नीट-यूजी: पीएम मोदी द्वारा री-एग्ज़ाम की निगरानी, लॉजिस्टिक्स के लिए सेना के इस्तेमाल का दावा; सवाल उठे

21 जून को होने वाले नीट-यूजी री-एग्ज़ाम को लेकर कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ख़ुद इस परीक्षा की निगरानी करेंगे. इसके अलावा इस परीक्षा में पहली बार भारतीय सशस्त्र बलों (थल सेना और वायुसेना) की मदद लेने की बात भी सामने आ रही है, जिसे लेकर कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए हैं.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: नीट-यूजी 2026 का 21 जून को होने वाला री-एग्ज़ाम इस वक्त सुर्खियों में है. इस परीक्षा को लेकर तमाम तरह के दावे किए जा रहे हैं. कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस परीक्षा की निगरानी करेंगे. इसके अलावा इस परीक्षा में पहली बार भारतीय सशस्त्र बलों (थल सेना और वायुसेना) की मदद लेने की बात भी सामने आ रही है.

मालूम हो कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा तीन मई को आयोजित की गई नीट अंडर ग्रेजुएट (यूजी) 2026 की परीक्षा पेपर लीक के दावों के बाद रद्द कर दी गई थी, जिसके बाद अब यह परीक्षा दोबारा 21 जून को होगी.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे मामले की समीक्षा के लिए गुरुवार (28 मई) को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में उनके आवास पर एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक हुई, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, वरिष्ठ मंत्री और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी तथा शिक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए.

बताया जा रहा है कि इस बैठक में परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की गई, जिसमें प्रश्न पत्र तैयार करने और उनकी छपाई से लेकर परिवहन, सुरक्षा और अंतिम चरण तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के सभी पहलू शामिल थे.

इस संबंध में एनटीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अख़बार को बताया, ‘नीट-यूजी परीक्षा पूरे भारत में होने वाली सबसे बड़ी ऑफलाइन परीक्षा है, जिसमें 22 लाख से ज़्यादा छात्र शामिल होते हैं. इसलिए जहां भी सेना हमारी मदद कर सकती है, हम लॉजिस्टिक्स के मामले में उनकी मदद लेंगे.’

उन्होंने आगे कहा कि परीक्षा के लिए अब बहुत कम समय बचा है, ऐसे में वायु सेना बारिश, तूफ़ान जैसी खराब मौसम की स्थितियों में प्रश्न पत्र पहुंचाने में हमारी मदद कर सकती है. सिर्फ़ सेना ही नहीं, बल्कि गृह मंत्रालय, राज्य सरकारें, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, डाक विभाग, नागरिक उड्डयन और विदेश मंत्रालय भी 21 जून को दोबारा परीक्षा करवाने में हमारी मदद कर रहे हैं. हम यह पक्का करना चाहते हैं कि परीक्षा बिना किसी गलती के और सुचारू रूप से हो.’

अधिकारी ने बताया कि सशस्त्र बलों की भूमिका केवल लॉजिस्टिक्स समन्वय, सुरक्षित परिवहन और मौसम की गड़बड़ियों से जुड़ी आपातकालीन स्थितियों तक ही सीमित रहेगी- परीक्षा की निगरानी सेना द्वारा नहीं की जाएगी.

हालांकि, रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने इस पर आधिकारिक तौर से टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

उल्लेखनीय है कि अगर इस प्रस्ताव को मंज़ूरी मिल जाती है, तो यह पहली बार होगा जब सेना किसी राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा से जुड़े लॉजिस्टिक्स में औपचारिक रूप से शामिल होगी.

ज्ञात हो कि भारतीय सशस्त्र बलों को आपदा, बचाव अभियान और मानवीय आपात स्थितियों के दौरान शासन-प्रशासन द्वारा नियमित रूप से बुलाया जाता है. हालांकि अब तक के इतिहास में देश के भीतर कभी किसी परीक्षा के लिए सेना की मदद नहीं ली गई है, इसलिए अगर इस बार ऐसा कुछ होता है, तो यह मोदी सरकार के कार्यकाल में अपूतपूर्व ही होगा.

आलोचना

सरकार के सूत्रों से बाहर आ रही इन खबरों को लेकर सोशल मीडिया पर राजनेताओं समेत आम यूजर्स ने सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि क्या देश के भीतर सेना को छोड़कर बाकी सभी सिस्टम निष्क्रिय हो गए हैं, जो अब परीक्षा की हिफ़ाज़त का काम भी सरहद की हिफ़ाज़त करने वाली सेना से लिया जा रहा है.

इस संबंध में पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने तंज कसते हुए कहा कि आंसर शीट को परीक्षा केंद्रों से उठाने, उसे ओएसएम सर्वर पर अपलोड करने के लिए भारतीय नौसेना की सबमरीन को दे देना चाहिए.

प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, ‘क्रोनोलॉजी समझिए, आर्मी प्रिंटिंग सेंटर से नीट परीक्षा के  पेपर उठाएगी. सेना की बुलेट प्रूफ गाड़ियां उन्हें नजदीकी एयरबेस तक लेकर जाएंगी. भारतीय वायुसेना इन प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों पर तक पहुंचाएगी. आंसर शीट को परीक्षा केंद्रों से उठाने, उसे ओएसएम सर्वर पर अपलोड करने के लिए नेवी सबमरीन का इस्तेमाल कीजिए. जय हो सरकार.’

वहीं, कांग्रेस नेता श्रीनिवास बीवी ने लिखा, ‘अगर एक परीक्षा कराने के लिए सेना का इस्तेमाल करना पड़े तो समझ जाइये पूरा सिस्टम बिक चुका है.’

एक यूजर ने लिखा, ‘जब किसी परीक्षा की निगरानी प्रधानमंत्री जी को खुद करनी पड़े तो शिक्षक मंत्रालय का क्या काम बंद कीजिए शिक्षा मंत्रालय देश के लोगों की मेहनत का पैसा बर्बाद मत करो .’

इलस्ट्रेटर आशीष बागची ने लिखा, ‘मुझे भरोसा है कि रक्षा मंत्री परीक्षा पेपर को लीक होने से बचाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएंगे.’

एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘अगर नीट के आयोजन के लिए सेना और भारतीय वायु सेना की ज़रूरत पड़ती है, तो क्या हम असल में यह मान रहे हैं कि उस स्तर से नीचे के सभी तंत्र जनता का भरोसा जीतने में नाकाम रहे हैं?’

मालूम हो कि सीबीआई, जो नीट में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है, ने पेपर लीक के सिलसिले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.