नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव, 2025 में हिस्सा लेने वाले छात्रों को 1 लाख रुपये का बॉन्ड जमा करने की ज़रूरत नहीं है. यह शर्त विश्वविद्यालय ने चुनाव लड़ने की पूर्व-शर्त के तौर पर लगाई थी.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने कहा, ‘यह स्पष्ट किया जाता है कि याचिकाकर्ताओं या कोई भी अन्य छात्र जो डूसू चुनाव लड़ना चाहते हैं, उन्हें चुनाव लड़ने के समय कोई पैसा जमा करने की आवश्यकता नहीं है.’
यह बयान तब आया जब दिल्ली विश्वविद्यालय के वकील ने अदालत को निर्देशों के आधार पर बताया कि 1 लाख रुपये के बॉन्ड के संबंध में सिर्फ एक हलफ़नामा या घोषणा-पत्र दाखिल करना ज़रूरी है, लेकिन वास्तव में पैसे जमा कराने की कोई अनिवार्यता नहीं है. यह स्थिति विश्वविद्यालय द्वारा जारी एक अधिसूचना में भी बताई गई है.
इस स्पष्टीकरण को देखते हुए अदालत ने उन दो छात्रों की याचिका का निपटारा कर दिया, जिन्होंने 8 अगस्त को जारी अधिसूचना की धारा ‘V’ को चुनौती दी थी. इस अधिसूचना में चुनाव लड़ने की पूर्व-शर्त के रूप में 1 लाख रुपये का सुरक्षा बॉन्ड मांगा गया था. याचिकाकर्ता इन चुनावों में उम्मीदवार बनने के इच्छुक हैं.
विवादित अधिसूचना के अनुसार, चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करते समय खुद या अपने समर्थकों द्वारा किसी भी तरह के पोस्टरबाज़ी या दिशानिर्देशों के उल्लंघन की स्थिति में 1 लाख रुपये का बॉन्ड भरना आवश्यक बताया गया था.
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह पूर्व-शर्त असंवैधानिक है और लिंगदोह समिति की सिफारिशों के खिलाफ है. उन्होंने दलील दी कि वे दिल्ली विश्वविद्यालय के नियमित छात्र हैं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्लूएस) से आते हैं.
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि अधिसूचना की धारा ‘V’ ने एक अभूतपूर्व आर्थिक बाधा खड़ी कर रही है.
दिल्ली विश्वविद्यालय के बयान के बाद, याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि विश्वविद्यालय का रुख उनकी चिंता को दूर करता है, क्योंकि अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि चुनाव लड़ने के लिए वास्तव में पैसे जमा करने की आवश्यकता नहीं है.
इसके बाद अदालत ने कहा, ‘उपरोक्त स्पष्टीकरण के साथ, वर्तमान रिट याचिका और लंबित आवेदन का निपटारा किया जाता है.’
