नई दिल्ली: ओडिशा में जनगणना के काम में लगे दो स्कूल शिक्षकों की दो अलग-अलग घटनाओं में कथित तौर पर लू लगने (हीटस्ट्रोक) के कारण दो दिनों के भीतर मौत हो गई.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अधिकारियों ने सोमवार (27 अप्रैल) को बताया कि ये मौतें मयूरभंज और सुंदरगढ़ जिलों से सामने आई हैं, जहां तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है. राज्य में जनगणना ड्यूटी से जुड़ी यह तीसरी ऐसी घटना है.
मयूरभंज जिले में बेतनोटी ब्लॉक के बैद्यनाथ हाई स्कूल के शिक्षक राजकपूर हेम्ब्रम की रविवार शाम बारीपदा के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. उनके भतीजे लक्ष्मीकांत हेम्ब्रम के अनुसार, घर-घर जाकर जनगणना का काम पूरा करने के बाद वे बेहोश हो गए थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था.
स्कूल की प्रिंसिपल ममता दास ने बताया, ‘जनगणना काम से लौटने के बाद हेम्ब्रम ने बेचैनी की शिकायत की थी. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई. उन्हें जनगणना के लिए तीन गांव सौंपे गए थे.’
परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि हेम्ब्रम ने पहले ही अपने साथियों को बताया था कि अस्वस्थ होने के बावजूद अधिकारियों का उन पर जनगणना ड्यूटी जारी रखने का दबाव था.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि, विशेष राहत आयुक्त (Special Relief Commissioner) के कार्यालय ने कहा कि उसे ओडिशा में लू लगने से हुई मौतों की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है.
अखबार ने मयूरभंज के जिला शिक्षा अधिकारी पूर्णचंद्र सेठी के हवाले से कहा कि चूंकि जनगणना डिजिटल रूप से की जा रही है, इसलिए मृतक शिक्षक ने आखिरी बार 22 अप्रैल को 14 घरों की गिनती की थी. सेठी ने कहा, ‘उन्होंने 23 से 26 अप्रैल के बीच कोई डेटा दर्ज नहीं किया है. मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता कि क्या वह रविवार को जनगणना ड्यूटी पर थे.’
उन्होंने आगे कहा कि मृतक को उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) की समस्या थी.
सुंदरगढ़ जिले में भी इसी तरह की एक घटना में गुरुंडिया ब्लॉक के अंतर्गत जराडा सरकारी हाई स्कूल के शिक्षक अनुराग एक्का शनिवार को जनगणना ड्यूटी के दौरान बीमार पड़ गए और उसी दिन उनकी मौत हो गई. उन्हें शुरू में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था, लेकिन हालत बिगड़ने पर बाद में जिला मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया.
विशेष राहत आयुक्त के कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि जिला कलेक्टरों को इन घटनाओं की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं और विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत के सही कारण की पुष्टि की जाएगी.
इससे पहले, 21 अप्रैल को जारी एक आधिकारिक सूचना के अनुसार, सोनपुर जिले में भी एक गणनाकर्मी की जनगणना ड्यूटी से लौटने के बाद कथित तौर पर दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी.
ओडिशा में लगभग एक लाख गणनाकर्मी, जिनमें अधिकांश स्कूल शिक्षक हैं, और करीब 17,000 पर्यवेक्षक हाउस-लिस्टिंग सर्वे में लगे हुए हैं, जिसे जनगणना का पहला चरण माना जाता है.
राज्य सरकार ने अत्यधिक गर्मी की स्थिति में काम कर रहे जनगणनाकर्मियों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है. इसके तहत सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच फील्डवर्क पर रोक लगाई गई है और ड्यूटी के दौरान पर्याप्त पानी पीने तथा ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) साथ रखने की सलाह दी गई है.
