नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आने के बाद इस हफ़्ते सैकड़ों स्कूल प्रधानाध्यापकों को एक सोशल मीडिया प्लेबुक यानी टूलकिट भेजी गई है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्लेबुक में स्कूल प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया था कि वे बड़े पैमाने पर हो रही आलोचना के बीच बोर्ड की तेज़ी से बिगड़ती छवि को सुधारने की कोशिश करें.
रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि इन निर्देशों के बाद कई स्कूलों, जिनमें सरकारी केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय भी शामिल हैं, ने डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया का बचाव करते हुए वीडियो पोस्ट किए हैं.
सोशल मीडिया प्लेबुक के अंदर क्या है?
‘प्रधानाध्यापकों के लिए सामग्री’ (मटेरियल फॉर प्रिंसिपल्स) शीर्षक वाले इस टूलकिट में प्रधानाध्यापकों के लिए पहले से लिखे हुए कुछ मुख्य बिंदु शामिल हैं, जिसे उन्हें पढ़कर उन्हें सुनाना था.
इसमें उनसे आग्रह किया गया है कि वे सीबीएसई को ‘इन शुरुआती दिक्कतों के मामले में बेहद सक्रिय, संवेदनशील और संवाद करने वाला’ बताएं.
रिपोर्ट के अनुसार, स्कूलों को यह निर्देश भी दिया गया था कि वे छात्रों को सूचित करें कि यदि उनके नतीजों और उनके प्रदर्शन के बीच कोई विसंगति पाई जाती है, तो उन्हें बोर्ड की आधिकारिक पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से ही अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए.
स्कूलों ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
अखबार के अनुसार, इन निर्देशों के बाद छात्रों और प्रधानाध्यापकों ने कई वीडियो अपलोड किए गए हैं-जिनमें ज़्यादातर इंस्टाग्राम रील्स थीं, और उनमें ठीक वैसी ही भाषा का इस्तेमाल किया गया था, जैसी कि सर्कुलेट किए गए दस्तावेज़ में लिखी थी. खास तौर पर शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय संस्थान-जिनमें केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय शामिल हैं- ने भी ऐसा ही किया.
जवाहर नवोदय विद्यालय, जयपुर ने अपने प्रभारी प्रिंसिपल अभिमन्यु भट्ट का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने इस सिस्टम की तारीफ़ की है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस वीडियो में भट्ट कहते हैं, ‘ओएसएम, सीबीएसई की एक बहुत अच्छी पहल है… जवाबों का सही तरीके से मूल्यांकन किया गया है… शिक्षकों को सब कुछ पढ़ने के लिए काफ़ी समय मिला. आने वाले सालों में 10वीं क्लास के छात्रों को भी ओएसएम से फ़ायदा होगा.’
केंद्रीय विद्यालय नंबर 1 एयर फ़ोर्स स्टेशन गोरखपुर द्वारा पोस्ट किए गए एक और वीडियो में, जिसमें 12वीं क्लास का एक स्टूडेंट नज़र आ रहा था, कहा गया कि वह स्टूडेंट अपने नंबरों से संतुष्ट था और उसे नहीं लगता था कि इन गड़बड़ियों के लिए ओएसएम ज़िम्मेदार है.
जब इस बारे में पूछा गया, तो स्कूल के प्रिंसिपल ने अखबार को बताया कि यह वीडियो पोस्ट करने का फ़ैसला स्कूल का अपना था, न कि टूलकिट के निर्देशों का पालन है.
दिल्ली पब्लिक स्कूल सिलीगुड़ी के प्रिंसिपल ने उस डॉक्यूमेंट को हूबहू कोट करते हुए कहा कि इस सिस्टम को ‘सकारात्मक सोच के साथ लागू किया गया था, यह ध्यान में रखते हुए कि मूल्यांकन निष्पक्ष, सटीक, तेज़ और पारदर्शी होगा.’
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीएम श्री स्कूल की एक हिंदी टीचर, जिन्होंने कथित तौर पर कॉपियों के मूल्यांकन के दौरान एडिशनल हेड एग्ज़ामिनर के तौर पर काम किया था, ने सार्वजनिक तौर पर ओएसएम सिस्टम की तारीफ़ करते हुए कहा कि उन्हें यह ‘बहुत फ़ायदेमंद’ लगा.
