नई दिल्ली: अमेरिका के प्रतिष्ठित अख़बार द वॉशिंगटन पोस्ट ने बुधवार (4 फरवरी) को अपने कर्मचारियों के लगभग एक-तिहाई हिस्से की छंटनी कर दी. इस छंटनी के तहत अख़बार का स्पोर्ट्स सेक्शन पूरी तरह बंद कर दिया गया है, कई विदेशी ब्यूरो खत्म किए गए हैं और किताबों से जुड़ी कवरेज (बुक वर्ल्ड) भी समाप्त कर दी गई है.
पोस्ट के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने कर्मचारियों को भेजे गए नोट में इस फैसले को ‘दर्दनाक लेकिन ज़रूरी’ बताया. उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक और यूज़र आदतों के दौर में अख़बार को मज़बूत स्थिति में लाने के लिए यह कदम उठाया गया है.
मरे ने लिखा, ‘हम हर किसी के लिए सब कुछ नहीं हो सकते.’
मैट मरे ने कहा कि पोस्ट अब राजनीति, राष्ट्रीय मामलों और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा. लेकिन आलोचकों का मानना है कि संसाधनों में इतनी बड़ी कटौती से अख़बार की ऐतिहासिक भूमिका और लोकतांत्रिक महत्व को गंभीर नुकसान पहुंचेगा.
ईमेल से मिली छंटनी की सूचना
एक ऑनलाइन बैठक में बदलावों की जानकारी देने के बाद कर्मचारियों को ईमेल भेजे गए, जिनके विषय में साफ़ लिखा था कि उनकी भूमिका समाप्त की जा रही है या नहीं.
हालांकि हफ्तों से छंटनी की अफ़वाहें चल रही थीं- खासकर तब से, जब यह सामने आया कि शीतकालीन ओलंपिक की कवरेज के लिए इटली जाने की उम्मीद कर रहे स्पोर्ट्स रिपोर्टर्स की यात्रा रद्द कर दी गई है-लेकिन जब आधिकारिक घोषणा हुई, तो कटौती का पैमाना सबके लिए चौंकाने वाला था.
नैन्सी पेलोसी की चेतावनी
एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, अमेरिका की पूर्व हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने छंटनी को ‘देश भर में न्यूज़रूम को खोखला करने वाले कॉरपोरेट फैसलों के व्यापक और निंदनीय पैटर्न का हिस्सा’ बताया. वॉशिंगटन प्रेस क्लब फ़ाउंडेशन में दिए भाषण में उन्होंने कहा, ‘अगर स्वतंत्र प्रेस को ज़िंदा रहने के लिए ज़रूरी संसाधनों से वंचित कर दिया जाए, तो वह अपना मिशन पूरा नहीं कर सकता. और जब न्यूज़रूम कमजोर होते हैं, तो हमारा गणराज्य भी कमजोर होता है.’
पत्रकारों की अपीलों के बावजूद, जेफ बेज़ोस ने छंटनी को लेकर कोई तत्काल टिप्पणी नहीं की. हाल के वर्षों में अख़बार ने बड़ी संख्या में सब्सक्राइबर खोए हैं, जिसे कई लोग 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेट उम्मीदवार कमला हैरिस के समर्थन से पीछे हटने और ओपिनियन पेज को अधिक रूढ़िवादी दिशा में मोड़ने से जोड़ते हैं.
हालांकि पोस्ट एक निजी कंपनी है और अपने सब्सक्राइबर या कर्मचारियों की संख्या सार्वजनिक नहीं करती, लेकिन माना जाता है कि इसके करीब 20 लाख सब्सक्राइबर हैं.
पश्चिम एशिया ब्यूरो पूरी तरह समाप्त
काहिरा ब्यूरो प्रमुख क्लेयर पार्कर ने एक्स पर बताया कि उन्हें और अख़बार के सभी पश्चिम एशिया संवाददाताओं और संपादकों को नौकरी से निकाल दिया गया है. उन्होंने लिखा, ‘तर्क समझना मुश्किल है.’ यूक्रेन युद्ध क्षेत्र से रिपोर्टिंग करने वाली पत्रकार लिज़ी जॉनसन ने भी अपनी छंटनी की पुष्टि की.
इसके अलावा वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने एशिया एडिटर, नई दिल्ली ब्यूरो चीफ, सिडनी ब्यूरो चीफ, पूरे मिडिल ईस्ट रिपोर्टिंग टीम, चीन, ईरान और तुर्की के संवाददाताओं समेत कई अन्य पत्रकारों को नौकरी से निकाल दिया है.
अमेरिकी विश्लेषक इवान फीजेनबॉम ने एक्स पर लिखा है, ‘दुनिया हर मिनट कम अमेरिका-केंद्रित होती जा रही है, जबकि अमेरिका पहले से कहीं अधिक अमेरिका-केंद्रित होता जा रहा है. यह एक निराशाजनक, लेकिन हमारे दौर का बिल्कुल सटीक सार है. देश के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अख़बारों में से एक, जिसने वास्तव में अमेरिका के इतिहास को आकार दिया, अब यह मानता है कि दुनिया पर रिपोर्टिंग की कोई उपयोगिता नहीं बची है.’
पत्रकारिता जगत में आक्रोश
पत्रकारिता जगत में ग़ुस्सा और शोक दोनों फैल गया. द अटलांटिक में लिखते हुए पोस्ट की पूर्व पत्रकार ऐशली पार्कर ने चेतावनी दी कि अगर मौजूदा रास्ता जारी रहा, तो ‘यह अख़बार शायद ज़्यादा समय तक टिक न पाए.’
