नई दिल्ली: वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ न्यूज़ पब्लिशर्स (डब्ल्यूएएन-आईएफआरए) ने घोषणा की है कि तबाही के बीच दिखाए गए साहस की का परिचय देने वाले गाज़ा में काम कर रहे पेशेवर फोटो और वीडियो पत्रकारों को 2026 का ‘गोल्डन पेन ऑफ फ्रीडम’ अवॉर्ड दिया जाएगा. यह अवॉर्ड सोमवार (1 जून, 2026) को फ़्रांस के मार्सिले शहर में होने वाले ‘वर्ल्ड न्यूज़ मीडिया कांग्रेस’ के उद्घाटन समारोह के दौरान दिया जाएगा.
‘गोल्डन पेन ऑफ फ्रीडम’ डब्ल्यूएएन-आईएफआरए वार्षिक प्रेस स्वंतत्रता सम्मान है, जो उन लोगों या संस्थाओं को दिया जाता है जिन्होंने प्रेस की आज़ादी की रक्षा करने और उसे बढ़ावा देने में बेहतरीन योगदान दिया है. इस साल, यह अवॉर्ड उन फ़िलिस्तीनी फोटोग्राफरों और वीडियोग्राफरों को दिया जा रहा है जो तीन बड़ी इंटरनेशनल न्यूज़ एजेंसियों– एजेंसी फ्रेंच प्रेस (एएफपी), द एसोसिएटेड प्रेस (एपी), और रॉयटर्स- से जुड़े हैं. इन लोगों ने बेहद मुश्किल और खतरनाक हालात में भी पेशेवर तरीक़े से रिपोर्टिंग करना जारी रखा है.
अवॉर्ड के प्रशस्ति-पत्र में कहा गया है, ‘पिछले ढाई साल से भी ज़्यादा समय से गाज़ा के पत्रकार मौत, तबाही और मानवीय पीड़ा को ऐसे तरीक़े से रिकॉर्ड कर रहे हैं जिसकी कोई मिसाल नहीं है.’ यह अवॉर्ड खास तौर पर ‘युद्ध क्षेत्र में रहने और काम करने वाले स्थानीय फ़िलिस्तीनी मीडिया पेशेवरों के बलिदान, धैर्य और सहनशक्ति’ को सम्मानित करता है.
फ्रांस 24 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एएफपी के फोटोग्राफर मोहम्मद आबेद – जिन्होंने अप्रैल 2024 तक गाज़ा में काम किया और उसके बाद काहिरा ब्यूरो में शामिल हो गए – उन लोगों में से एक होंगे जो फ़्रांस के मार्सिले शहर में होने वाले इस समारोह में शामिल होंगे.
गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को संघर्ष बढ़ने के बाद से गाज़ा पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक जगहों में से एक बन गया है. स्थानीय मीडियाकर्मियों ने अक्सर उन सुरक्षा व्यवस्थाओं के बिना काम किया है जो आमतौर पर इंटरनेशनल रिपोर्टरों को मिलते हैं. कई पत्रकारों ने अपने साथियों, परिवार के सदस्यों और घरों को खो दिया है, फिर भी वे अपने आसपास घट रही घटनाओं को रिकॉर्ड करना जारी रखे हुए हैं.
युद्ध शुरू होने के बाद से इज़रायली सरकार ने विदेशी पत्रकारों को इस नाकाबंदी वाले इलाके में स्वतंत्र रूप से प्रवेश पर रोक दिया है, इसलिए गाज़ा के स्थानीय पत्रकार दुनिया भर की न्यूज़ एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे उनकी रिपोर्टें विश्वसनीयता और व्यापक पहुंच के साथ दुनिया भर के लोगों तक पहुंच सकी हैं.
हालांकि, युद्ध की अव्यवस्था के कारण मृतकों की सटीक संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं, फिर भी मीडिया निगरानी संगठनों की रिपोर्ट्स में दर्जनों पत्रकारों और मीडिया कर्मियों की मौत दर्ज की गई है. इनमें से कई लोगों की मौत ऐसे हालात में हुई है जिनसे यह गंभीर सवाल उठता है कि क्या उन्हें जानबूझकर निशाना बनाकर मारा गया था.
इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (आईएफजे) के अनुसार, अक्टूबर 2023 से अब तक कम से कम 262 पत्रकार और मीडियाकर्मी मारे गए हैं; यह आंकड़ा कुल पत्रकार समुदाय का दस प्रतिशत से भी अधिक है – जो किसी भी अन्य पेशेवर समूह की तुलना में कहीं ज़्यादा मृत्यु दर को दर्शाता है.
