देश में गिग वर्कर्स पर मौसम और सड़क हादसों का ख़तरा, ज़्यादातर के पास स्वास्थ्य बीमा नहीं: रिपोर्ट

श्रमिक अधिकार संगठन जनपहल और गिग वर्कर्स एसोसिएशन द्वारा किए सर्वे में सामने आया है कि देश में गिग वर्कर्स को अत्यधिक गर्मी, सड़क हादसों और अन्य कामकाजी जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है. सर्वेक्षण के मुताबिक, 62.2% के पास स्वास्थ्य बीमा नहीं है और आधे वर्कर्स ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत नहीं हैं.

(इलस्ट्रेशन: द वायर)

नई दिल्ली: भारत में ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए काम करने वाले गिग वर्कर्स को खराब मौसम, सड़क हादसों और काम से जुड़े अन्य सुरक्षा जोखिमों का लगातार सामना करना पड़ता है. इसके बावजूद बड़ी संख्या में वर्कर्स के पास स्वास्थ्य या दुर्घटना बीमा नहीं है और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा प्रशिक्षण भी नहीं मिलता है. यह जानकारी एक नए राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में सामने आई है.

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रमिक अधिकार संगठन जनपहल और गिग वर्कर्स एसोसिएशन (GigWA) की ओर से किए गए इस सर्वेक्षण को गुरुवार (3 सितंबर )को जारी किया गया. सर्वेक्षण में अत्यधिक गर्मी को गिग वर्कर्स के सामने मौजूद सबसे व्यापक जोखिम बताया गया है.

सर्वेक्षण में अत्यधिक मौसम में काम करने वाले 778 वर्कर्स को शामिल किया गया. इनमें से 96.57% ने कहा कि गर्मी ने उनकी काम करने की क्षमता को प्रभावित किया है.

वहीं, 75.5% वर्कर्स ने बताया कि गर्मी का उनकी उत्पादकता और सुरक्षा पर मध्यम से गंभीर असर पड़ा. वर्कर्स ने थकान, शरीर में पानी की कमी और अत्यधिक गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का भी जिक्र किया.

रिपोर्ट के मुताबिक, 62.2% वर्कर्स के पास स्वास्थ्य बीमा नहीं है, जबकि 44.2% के पास दुर्घटना बीमा भी नहीं है.

सड़क हादसों का भी बड़ा खतरा

गिग वर्कर्स के लिए सड़क सुरक्षा एक प्रमुख चिंता के रूप में सामने आई है. सर्वेक्षण में शामिल 62.2% वर्कर्स ने बताया कि वे कभी न कभी वाहन से टकराने जैसी स्थिति यानी ‘नियर मिस’ का सामना कर चुके हैं. वहीं, 38% वर्कर्स सड़क की खराब परिस्थितियों के कारण घायल हुए और 27.5% ने यातायात दुर्घटना का सामना करने की बात कही.

सर्वेक्षण के अनुसार, करीब 66.4% वर्कर्स काम के लिए अपनी स्कूटर या मोटरसाइकिल का इस्तेमाल करते हैं. दुर्घटना बीमा का दावा करने वाले 80% से अधिक वर्कर्स ने कहा कि उन्हें क्लेम की प्रक्रिया मुश्किल लगी.

यह सर्वेक्षण देश के 10 शहरों में 1,000 प्लेटफॉर्म वर्कर्स के बीच किया गया.

सुरक्षा प्रशिक्षण से भी बड़ी संख्या में वर्कर्स वंचित

रिपोर्ट में कहा गया है कि काम से जुड़े जोखिमों की जिम्मेदारी काफी हद तक खुद वर्कर्स पर डाल दी गई है, जबकि प्लेटफॉर्म कंपनियों की ओर से संस्थागत सहायता और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ाव सीमित है.

सर्वेक्षण में 59.3% वर्कर्स ने कहा कि उन्हें प्लेटफॉर्म की ओर से कोई सुरक्षा प्रशिक्षण या सुरक्षा संबंधी संसाधन नहीं दिए गए. वहीं, 23.4% ने कहा कि उन्हें दिया गया प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं था.

केवल 7.5% वर्कर्स ने बताया कि उन्हें व्यापक सुरक्षा प्रशिक्षण या जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए गए.

आधे वर्कर्स ई-श्रम पोर्टल से बाहर

गौरतलब है कि सर्वेक्षण की एक और अहम चिंता यह है कि इसमें शामिल करीब 50% वर्कर्स ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत नहीं थे. रिपोर्ट के मुताबिक, इसका मतलब है कि प्लेटफॉर्म वर्कर्स का एक बड़ा हिस्सा औपचारिक पहचान और सामाजिक सुरक्षा के जरूरी लाभों से बाहर है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ई-श्रम पर पंजीकरण नहीं होने के कारण कई वर्कर्स प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत दुर्घटना बीमा जैसे लाभों से वंचित रह सकते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को स्पष्ट रूप से इसके दायरे में शामिल किया गया है. ऐसे में ई-श्रम जैसे औपचारिक पंजीकरण तंत्र से बाहर रहना इन वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा तक पहुंच को और सीमित कर सकता है.