने में सक्षम है, जो इसे सैन्य दृष्टि से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बनाता है.

यह हमला ट्रंप के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव भी दर्शाता है, जो यह वादा करके पद पर आए थे कि वे अमेरिका को विदेशी युद्धों से दूर रखेंगे और अक्सर सैन्य हस्तक्षेप की आलोचना करते थे.