बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- बालिग महिला अपनी पसंद के पुरुष से विवाह करने के लिए स्वतंत्र

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस को एक 31 वर्षीय महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, जिन्होंने अपने परिवार द्वारा दूसरे धर्म के दोस्त से शादी करने के विरोध के बीच अपना घर छोड़ दिया था. कोर्ट ने कहा कि वह वयस्क हैं और अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

नई दिल्ली: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस को अल्पसंख्यक समुदाय की एक 31 वर्षीय गर्भवती महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, जिन्होंने अपने परिवार की धमकियों के कारण अपने साथी से शादी करने के लिए अपना घर छोड़ दिया था.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में वकोला पुलिस अधिकारियों को महिला को महाराष्ट्र के बाहर उस स्थान तक वापस ले जाने का निर्देश दिया है जहां वह अपने पति के साथ रहती हैं. महिला ने दूसरे धर्म के एक व्यक्ति से विवाह करने के विरोध के बीच अपना घर छोड़ दिया था.

महिला 10 अक्टूबर को अपने पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में अदालत में पेश हुई थीं, जहां जस्टिस सारंग कोटवाल और श्याम चांडक की पीठ ने कहा, ‘वह वयस्क हैं और अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं.’

पिता की याचिका में कहा गया था कि उनकी बेटी 18 अप्रैल को लापता हो गई थी. उन्होंने वकोला पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का ज़िक्र किया जिस पर उन्हें शक है. 3 अक्टूबर को उनके वकील ने बेटी की सुरक्षा को लेकर आशंका जताई.

अभियोजक सुप्रिया काक ने वकोला पुलिस द्वारा उस थाने से प्राप्त बेटी का एक वीडियो पेश किया जिसके अधिकारक्षेत्र में वह अब रहती हैं. महिला के पिता के वकील ने का कहना था कि वह दबाव में बयान दे रही हो सकती हैं, इसलिए न्यायाधीशों ने वकोला पुलिस को उन्हें अदालत में पेश करने का निर्देश दिया.

उन्होंने महिला से चैंबर में पूछताछ की और खासकर यह पूछा कि क्या वह दबाव में है और उन्हें अपनी परेशानियां बताने में कठिनाई हो रही है.

अदालत ने कहा, ‘उन्होंने अपनी वर्तमान स्थिति के बारे में स्पष्ट जवाब दिए. उन्होंने बताया कि वह अच्छी नौकरी करती हैं और महाराष्ट्र के बाहर अपने दोस्त के साथ रह रही है. वह सचमुच उससे शादी करना चाहती है, लेकिन उसके माता-पिता उनकी शादी में बाधा डाल रहे हैं. उन्होंने बताया कि वह तीन महीने की गर्भवती हैं.’

स्थिति पर विचार करने के बाद अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि वह वयस्क है और निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है. उन्होंने आगे कहा, ‘ऐसी स्थिति में इस याचिका में आगे कुछ भी नहीं बचता.’

उन्होंने पिता को अपनी बेटी से बात करने की अनुमति देते हुए कहा, ‘दोनों ने एक-दूसरे से बात नहीं की, हालांकि उन्होंने एक-दूसरे को देखा.’

याचिका का निपटारा करते हुए अदालत ने कहा, ‘पक्षों के बीच दुश्मनी को देखते हुए उन्हें (महिला को) कुछ पुलिस सुरक्षा दी जानी चाहिए ताकि वह उस स्थान तक सुरक्षित पहुंच सकें जहां वह वर्तमान में अपने दोस्त के साथ रह रही हैं.’

उन्होंने वकोला के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अन्य कर्मचारियों की सहायता और सहयोग से याचिकाकर्ता की बेटी के साथ महाराष्ट्र के बाहर उस स्थान तक जाएं जहां वह वर्तमान में रह रही हैं.

उन्होंने कहा कि महिला अपने स्थानीय क्षेत्र में सुरक्षा पाने के लिए आगे कदम उठाने के लिए स्वतंत्र है और उनके वकील उस संबंध में उनका मार्गदर्शन करेंगे. इसके अलावा, वकोला पुलिस अधिकारी उस स्थानीय पुलिस स्टेशन से संपर्क करेंगे जहां वह रहती है और उस क्षेत्र में भी उसके लिए कुछ सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे.