ईरानी युद्धपोत का वीडियो बनाने के आरोप में गिरफ़्तार रिपब्लिक टीवी के पत्रकार ज़मानत के लिए कोर्ट पहुंचे

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच श्रीलंका के तट पर अमेरिका द्वारा एक अन्य ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने के एक दिन बाद कोच्चि के एक बंदरगाह पर पहुंचे आईआरआईएस लावन की वीडियो बनाने के आरोप में रिपब्लिक टीवी के पत्रकार, कैमरामैन समेत एक नाव चालक को गिरफ़्तार किया गया है. इन सभी को प्रतिबंधित उच्च सुरक्षा क्षेत्र के पास से पकड़ा गया था, जहां आधिकारिक अनुमति के बिना फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर रोक है

फ़ाइल तस्वीर: फरवरी 2025 में मुंबई की यात्रा के दौरान आईआरआईएस लावन. (फोटो: पश्चिमी नौसेना कमान वाया एक्स)

नई दिल्ली: केरल के एर्नाकुलम जिले में स्थित कोच्चि बंदरगाह पर खड़े ईरानी युद्धपोत का वीडियो रिकॉर्ड करने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए रिपब्लिक टीवी के दो पत्रकारों ने केरल की अदालत में ज़मानत याचिका दायर की है.

बार एंड बेंच की ख़बर के मुताबिक,एर्नाकुलम स्थित प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने सोमवार (9 मार्च) को उनकी ज़मानत याचिका पर सुनवाई की और फैसला सुरक्षित रख लिया.

रविवार (8 मार्च) को इस मामले में पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के पत्रकार शंकर सीजी और कैमरामैन एस. मणि के साथ एक नाव चालक को भी  कोच्चि से हिरासत में लिया था.

उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच श्रीलंका के तट पर अमेरिका द्वारा एक अन्य ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने के एक दिन बाद बंदरगाह पर पहुंचे आईआरआईएस लावन की वीडियो बनाने के आरोप में इन लोगों को हिरासत में लिया गया.

भारत और ईरान के बीच हुए राजनयिक समझौते के तहत आईआरआईएस लावन फिलहाल बंदरगाह पर खड़ा है.

खबरों के मुताबिक, रिपब्लिक टीवी के पत्रकार एक छोटी किराए की नाव में बंदरगाह क्षेत्र में विदेशी सैन्य पोत के नज़दीकी दृश्य रिकॉर्ड करने के लिए गए थे. उन्हें केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने एक प्रतिबंधित उच्च सुरक्षा क्षेत्र के पास से पकड़ा. इस क्षेत्र में आधिकारिक अनुमति के बिना फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है.

इन लोगों पर आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की धारा 3(1)(ए) (निषिद्ध स्थानों में जासूसी) और 5 (सूचना का गलत संचार) के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 329(3) (आपराधिक अतिक्रमण) और धारा 3(5) (सामान्य इरादे से किए गए कृत्य) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

अदालत के सामने पत्रकारों का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता जियो पॉल ने कहा कि कोई भी आपत्तिजनक फुटेज रिकॉर्ड नहीं किया गया था.

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अन्य समाचार संगठनों ने भी जहाज के तट पर पहुंचने की रिपोर्टिंग की है, इसलिए आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत रिपब्लिक टीवी के दोनों पत्रकारों पर लगाए गए आरोप मान्य नहीं होंगे.

अदालत ज़मानत याचिका पर मंगलवार को अपना फैसला सुनाएगी.