नई दिल्ली: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा को लेकर इस साल में हुआ विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है.
इस बार विवाद का विषय हाईकोर्ट के वकील अनिल मिश्रा द्वारा जारी एक विवादास्पद वीडियो है, जिसने क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है.
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, अनिल मिश्रा के इस वीडियो में बाबासाहेब आंबेडकर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है, जिसके विरोध में दलित समूहों ने 15 अक्टूबर को ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन करने की बात कही है, जबकि कथित उच्च जाति के संगठनों ने भी उसी दिन इकट्ठा होने की योजना की घोषणा की है.
इस मामले के संज्ञान में आने के बाद ग्वालियर पुलिस सोशल मीडिया पर नज़र रख रही है, किसी भी तरह की परिस्थिति से निपटने के लिए मॉक ड्रिल भी आयोजित की गई है.
इस संबंध में पुलिस ने सोशल मीडिया से 260 भड़काऊ पोस्ट भी हटाए हैं, 50 से ज़्यादा लोगों को नोटिस जारी किया गया है और अनिल मिश्रा के ख़िलाफ़ ग्वालियर और महाराष्ट्र में दो एफ़आईआर दर्ज की गई है.
पूरा मामला क्या है?
दरअसल, ये मामला ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा लगाने की मांग से जुड़ा हुआ है, जिसकी शुरुआत कुछ महीने पहले मई में हुई थी.
आज़ाद समाज पार्टी, भीम आर्मी, ओबीसी महासभा सहित कई संगठन और वकीलों का एक धड़ा परिसर में आंबेडकर की प्रतिमा स्थापना की मांग कर रहा था. वहीं, कुछ वकील इसके विरोध में थे, जिनका कहना था कि न्यायालय परिसर में किसी व्यक्ति विशेष की मूर्ति लगाना न्याय की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा कर सकता है.
इसे लेकर कई बार वकीलों के बीच तीखी नोकझोंक और झड़पें भी हो चुकी हैं. 17 मई 2025 को तो स्थिति हिंसक हो गई थी, जब हाईकोर्ट के बाहर भीम आर्मी के पूर्व सदस्य रूपेश केन के साथ कुछ वकीलों ने मारपीट कर दी थी.
इसके बाद प्रशासन ने मूर्ति स्थापना पर अस्थायी रोक लगा दी थी. डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा को शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर मूर्तिकार प्रभात राय की वर्कशॉप में रखवा दिया गया था, जहां उसकी सुरक्षा के लिए दो पुलिसकर्मी तैनात हैं.
ताज़ा विवाद में वकील अनिल मिश्रा ने कथित तौर पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी वीडियो में डॉ. आंबेडकर को ‘अंग्रेजों का एजेंट, झूठा और गुलाम’ कहकर संबोधित किया तथा आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.
इसके बाद दलित संगठनों, आज़ाद समाज पार्टी और भीम आर्मी ने मिश्रा की गिरफ्तारी की मांग करते हुए 15 अक्टूबर को ग्वालियर बंद और विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है. मिश्रा के खिलाफ ग्वालियर और महाराष्ट्र में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं.
धारा 163 लागू, प्रशासन की सख्त चेतावनी
इस बीच ज़िला प्रशासन ने धारा 163 लागू कर दी है, जिसके तहत बिना अनुमति के विरोध प्रदर्शन, जुलूस और सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
ज़िला कलेक्टर और एसपी ने व्यापारियों और स्थानीय नेताओं के साथ बैठक कर शांति बनाए रखने की अपील की. कलेक्टर रुचिका चौहान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने पुष्टि की है कि 15 अक्टूबर को किसी भी कार्यक्रम की योजना नहीं है.
पुलिस ने चेतावनी दी है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती बरतेंगे. अधिकारियों ने नागरिकों से त्योहार मनाने और शांतिपूर्ण तरीके से व्यापार करने का आग्रह किया है.
बताया गया है कि इस मामले को लेकर साइबर टीम भी सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट की निगरानी कर रही है.
ग्वालियर प्रशासन ने कहा है कि कानून व्यवस्था में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी. शहर और ग्रामीण इलाकों में चौकसी बढ़ा दी गई है.
संवेदनशील इलाकों में पुलिस की गश्त जारी है. लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई है.