उन्होंने आगे कहा, ‘मेरी राय में, इसके सिर्फ़ फ़ायदे ही थे. मुझे इसका कोई भी बुरा असर नज़र नहीं आया. इससे काफ़ी समय भी बचा.’
उभरते विवाद
इंडिया टुडे ने रिपोर्ट किया कि रेडिट पर एक छात्र ने दावा किया कि शिक्षक उनसे सोशल मीडिया पोस्ट और इंस्टाग्राम स्टोरिज़ शेयर करने के लिए कह रहे थे, जिनमें यह लिखा हो कि उन्हें ‘ओएसएम चेकिंग से कोई दिक्कत नहीं है.’
छात्र ने यह भी बताया कि बोर्ड परीक्षा पास करने के बाद भी वह ‘मानसिक रूप से परेशान’ महसूस कर रहा था. इस दावे की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक अलग पोस्ट में आरोप लगाया गया कि इम्फाल के एक केंद्रीय विद्यालय के पिछले साल के स्कूल टॉपर्स से ओएसएम का समर्थन करने के लिए कहा जा रहा था, जबकि यह सिस्टम इसी साल शुरू किया गया है.
एक वीडियो में, एक छात्रा कहती है कि वह अपने अंकों से संतुष्ट है और यह कि ‘नया शुरू किया गया ओएसएम सिस्टम निष्पक्ष और पारदर्शी है.’
वह अपने साथी छात्रों को भी टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है.
यह विवाद तब सुर्खियों में आया, जब सोशल मीडिया पर एक यूज़र ने पूछा कि आखिर पुराने बैच के छात्र प्रमोशनल क्लिप्स में क्यों नज़र आ रहे हैं.
उन्होंने लिखा, ‘केवी इंफाल में पढ़ने वाले मेरे भाई ने अभी-अभी मेरे साथ एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें छात्रों से सीबीएसई ओएसएम की तारीफ़ करने के लिए कहा जा रहा है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘सबसे अजीब बात तो यह है कि ओएसएम को इसी साल शुरू किया गया है. 2024-25 बैच के छात्रों ने तो इसके तहत पढ़ाई भी नहीं की है, फिर भी टॉपर्स का इस्तेमाल प्रमोशन के लिए इस तरह किया जा रहा है, मानो इसी ने उनके बोर्ड के अनुभव को पूरी तरह बदल दिया हो.’
सीबीएसई का जवाब
नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने अखबार को बताया कि बोर्ड ने ‘किसी को भी अपने पक्ष में कोई वीडियो पोस्ट करने का निर्देश नहीं दिया था.’
सोशल मीडिया पर सैकड़ों शिकायतें आने के बाद यह कदम उठाया गया है, जिनमें अपलोड की गई उत्तर पुस्तिकाओं में विसंगतियां, पुनर्मूल्यांकन पोर्टल में अनियमितताएं, भुगतान में गड़बड़ी और भारी ट्रैफिक के दौरान पोर्टल क्रैश होने की शिकायतें शामिल हैं.
एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, 26 मई तक, 12वीं कक्षा की परीक्षाओं में शामिल हुए लगभग 18 लाख छात्रों में से लगभग हर चौथा छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की हुई कॉपियों के लिए आवेदन कर चुका था.
सीबीएसई ने पिछले साल की तुलना में इस 208% की बढ़ोतरी का श्रेय मई में घोषित की गई फीस में कटौती को दिया. विरोध के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 12वीं की आंसरशीट देखने की फीस को ₹700 से घटाकर सिर्फ 100 रुपये कर दिया था.
ओएसएम को लेकर विवाद सीबीएसई 12वीं का रिजल्ट 13 मई 2026 को जारी किया गया था. 12वीं का रिजल्ट पिछले साल 88.39% से घटकर 85.20% पर आ गया है. लगभग 98 लाख कॉपियां इस बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (ओएसएम) के जरिए जांची गई थी, जबकि 13000 कॉपियां मैन्युअल तरीके से चेक हुई थीं.
सीबीएसई 12वीं बोर्ड रिजल्ट के बाद कई छात्रों और उनके अभिभावकों ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर सवाल उठाया है. उन्होंने शिकायत की कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम की वजह से 12वीं में छात्रों के काफी कम नंबर आए हैं.
