असम के दैनिक अख़बार ‘असोमिया प्रतिदिन’ पर चुनाव के बीच हुए हमले की प्रेस क्लब ने की निंदा

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने असम में जारी विधानसभा चुनाव के बीच 10 अप्रैल को स्थानीय अख़बार 'असोमिया प्रतिदिन' के कार्यालय पर हुए हमले की निंदा की है. वहीं, अख़बार ने इस घटना को ‘प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला’ बताया है.

अख़बार के कार्यालय पर हमले के बाद की तस्वीर. (फोटो: एक्स/@pratidinasomiya)

नई दिल्ली: प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने सोमवार (13 अप्रैल) को असम के दैनिक अख़बार असोमिया प्रतिदिन के कार्यालय पर असम में जारी विधानसभा चुनावों के बीच शुक्रवार (10 अप्रैल) को हुए हमले की निंदा की है. 

यह हमला विधानसभा चुनाव के लिए मतदान समाप्त होने के 24 घंटे से भी कम समय के भीतर हुआ. 

प्रेस क्लब के एक बयान में कहा गया, ‘ध्यान देने वाली बात यह है कि 10 अप्रैल की रात अज्ञात लोगों द्वारा अख़बार के लखीमपुर स्थित दफ्तर में की गई तोड़फोड़, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा द्वारा प्रतिदिन मीडिया समूह और एक असमिया न्यूज़ चैनल डीवाए365 के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणी किए जाने के कुछ ही घंटों बाद हुई.’

प्रेस क्लब ने 9 अप्रैल के मतदान के आसपास असम में अज्ञात लोगों द्वारा अख़बार की सैकड़ों प्रतियां जलाए जाने की भी आलोचना की.

बयान में कहा गया, ‘चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री कई मौकों पर राज्य के भीतर और बाहर के विभिन्न मीडिया संगठनों के पत्रकारों पर सवाल पूछने को लेकर मौखिक हमले करते देखे गए, जबकि सवाल पूछना लोकतंत्र में मीडिया का अधिकार है. प्रेस क्लब मुख्यमंत्री को याद दिलाना चाहता है कि वे एक संवैधानिक पद पर हैं और नागरिकों के हित में उन्हें प्रेस के प्रति जवाबदेह होना चाहिए, चाहे सवाल असहज ही क्यों न हों.’ 

बयान में यह भी जोड़ा गया कि जनहित में सरकार या किसी राजनीतिक नेता से सवाल करना ही पत्रकारिता है.

प्रेस क्लब ने राज्य के अधिकारियों से इन घटनाओं की त्वरित और निष्पक्ष जांच करने और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने की अपील की.

बयान में कहा गया, ‘असम में हाल के दिनों में पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर हुए हमलों को देश के कई हिस्सों में, खासकर डिजिटल स्पेस में, खबरों और विचारों को सेंसर करने की बढ़ती प्रवृत्ति के व्यापक माहौल के रूप में देखा जा सकता है, जो प्रेस क्लब के लिए गंभीर चिंता का विषय है. कई पत्रकारों, फ्रीलांसरों, फैक्ट-चेकर्स और यूट्यूबर्स के सोशल मीडिया अकाउंट मनमाने ढंग से ब्लॉक किए गए हैं, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हुई है.’

प्रेस क्लब ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अफ़ज़ल बिन सोहैल के फेसबुक पेजों के हालिया निलंबन की भी निंदा की.

वहीं, अख़बार ने एक बयान में बताया कि इस हमले में किसी भी कर्मचारी को चोट नहीं आई, लेकिन इस घटना को ‘प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला’ बताया.

इससे पहले असम के प्रेस संगठनों ने शनिवार (12 अप्रैल) को आरोप लगाया था कि राज्य में भाजपा की सरकार मीडिया पर ‘संगठित तरीके से हमले’ कर रही है, जिससे ऐसा माहौल बन रहा है जो पत्रकारों की स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा करता है.

नार्थ ईस्ट नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना के संबंध में एक एफआईआर दर्ज की गई है.