नई दिल्ली: ओडिशा के कटक की एक सत्र अदालत ने मंगलवार (26 मई 2026) को मोहम्मद अब्दुर रहमान अली खान को भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा और इंडियन मुजाहिदीन से कथित संबंधों के मामले में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ ठोस और भरोसेमंद साक्ष्य पेश करने में विफल रहा.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, रहमान को 17 दिसंबर 2012 को ओडिशा पुलिस और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने और उसके लिए धन जुटाने के आरोप में गिरफ्तार किया था. उन पर भारत सरकार के खिलाफ नफरत फैलाने और असंतोष पैदा करने का भी आरोप लगाया गया था. उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 जैसी कड़ी धाराएं लगाई गई थीं.
कटक जिले के बिल्टरुआन गांव में एक मदरसा चलाने वाले रहमान, जगतपुर थाना क्षेत्र के सताबतिया गांव के निवासी हैं. जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि वे मदरसे के जरिए कथित रूप से राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का प्रचार कर रहे थे और लोगों की भर्ती कर रहे थे. उन पर विदेशों से संदिग्ध गतिविधियों के लिए धन जुटाने के आरोप भी लगाए गए थे.
मामले में दिसंबर 2016 में आरोपपत्र दाखिल किया गया था, जबकि अदालत ने 13 सितंबर 2017 को आरोप तय किए थे.
मामले में फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो सके कि रहमान ने देश या विदेश से आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन प्राप्त किया था या उन्होंने अल-कायदा अथवा इंडियन मुजाहिदीन जैसे संगठनों के लिए धन जुटाया था.
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उनके किसी आतंकवादी संगठन से संबंध, कुख्यात आतंकियों से संपर्क या पाकिस्तान जाने को लेकर कोई ठोस और विश्वसनीय सामग्री पेश नहीं की गई.
अदालती आदेश में कहा गया, ‘ऐसा एक भी ठोस और भरोसेमंद सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो कि आरोपी कभी देश या विदेश के किसी कुख्यात आतंकवादी से मिला हो या वह किसी आतंकवादी संगठन का सदस्य रहा हो.’
हालांकि, रहमान पहले से ही दिल्ली में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के एक मामले में दोषी ठहराए जा चुके हैं और उन्हें सात साल की सजा सुनाई गई थी.
