मुहम्मद पोस्टर विवाद: बरेली में इंटरनेट पर रोक जारी, 4 अक्टूबर तक बंद रहेगा

बीते हफ्ते बरेली में हुए बवाल के बाद दशहरा के अवसर पर सुरक्षा के मद्देनज़र राज्य गृह विभाग ने 4 अक्तूबर दोपहर 3 बजे तक मोबाइल इंटरनेट, ब्रॉडबैंड और एसएमएस सेवाएं निलंबित करने का आदेश जारी किया है. पुलिस ने 26 सितंबर को हुए हिंसक प्रदर्शनों के सिलसिले में अब तक कुल 82 लोगों को गिरफ़्तार किया है.

उत्तर प्रदेश के बरेली में 1 अक्तूबर को दशहरा पर्व की पूर्व संध्या पर फ्लैग मार्च करती पुलिस. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: बरेली ज़िले में शुक्रवार (3 अक्तूबर) को भी इंटरनेट सेवाएं निलंबित रहीं. पीटीआई के अनुसार, 2 अक्तूबर को दशहरा के अवसर पर सुरक्षा के मद्देनज़र राज्य गृह विभाग ने 2 अक्तूबर दोपहर 3 बजे से 4 अक्तूबर दोपहर 3 बजे तक मोबाइल इंटरनेट, ब्रॉडबैंड और एसएमएस सेवाएं निलंबित करने का आदेश जारी किया था. 

ज़िले में हालात 26 सितंबर से तनावपूर्ण बने हुए हैं. उस दिन ‘आई लव मुहम्मद’ पोस्टर को लेकर चल रहे विवाद के विरोध में जुमे की नमाज़ के बाद लोग प्रदर्शन करने वाले थे. प्रशासन की अनुमति न मिलने के कारण आख़िरी समय में उसे रद्द करना पड़ा, जिसके बाद प्रदर्शन करने आए लोगों और पुलिस के बीच झड़प हो गई. इस दौरान पथराव हुआ और बाद में कई लोगों को पुलिस ने गिरफ़्तार किया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक उत्तर प्रदेश पुलिस ने कुल 82 लोगों को गिरफ़्तार किया है. इनमें इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) के अध्यक्ष मौलाना तौक़ीर खान भी शामिल हैं.

पुलिस का कहना है कि 26 सितंबर को हुए हिंसक प्रदर्शन में इन सभी की भूमिका थी. गिरफ़्तार किए गए दो लोगों के पैरों में पुलिस ने कथित मुठभेड़ के दौरान गोली भी मारी.

विपक्ष का सरकार पर हमला

विपक्षी दलों ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा, ‘बीजेपी सरकार सिर्फ़ मुद्दे को तूल देकर प्रोपेगैंडा करना चाहती है. आप संभल और अब बरेली की घटनाओं में यह साफ़ देख सकते हैं. योगी सरकार राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोप से ध्यान भटकाना चाहती है.’

ऑल इंडिया तंजीम उलेमा-ए-इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने कहा, ‘नमाज़ अदा करने के बाद लोग सीधे अपने घर लौट जाएं या अगर व्यापारी हैं तो अपने काम पर चले जाएं. किसी भी हाल में भीड़ का हिस्सा न बनें, चाहे कोई भी बुलाए.’

विवाद की शुरुआत 

आई लव मुहम्मद पोस्टर विवाद शुरुआत कानपुर से हुई थी, जहां 4 सितंबर को बरावफात जुलूस के दौरान सड़क पर ‘आई लव मुहम्मद’ बोर्ड लगाने के आरोप में नौ लोगों और 15 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ कानपुर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी.

उसके बाद से देश के विभिन्न हिस्सों में लोग अपने सोशल मीडिया पर ‘आई लव मुहम्मद’ का पोस्ट डालने लगे. और पुलिस ने इन पोस्टरों/पोस्ट के लिए कार्रवाई करना शुरू कर दिया.