न्यूयॉर्क में ममदानी की जीत पर मुंबई भाजपा प्रमुख बोले: मुंबई पर किसी ख़ान को थोपने नहीं देंगे

न्यूयॉर्क के पहले दक्षिण एशियाई मुस्लिम मेयर बने ज़ोहरान ममदानी की जीत के बाद मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी कि ‘मुंबई पर किसी ख़ान को थोपने की कोशिश हुई तो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.’ शिवसेना (यूबीटी) ने साटम के बयान की आलोचना की है, पर साथ ही जोड़ा है कि 'मुंबई का मेयर एक मराठी हिंदू ही बनेगा.'

(बाएं) मुंबई भाजपा के अध्यक्ष अमित साटम, (दाएं) न्यूयॉर्क के नए मेयर ज़ोहरान ममदानी. (फोटो: फेसबुक और एपी/पीटीआई)

नई दिल्ली: न्यूयॉर्क शहर में भारतीय मूल के मुस्लिम नेता जोहरान ममदानी की ऐतिहासिक जीत ने हजारों मील दूर मुंबई की राजनीति में तपिश पैदा कर दी है.

मुंबई भाजपा के अध्यक्ष अमित साटम ने एक विवादास्पद बयान जारी कर ममदानी की जीत को ‘शहरों के रंग बदलने’ का संकेत बताया और नगर निकाय चुनावों से कुछ दिन पहले ही चेतावनी दे दी कि मुंबई में किसी ‘खान’ को मेयर नहीं बनाने देंगे.

साटम का विवादास्पद बयान

भाजपा के मुंबई इकाई अध्यक्ष और अंधेरी वेस्ट के विधायक अमित साटम ने 5 नवंबर को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने ममदानी की जीत के संदर्भ में मुंबईवासियों को ‘सावधान रहने’ के लिए कहा.

साटम ने लिखा: ‘जैसे कुछ अंतरराष्ट्रीय शहरों का रंग बदल रहा है, कुछ मेयरों के सरनेम देखकर और महाविकास अघाड़ी के ‘वोट जिहाद’ को देखते हुए, मुंबई के संदर्भ में सावधान रहना जरूरी लगता है. अगर किसी ने मुंबई पर ‘खान’ थोपने की कोशिश की, तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा! जागो, मुंबईकर!’

साटम ने कहा कि उनकी पार्टी मुंबई की विविधता और समावेशी संस्कृति को ‘संरक्षित’ करना चाहती है. साटम ने यह भी दावा किया कि ‘कुछ लोग राजनीतिक शक्ति बनाए रखने के लिए तुष्टिकरण की नीति अपना रहे हैं.’

यह साटम का पहली बार नहीं है जब वह ऐसे बयान दे रहे हैं. सितंबर में भाजपा के ‘विजय संकल्प मेलवा’ में, जिसमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल मौजूद थे, साटम ने कहा था, ‘यह लड़ाई मुंबई को सुरक्षित रखने के लिए है. अंतरराष्ट्रीय देश घुसपैठ का शिकार हो रहे हैं, और उनके रंग बदल रहे हैं. कुछ शहरों के मेयरों के सरनेम देखो. क्या हम चाहते हैं कि मुंबई में भी ऐसा पैटर्न हो?’

शिवसेना (यूबीटी) का जवाब

शिवसेना (उद्धव बालराज ठाकरे) के नेता आनंद दुबे ने साटम के बयानों की कड़ी निंदा की है.

दुबे ने कहा कि साटम की ‘मानसिक स्थिति बिगड़ गई है’ और जब से वह भाजपा के अध्यक्ष बने हैं, उन्हें एहसास हो गया है कि वे ‘खत्म होने वाले हैं’, इसीलिए वह ‘दिन-रात अजीब बयान दे रहे हैं.’

दुबे ने व्यंग्य में कहा कि अगर उन्हें ‘इलाज की जरूरत है तो शिवसेना आगरा के पागलखाने में उनका इलाज करवाएगी.’ उन्होंने आगे कहा, ‘भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि अमित साटम जैसे लोगों को समझदारी आए.’

दुबे ने अपने हमले को और तीव्र करते हुए भाजपा के ‘सौगात-ए-मोदी‘ कार्यक्रम का जिक्र किया. इस कार्यक्रम के तहत भाजपा ने मार्च 2025 में उत्तर प्रदेश में ईद-उल-फितर से पहले 10 लाख मुसलमानों को उपहार किट वितरित किए थे.

दुबे ने साटम से सीधा सवाल पूछा, ‘मैं अमित साटम से पूछना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी ये सौगात-ए-मोदी किट ममदानी को भेज रहे थे, या पाकिस्तान और बांग्लादेश को? प्रधानमंत्री को गलत साबित मत करो.’

शिवसेना का दोहरा संदेश

दिलचस्प बात यह है कि जहां दुबे ने भाजपा की ‘हिंदू-मुस्लिम’ राजनीति की निंदा की, वहीं उन्होंने भी स्पष्ट किया कि ‘मुंबई का मेयर एक मराठी हिंदू ही बनेगा.’

उन्होंने कहा, ‘मैं आत्मविश्वास से कहता हूं कि तिरंगा यहां फहराएगा, और एक मराठी हिंदू ही मुंबई का मेयर बनेगा.’

ममदानी की जीत और भारतीय राजनीति

ममदानी की न्यूयॉर्क शहर में जीत को भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है. ममदानी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसे नेता हैं जो खुले तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हैं और भारत के ‘हिंदू-राष्ट्र’ मॉडल का विरोध करते हैं.

उनकी जीत ने दिखाया कि बहुसंख्यकवादी राजनीति के खिलाफ भी लोकतंत्र में जीत संभव है. साटम के बयान इसी बात को दर्शाते हैं कि भारतीय राजनीति में किस तरह ममदानी की सफलता को ‘खतरे’ के रूप में देखा जा रहा है.