नई दिल्ली: झारखंड के गोड्डा जिले में गुरुवार को एक 13 वर्षीय किशोरी एक इमारत की छत से गिर गई और बाद में कथित तौर पर समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना ठाकुरगंगटी थाना क्षेत्र के मदन चौकी गांव में हुई. पीड़ित के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि तीन घंटे से अधिक समय तक उनके द्वारा 108 सेवा पर लगातार कॉल करने के बावजूद कोई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हुई.
वायरल हुए एक कथित वीडियो में माता-पिता ने कहा कि सरकारी एंबुलेंस न मिलने पर उन्हें एक निजी एंबुलेंस किराए पर लेनी पड़ी.
खबर के अनुसार, 13 वर्षीय लड़की अपने घर की छत पर बारिश में नहा रही थी. इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह बगल के मकान की छत पर जा गिरी. गिरने से उसका पेट छत के पिलर से टकरा गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई.
परिजनों ने उसे इलाज के लिए गोड्डा सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताकर रांची स्थित रिम्स रेफर कर दिया. लेकिन अस्पताल प्रशासन घायल बच्ची को रांची ले जाने के लिए समय पर एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं कर सका.
रविवार को गोड्डा के सिविल सर्जन डॉ. आनंद कुमार झा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘मुझे इस मामले की जानकारी कल ही मिली है. इससे पहले हमारे पास कोई पूर्व सूचना या आधिकारिक रिपोर्ट नहीं आई थी.’ उन्होंने कहा कि अस्पताल प्राधिकारियों और एंबुलेंस सेवा से पूरी रिपोर्ट कल तक मिलने की उम्मीद है.
सिविल सर्जन ने यह भी कहा कि उन्होंने जांच शुरू कर दी है और उपाधीक्षक तथा एंबुलेंस एजेंसी से स्पष्टीकरण मांगा है.
उन्होंने कहा, ‘हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि 108 सेवा पर कोई कॉल की गई थी या नहीं और अगर की गई थी, तो उस पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया. अगर सिस्टम में कोई खराबी थी, तो कार्रवाई की जाएगी.’
झा ने कहा कि बच्ची का नाम अस्पताल के रिकॉर्ड में दर्ज है, जिससे पता चलता है कि परिवार ने बच्ची को रांची ले जाने की कोशिश करने से पहले गोड्डा के सदर अस्पताल में इलाज कराया होगा. उन्होंने कहा कि अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या मानक रेफरल प्रोटोकॉल का पालन किया गया था, खासकर जिला अस्पताल से रांची के लिए औपचारिक रेफरल के संबंध में.
इस बीच, ग्रामीण क्षेत्रों से इसी तरह की कई घटनाएं सामने आने के बाद विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने मुद्दा उठाया और राज्य सरकार की आलोचना की.
मरांडी ने इस मुद्दे को उठाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा, ‘हेमंत सरकार की घोर लापरवाही का खामियाजा गोड्डा की एक मासूम बेटी को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा. छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुई बच्ची के परिजन घंटों तक एंबुलेंस का इंतजार करते रहे, लेकिन सरकारी एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची.’
उन्होंने कहा, ‘स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों की निष्क्रियता और भ्रष्टाचार अब सीधे तौर पर नागरिकों की जान को खतरे में डाल रहा है. चाहे वह मुफ्त एंबुलेंस सेवा हो या आयुष्मान भारत योजना… हेमंत सरकार ने स्वास्थ्य सेवा की हर पहल को भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का अड्डा बना दिया है.’
