वॉट्सऐप पर ‘अनकहे शब्द’ भी धार्मिक बैर फैलाने वाले माने जा सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई में कहा कि किसी वॉट्सऐप संदेश में भले ही धर्म का ज़िक्र सीधे तौर पर न किया गया हो, लेकिन उसमें निहित संकेत या अनकहे शब्द अगर दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने वाले हों, तो उसे भी अपराध माना जा सकता है.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Alexander Shatov /Unsplash)

नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि वॉट्सऐप पर भेजे गए किसी संदेश के ‘अनकहे शब्द’ या ‘निहित अर्थ’ को भी दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने के रूप में देखा जा सकता है, चाहे उस संदेश में धर्म का ज़िक्र सीधे तौर पर किया गया हो या नहीं. 

जस्टिस जेजे मुनीर और प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने पिछले महीने बिजनौर जिले के निवासी आफ़ाक़ अहमद की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने धार्मिक वैमनस्य फैलाने के आरोप में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी. 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार (19 अक्टूबर) को बिजनौर पुलिस ने आफ़ाक़ के खिलाफ बीएनएस की धाराओं के तहत आपराधिक धमकी और शांति भंग के आरोपों में दूसरी एफआईआर दर्ज की. उनके भाई और चाचा के खिलाफ भी अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं.

‘निहित संदेश से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं’

हाईकोर्ट ने 26 सितंबर को दिए अपने फैसले में कहा था कि आफ़ाक़ ने ग़ैर कानूनन धर्मांतरण मामले में अपने भाई की गिरफ्तारी के बाद जो वॉट्सऐप संदेश भेजा था, उसमें बार-बार न्यायपालिका पर भरोसा जताने के बावजूद ‘धार्मिक भावनाएं भड़काने’ और ‘समुदायों के बीच दुर्भावना पैदा करने’ की संभावना थी.

कोर्ट ने कहा कि यह मैसेज ‘प्रत्यक्ष रूप से धर्म की बात न करता हो’, लेकिन ‘अंदर ही अंदर यह संदेश देता है कि उनके भाई को एक खास धार्मिक समुदाय से होने की वजह से झूठे केस में फंसाया गया है.’

कोर्ट ने माना कि ये ‘अनकहे शब्द’ ‘पहली नज़र में दूसरों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं’ और पुलिस जांच जारी रखने की अनुमति दी.

मामला कैसे शुरू हुआ

19 जुलाई को आफ़ाक़ अहमद के भाई आरिफ़ अहमद को एक आरएसएस कार्यकर्ता संदीप कौशिक की शिकायत पर गिरफ्तार किया गया था. एफआईआर में उन पर अश्लीलता, शांति भंग करने की कोशिश और आपराधिक धमकी के आरोप लगाए गए थे.

कौशिक ने यह भी आरोप लगाया कि आरिफ़ ‘राष्ट्रविरोधी ताक़तों से जुड़ा है’ और ‘लव जिहाद’ में शामिल है.. यानी हिंदू महिलाओं को फुसलाकर झूठे नामों से उनका पासपोर्ट बनवाने और उन्हें विदेश ले जाकर बेचने की साजिश करता है.’

बाद में एफआईआर में बलात्कार, ज़हर देने, धोखाधड़ी, जालसाज़ी और भ्रामक तरीके से धर्म परिवर्तन कराने के आरोप भी जोड़े गए. आरिफ़ फिलहाल जेल में हैं. 

‘भाई को झूठे केस में फंसाया गया’

आफ़ाक़ ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि साल 2020 में उनके भाई का एक हिंदू महिला के साथ संबंध शुरू हुआ था. आफ़ाक़ ने कहा, ‘मैंने उसे समझाया कि उसे अपनी बिरादरी में शादी करनी चाहिए. उसने मेरी बात मानी और साल 2023 में शादी कर ली जिससे एक बेटी हुई. मुझे लगा मामला ख़त्म हो गया है. 

लेकिन 19 जुलाई को उन्हें एक बैठक में शामिल होने कहा गया जहां ‘सभी समुदायों के लोग’ मौजूद थे. उस बैठक में उन्हें बताया गया कि उनके भाई ने एक हिंदू महिला को धर्मांतरण के लिए उकसाया और उसे दुबई ले जाने की योजना बनाई.

30 जुलाई को आफ़ाक़ के खिलाफ वॉट्सऐप संदेश के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई. अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, एक सब-इंस्पेक्टर ने यह एफआईआर उस संदेश के स्क्रीनशॉट के आधार पर दर्ज की जो कथित रूप से दो लोगों को भेजा गया था.

वॉट्सऐप मैसेज में आफ़ाक़ ने लिखा था कि उनके भाई को ‘पुलिस के ऊपर राजनीतिक दबाव बना कर झूठे केस में फंसाया गया’ है. और यह भी लिखा कि ‘मेरे परिवार की रोज़ी-रोटी का बहिष्कार करने की अपील की गई है.’ साथ ही उन्होंने यह डर भी जताया कि कहीं उनकी हत्या न कर दी जाए. 

हालांकि उन्होंने संदेश में बार-बार कहा कि ‘अदालत सच उजागर करेगी’, लेकिन हाईकोर्ट ने माना कि इस संदेश में ‘यह भी संकेत दिया गया था कि उनके भाई को धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया है, जिससे धार्मिक भावनाएं भड़क सकती हैं.’

आफ़ाक़ के वकील ने दलील दी कि यह संदेश केवल उनकी पीड़ा का इज़हार था, लेकिन अदालत ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ‘अनकहे शब्दों’ में निहित सांप्रदायिक संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं.

इसके बाद 4 अगस्त को संदीप कौशिक ने आफ़ाक़ के चाचा सादिक़ के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज कराई, जिन्होंने एक स्थानीय चैनल से कहा था कि आरिफ़ को झूठे केस में फंसाया गया है. सादिक़ के ख़िलाफ़ यह एफआईआर बीएनएस की धारा 196(2) के तहत धर्म के आधार पर वैमनस्य फैलाने के आरोप में दर्ज की गई.

अख़बार ने जब कौशिक से पहली शिकायत दर्ज करवाने की वजह पूछी तब उनका कहना था कि प्रभावित महिला का परिवार ‘डरा हुआ’ था, और ‘समाज के एक जिम्मेदार सदस्य के रूप में’ उन्होंने उनकी मदद की.