यूपी: छह पत्रकारों पर ग़लत सूचना फैलाने के आरोप में केस, कांग्रेस बोली- सच बोलने वालों को सज़ा

वाराणसी पुलिस ने महामना की मूर्ति की सफाई संबंधी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अशांति और गलत सूचना फैलाने के आरोप में छह पत्रकारों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है. यूपी कांग्रेस ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि सरकार आईना दिखाया जाना बर्दाश्त नहीं कर सकती, इसलिए सच बोलने वालों को दंडित कर रही है.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली: वाराणसी पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अशांति और गलत सूचना फैलाने के आरोप में छह पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, लंका थाने में दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पत्रकारों ने एक मूर्ति की सफाई का वीडियो शेयर किया और उसका इस्तेमाल सांप्रदायिक भावना भड़काने के लिए किया. इस कार्रवाई की राजनीतिक प्रतिक्रिया हुई है, जहां कांग्रेस ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए इसकी निंदा की है.

लंका थाना प्रभारी (एसएचओ) शिवाकांत मिश्रा के मुताबिक, 25 जून की रात लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के दो कर्मचारी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) गेट के पास स्थित भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा की सफाई कर रहे थे.

मिश्रा ने कहा कि सफाई प्रक्रिया का एक वीडियो रिकॉर्ड किया गया और कुछ पत्रकारों द्वारा ऑनलाइन शेयर किया गया, जिन्होंने कथित तौर पर नफरत फैलाने और कानून-व्यवस्था को बाधित करने के लिए जाति-आधारित टिप्पणी का इस्तेमाल किया.

संकट मोचन पुलिस चौकी प्रभारी की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई. आरोपियों में अरशद (‘खबर बनारस’ के एडमिन), अभिषेक झा, अभिषेक त्रिपाठी, सोनू सिंह, शैलेश और एक एक्स (पूर्व में ट्विटर) यूजर नितिन राय शामिल हैं.

उन पर धारा 356(3) (अपमानजनक सामग्री का प्रकाशन), 196(1) (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

पत्रकारों ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा कि उनका काम प्रशासन के संज्ञान में आने वाली अच्छी या बुरी घटनाओं को उजागर करना है. एक आरोपी ने कहा, ‘अगर शहर में कुछ गलत होता है, तो उसकी रिपोर्ट करना हमारी जिम्मेदारी है.’

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष ने एफआईआर की निंदा की

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एफआईआर की निंदा की.

राय ने कहा, ‘मालवीय जी की प्रतिमा पर चढ़ने वाले किसी व्यक्ति के वायरल वीडियो पर सवाल उठाने वाले पत्रकारों के खिलाफ मामला दर्ज करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. भाजपा सरकार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगी, लेकिन सवाल उठाने वालों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जाएगा.’

इस कदम को कायरतापूर्ण बताते हुए राय ने कहा, ‘यह सरकार आईना दिखाया जाना बर्दाश्त नहीं कर सकती. इसीलिए यह सच बोलने वालों को दंडित कर रही है. लेकिन कांग्रेस पत्रकारों का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी.’

उन्होंने मांग की कि असली दोषियों को दंडित किया जाए और पत्रकारों के खिलाफ झूठे मामले तुरंत वापस लिए जाएं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस मीडिया के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है.

भाजपा एमएलसी और पूर्व पत्रकार धर्मेंद्र सिंह ने इस मामले में थोड़ा सतर्क रुख अपनाया. उन्होंने कहा, ‘पत्रकारिता एक संवेदनशील पेशा है. पत्रकारों को अपनी गरिमा बनाए रखनी चाहिए और रिपोर्टिंग में जल्दबाजी से बचना चाहिए. लेकिन अगर पत्रकारों के अधिकार दांव पर लगे हैं, तो मैं उनके साथ खड़ा हूं.’

रिपोर्ट्स के अनुसार, पत्रकारों ने यूपी पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी देते हुए कहा है कि यह मामला न सिर्फ लोकतंत्र के मूल्यों पर चोट है, बल्कि एक खतरनाक संकेत भी है कि अब सच दिखाने और पूछने वालों को ही अपराधी बना दिया जाएगा.

पत्रकार संगठनों ने मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा के अपमान पर कोई ठोस कार्रवाई न करने और पत्रकारों को फर्जी मामलों में फंसाने के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी सजा और विभागीय जांच की मांग की है.