मालवीय नगर अग्निकांड: कोर्ट के आदेशों की अनदेखी, नियमों का उल्लंघन

दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर में एक इमारत में लगी आग से क़रीब पांच महीने पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने सूबे के अधिकारियों से राजधानी के सभी होटलों, रेस्तरां और अन्य हॉस्पिटैलिटी संस्थानों में आग से सुरक्षा के नियमों से जुड़ी चिंताओं को तत्काल दूर करने के लिए कहा था. अब जांच में सामने आया है कि जिस 'फ्लरिश बी एंड बी' में आग लगी, वहां कई नियमों का उल्लंघन किया जा रहा था.

मालवीय नगर की इमारत, जिसमें आग लगी थी. (फोटो: श्रुति शर्मा/ द वायर)

नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में बुधवार (3 जून) को एक इमारत में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत हो गई. इस घटना से लगभग पांच महीने पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली के अधिकारियों से राजधानी के सभी होटलों, रेस्तरां और अन्य हॉस्पिटैलिटी संस्थानों में आग से सुरक्षा के नियमों से जुड़ी चिंताओं को तत्काल दूर करने के लिए कहा था.

हालांकि, मालवीय नगर के ‘फ्लरिश स्टेज बी एंड बी’ में लगी आग की जांच में पता चला है कि यह कई नियमों का उल्लंघन करते हुए चल रहा था, जिसमें बिना अनुमति के निर्माण, आग से बचाव के अपर्याप्त इंतज़ाम और आने-जाने के लिए सिर्फ़ एक सीढ़ी का होना शामिल है.

मालूम हो कि यह बी एंड बी मालवीय नगर के हौज़ रानी इलाके में स्थित है. पुलिस ने बताया कि इस होटल को छह कमरों की अनुमति मिली थी, लेकिन इसे गैर-कानूनी तरीके से बढ़ाकर 25 कमरों वाला होटल बना दिया गया था.

इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने होटल के मालिक लवकेश बजाज को हिरासत में ले लिया है; बताया जा रहा है कि वह अधिकारियों से बचने की कोशिश कर रहे थे.

पुलिस के अनुसार, लवकेश बजाज की इस इलाके में दो अन्य प्रॉपर्टी भी हैं, जिनकी सुरक्षा और नियमों के उल्लंघन को लेकर अब जांच चल रही है.

बुधवार को सामने आई इस दुखद घटना के मृतकों में नौ अफ्रीकी नागरिक और दो तुर्कमेनिस्तान के नागरिक शामिल थे. बाकी कई लोग भारतीय थे. बताया जा रहा है कि अभी मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि अस्पताल में भ्रती कई घायल लोगों की हालत गंभीर है.

आग से सुरक्षा संबंधी नियमों का उल्लंघन

मालवीय नगर के बी एंड बी में लगी आग ने दिल्ली में नियम-कानून के पालन में मौजूद गंभीर कमियों को उजागर कर दिया है. पिछले पांच महीनों में राष्ट्रीय राजधानी में आग लगने की 20 से ज़्यादा घटनाएं हुई हैं, जिनमें 89 लोगों की जान चली गई है.

इस संबंध में 7 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम और नई दिल्ली नगर निगम को निर्देश दिया था कि वे आग से सुरक्षा के नियमों को लागू करने के लिए ‘तेज़ी से’ एक कार्य योजना तैयार करें.

हालांकि, इस मामले से जुड़े वकील ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि संबंधित अधिकारियों ने अभी तक इस आदेश का पालन नहीं किया है.

यह याचिका 6 दिसंबर, 2025 को गोवा के एक नाइटक्लब में लगी आग की घटना के बाद दायर की गई थी.

वहीं, टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार पूछताछ के दौरान बी एंड बी के लवकेश बजाज ने पुलिस अधिकारियों को यह भी बताया कि दिल्ली अग्निशमन सेवा नियम, 2010 के नियम 27 के तहत 15 मीटर से कम ऊंची किसी भी आवासीय इमारत के लिए ‘अग्नि अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (फायर एनओसी) की आवश्यकता नहीं होती है.

