नई दिल्ली: बढ़ते राजनीतिक दबाव के बाद एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे और मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के एक साल बाद जातीय हिंसा से जूझ रहा यह राज्य अब एक नया मुख्यमंत्री पाने जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता युमनाम खेमचंद, जिन्हें मंगलवार (3 फरवरी) को विधायक दल का नेता चुना गया, मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे.
द हिंदू ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कांगपोकपी से कुकी-जो विधायक नेमचा किपगेन को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना है. वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला और पहली कुकी-जो नेता होंगी. एक अन्य उपमुख्यमंत्री भाजपा की सहयोगी पार्टी नगा पीपुल्स फ्रंट से होने की संभावना है. इस बैठक में मेईतेई, कुकी-जो और नगा समुदायों से आने वाले विधायक शामिल हुए.
मंगलवार को पहले दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में भाजपा विधायक दल की बैठक हुई. मतदान के बाद भाजपा नेताओं ने खेमचंद को बधाई दी. इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री सिंह भी मौजूद थे.
भाजपा मणिपुर ने एक्स (X) पर पोस्ट किया, ‘माननीय वाई. खेमचंद सिंह को मणिपुर भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने पर हार्दिक बधाई. भाजपा मणिपुर प्रदेश की ओर से हम आपको बड़ी सफलता की शुभकामनाएं देते हैं. आपका अनुभव, समर्पण और नेतृत्व पार्टी को और मजबूत करेगा और मणिपुर की जनता की आकांक्षाओं की सेवा करेगा.’
9 फरवरी 2025 को आरोपों की श्रृंखला और महीनों से बढ़ते राजनीतिक दबाव के बाद – तब के मणिपुर मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. जब विपक्ष ने उनकी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की मांग की, तब दबाव अपने चरम पर पहुंच गया. इसके बाद 13 फरवरी 2025 को राज्य में छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया गया, जिसे अगस्त में और छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया.
राज्य विधानसभा को स्थगित अवस्था (सस्पेंडेड एनीमेशन) में रखा गया था. राज्य विधानसभा का कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होगा.
मणिपुर में हिंसा पिछले लगभग तीन वर्षों से जारी है. उपलब्ध ताजा आधिकारिक आंकड़ों (मई 2025 तक) के अनुसार, मेईतेई बहुसंख्यक समुदाय और अल्पसंख्यक कुकी-जो समुदायों के बीच हुए जातीय संघर्ष में कम से कम 260 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं.
वरिष्ठ भाजपा नेता खेमचंद, जो सिंह की कैबिनेट में विधानसभा अध्यक्ष और मंत्री रह चुके हैं, मेईतेई समुदाय से आते हैं, जबकि संभावित उपमुख्यमंत्री मानी जा रही किपगेन कुकी समुदाय से हैं.
खेमचंद 2017 और 2022 में सिंगजामेई निर्वाचन क्षेत्र से मणिपुर विधानसभा के लिए चुने गए थे और 2017 से 2022 तक मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष रहे. 2022 में उन्हें नगर प्रशासन, आवास एवं शहरी विकास (एमएएचयूडी) विभाग, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज और शिक्षा विभाग का मंत्री नियुक्त किया गया था.
द हिंदू के अनुसार, भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुग ने बताया कि वाई. खेमचंद सिंह का नाम पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने प्रस्तावित किया था और बुधवार को नेता राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे.
60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में फिलहाल भाजपा के 37 विधायक हैं. पार्टी को अपने सहयोगियों – नगा पीपुल्स फ्रंट के 5 विधायक और जनता दल (यूनाइटेड) के 1 विधायक — का समर्थन प्राप्त है. विपक्ष के पास कुल 16 सीटें हैं, जिनमें नेशनल पीपुल्स पार्टी (6), कांग्रेस (5), तीन निर्दलीय और कुकी पीपुल्स एलायंस के दो विधायक शामिल हैं, जिसने अगस्त 2023 में बीरेन सरकार से समर्थन वापस ले लिया था.
सभी भाजपा कुकी-जो विधायक सहमत नहीं
द हिंदू के अनुसार, हालांकि, मंगलवार (3 फरवरी) की बैठक में पांच कुकी-जो विधायक शामिल हुए, लेकिन सभी इस फैसले से सहमत नहीं हैं.
चूड़ाचांदपुर के सैकोट से भाजपा विधायक और कुकी-जो समुदाय से आने वाले पाओलियनलाल हाओकिप ने अखबार से कहा कि उन्होंने पार्टी नेताओं से अलग से मुलाकात की और बताया कि जब तक समुदाय के लिए किसी राजनीतिक समाधान का आश्वासन नहीं मिलता, वे सरकार में शामिल नहीं होंगे.
ज्ञात हो कि कुकी-जो नागरिक समाज संगठन और सरकार के साथ ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस’ (एसओओ) समझौते में शामिल विद्रोही समूह कुकी-जो क्षेत्रों के लिए विधानसभा सहित एक केंद्र शासित प्रदेश की मांग कर रहे हैं. अलग प्रशासन की मांग सबसे पहले 2023 में कुकी-जो विधायकों ने उठाई थी.
बैठक में शामिल न होने वाले हाओकिप ने कहा, ‘भाजपा के नेताओं, जिनमें संथोष (पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव) भी शामिल हैं, ने कहा कि सामूहिक समझदारी यही होगी कि पहले सरकार में शामिल हों और फिर राजनीतिक समाधान तलाशें. मैंने उनसे कहा कि अगर वे सरकार गठन के साथ आगे बढ़ते हैं तो स्थिति फिर से भड़क सकती है. मैं समझता हूं कि यह पार्टी का रुख है; लेकिन मेरे लिए मेरी जनता पार्टी से ऊपर है; मूल मुद्दों का समाधान पहले होना चाहिए.’
