नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (8 सितंबर) को चुनाव आयोग (ईसीआई) को निर्देश दिया कि वह बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान पहचान के लिए पहले से मान्य 11 दस्तावेज़ों के साथ आधार को 12वें दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार करे।
इसका मतलब है कि आधार कार्ड को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए एक स्वतंत्र दस्तावेज़ की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, यह आदेश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ द्वारा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और स्वराज पार्टी के सदस्य एवं कार्यकर्ता योगेंद्र यादव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया. इस याचिका में चुनाव आयोग द्वारा बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को अनुच्छेद 32 के तहत मनमाना और असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी गई थी.
1 अगस्त को चुनाव आयोग ने एक मसौदा सूची प्रकाशित की थी, जिससे पता चला था कि 65 लाख मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया है, लेकिन मतदाताओं के नाम जारी नहीं किए गए थे. शीर्ष अदालत में याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि चुनाव आयोग इस सूची को सार्वजनिक करे, जिसका चुनाव आयोग ने यह कहते हुए विरोध किया था.
हालांकि, 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से कहा कि वह सूची को अपनी वेबसाइट और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए, साथ ही सूची से बाहर किए गए मतदाताओं के कारणों की जानकारी भी दे. शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से यह भी कहा था कि वह मसौदा सूची के संबंध में दावे और आपत्तियां करने वाले लोगों से आधार स्वीकार करे.
आधार कार्ड, जो भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की अपनी वेबसाइट के अनुसार, ‘भारत के निवासियों के लिए पहचान और पते के प्रमाण’ के रूप में कार्य करता है, को बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए चुनाव आयोग द्वारा अनुमत 11 दस्तावेज़ों की सूची से बाहर कर दिया गया था, जिससे मतदाताओं को दस्तावेजों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं बड़े पैमाने पर उन्हें सूची से बाहर न कर दिया जाए.
बिहार में आधार कवरेज 94% है. द वायर ने पहले भी बताया है कि आधार को स्वीकार करने में चुनाव आयोग के विरोध ने पहचान पत्र पर चुनाव आयोग की उलझन और उसके ढुलमुल रवैये को उजागर किया है.
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने आज अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि आधार नागरिकता का नहीं, बल्कि पहचान का प्रमाण है और चुनाव आयोग को आधार कार्ड को स्वीकार करने के संबंध में अपने अधिकारियों को निर्देश जारी करने का निर्देश दिया. इसमें आगे कहा गया है कि चुनाव आयोग के अधिकारी मतदाताओं द्वारा प्रस्तुत आधार कार्ड की प्रामाणिकता और वास्तविकता को सत्यापित करने के हकदार होंगे.
एडीआर ने बिहार एसआईआर के लिए मतदाताओं के दावे और आपत्तियां दर्ज करने की समय सीमा बढ़ाने की भी मांग की, जिसे चुनाव आयोग ने अदालत में स्वीकार करने की बात स्पष्ट की.
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