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि इमारत में ढांचागत बदलाव- जिसमें विस्तार और अन्य संशोधन शामिल हैं, किसी अन्य व्यक्ति ने सुझाए थे; उस व्यक्ति ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि इस तरह की व्यवस्थाएं ‘सामान्य’ (routine) हैं और ‘दिल्ली में सब कुछ चलता है.’

इस घटना के सामने आने के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार ने पूरे शहर में विभिन्न प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा नियमों के पालन की जांच करने के निर्देश दिए हैं.

नई नीतियों से कोई मदद नहीं मिलती

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, 27 मई को दिल्ली सरकार ने एक नया फायर सेफ्टी फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया था. इसके तहत बिल्डिंग मालिक दिल्ली फायर सर्विसेज़ (डीएफएस) के इंस्पेक्शन पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय, प्राइवेट फायर ऑडिटर्स के ज़रिए फायर क्लीयरेंस हासिल कर सकेंगे – पॉलिसी के मुताबिक, इन ऑडिटर्स को पैनल में शामिल किया जाएगा.

जहां सरकार का तर्क है कि इससे क्लीयरेंस प्रक्रिया में देरी कम होगी और काम करने की क्षमता बढ़ेगी. वहीं, विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस कदम से इस व्यवस्था की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है.

इसके अलावा, सरकार ने ‘बेड एंड ब्रेकफ़ास्ट पॉलिसी 2026’ का एक ड्राफ़्ट भी जारी किया है. इस पॉलिसी के तहत आठ कमरों और 16 बिस्तरों तक वाली रिहायशी प्रॉपर्टीज़ को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और सेल्फ़-सर्टिफ़िकेशन के आधार पर बी एंड बी यूनिट के तौर पर चलाने की अनुमति दी जाएगी.

साल 2007 में लागू मौजूदा ‘बेड एंड ब्रेकफ़ास्ट’ फ्रेमवर्क में मंज़ूरी देने से पहले इंस्पेक्शन और विभागीय जांच-पड़ताल पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाता था, हालांकि उस समय भी इन नियमों का अक्सर उल्लंघन होता था.

इस संबंध में शहरी योजनाकार और राहगीरी फ़ाउंडेशन की संस्थापक ट्रस्टी सारिका पांडा ने अख़बार को बताया, ‘एक ऐसा शहर जहां बिना मंज़ूरी के अक्सर अवैध मंज़िलें बना ली जाती हैं और रिहायशी इमारतों को कमर्शियल इमारतों में बदल दिया जाता है, वहां सिर्फ़ आसान सर्टिफ़िकेशन की नहीं, बल्कि ज़्यादा सख़्त निगरानी की ज़रूरत है.’

आग से बचाव के काम में कमियां

मालवीय नगर में बुधवार सुबह करीब 8.30 बजे आग लगी, तब सबसे पहले स्थानीय लोग ही मदद के लिए आगे आए. हालांकि, जब तक बचाव दल के  अधिकारी पहुंचे, तब तक आग कई मंज़िलों तक फैल चुकी थी.

न्यूज़लॉन्ड्री ने फरवरी 2026 की अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि डीएफएस के डेटा के अनुसार, स्टेशन अधिकारियों (एसटीओ) के लिए मंज़ूर 90 पदों में से 72 पद खाली थे, और सब-अधिकारियों (जो एसटीओ के बाद अगले क्रम पर होते हैं) के लिए मंज़ूर 172 पदों में से 61 पद खाली थे.

भर्ती नियमों के अनुसार, रिपोर्ट में बताया गया कि इन पदों में से आधे पद सीधी भर्ती के ज़रिए भरे जाने हैं, जबकि बाकी आधे पद विभाग के भीतर ही पदोन्नति पाने वालों के लिए आरक्षित हैं.

निचले पदों के लिए रिक्तियों की संख्या और भी चौंकाने वाली थी; 422 स्वीकृत ‘लीडिंग फायरमैन’ पदों में से 246 पद खाली थे – यानी 58%. ‘फायरमैन’ के मामले में, 2,367 स्वीकृत पदों में से, जो सीधी भर्ती के ज़रिए भरे जाते हैं, 320 पद (यानी 13.5%) खाली थे.