दिल्ली विश्वविद्यालय के आर्ट्स फैकल्टी में आयोजित ‘समता उत्सव’ के दौरान इतिहासकार प्रो. एस. इरफ़ान हबीब पर पानी और कूड़ेदान फेंके जाने की घटना सामने आई है. वामपंथी छात्र संगठन आइसा ने आरोप लगाया है कि हमला एबीवीपी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने किया. एबीवीपी ने आरोपों को झूठा बताया है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के नेता विभिन्न विधानसभा चुनावों से पूर्व 'घुसपैठियों' को निकालने के दावे कर चुके हैं. बीते दिनों असम में अमित शाह ने ‘64 लाख घुसपैठियों’ के क़ब्ज़े का दावा किया, हालांकि इस बारे में गृह मंत्रालय का जवाब गंभीर सवाल खड़े करता है. एक आरटीआई आवेदन के जवाब में मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि उसके पास घुसपैठियों से जुड़ा कोई समेकित आंकड़ा नहीं है.
एक आरटीआई के जवाब से पता चला है कि ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के पास बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है. उच्चायोग ने जो आंकड़े दिए हैं, वे एक ग़ैर-सरकारी संगठन से लिए गए हैं, जिससे भारत सरकार की निगरानी और दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू कामगारों के न्यूनतम वेतन पर राज्यों से विचार का आग्रह किया, लेकिन निर्देश देने से इनकार कर दिया. सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की ट्रेड यूनियनों और न्यूनतम मजदूरी पर टिप्पणियों ने अर्थशास्त्रियों, श्रमिक संगठनों और नागरिक अधिकार समूहों में तीखी असहमति और बहस को जन्म दिया है.
गुजरात के सूरत के सलाबतपुरा इलाके में भाजपा कारपोरेटर पर फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर सैकड़ों मुस्लिम मतदाताओं को ‘मृत’ घोषित कर नाम कटवाने का आरोप लगा है. स्थानीय लोगों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कर कार्रवाई और जांच की मांग की है.
पीएम मोदी की घाना यात्रा: पहले सरकारी ख़र्च से इनकार के बाद मंत्रालय ने स्वीकारा- 4.69 करोड़ ख़र्चे गए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जुलाई 2025 में की गई घाना यात्रा पर हुए ख़र्च को लेकर विदेश मंत्रालय ने 63 दिनों में अपना रुख़ बदल दिया. पहले ‘राजकीय अतिथि’ का हवाला देकर कोई पैसा ख़र्च होने से इनकार किया गया था, मगर फिर एक आरटीआई अपील के बाद मंत्रालय ने स्वीकार किया कि इस यात्रा पर 4.69 करोड़ रुपये ख़र्च हुआ था.
साक्षात्कार: केंद्र सरकार 4 फरवरी को लद्दाख के प्रमुख संगठनों से बातचीत करने जा रही है. सितंबर 2025 की हिंसा के बाद बदले हालात में लेह एपेक्स बॉडी और केडीए साझा मसौदे के साथ बैठक में शामिल होंगे. द वायर हिंदी से बातचीत में केडीए संयोजक सज्जाद करगिली कहते हैं कि केंद्र शासित प्रदेश का मॉडल विफल हो चुका है और लद्दाख को पूर्ण लोकतांत्रिक अधिकार चाहिए.
योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयानों व आयोजनों के ज़रिये ‘अखंड भारत’ की अवधारणा को नए सिरे से सार्वजनिक किया जा रहा है. इतिहासकार इसे तथ्यहीन और राजनीतिक नारा बताते हैं, जो हिंदुत्व की वैचारिक परियोजना, इतिहास की पुनर्व्याख्या और धार्मिक राष्ट्रवाद से गहराई से जुड़ा है.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत सरकार ने 32 देशों में सात बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने पर 13 करोड़ रुपये से अधिक ख़र्च किए. लेकिन सवाल यह है कि क्या इस महंगे कूटनीतिक अभियान से भारत को कोई ठोस अंतरराष्ट्रीय समर्थन या रणनीतिक लाभ मिला?
सरकार ने ई20 पेट्रोल के प्रचार पर करदाताओं का पैसा ख़र्च किया है या नहीं- इस बारे में आरटीआई के ज़रिये जानकारी मांगी गई, पर सरकार ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया. सरकारी तेल कंपनियों ने एक ही तरह के सवालों पर अलग जवाब दिए. जहां भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने ‘व्यावसायिक गोपनीयता’ का हवाला देकर जानकारी नहीं दी, वहीं इंडियन ऑयल ने कहा कि ‘मांगी गई जानकारी काल्पनिक प्रकृति की है.’
छत्तीसगढ़ सरकार ने स्थापना दिवस के प्रचार पर क़रीब 6 करोड़ 90 लाख रुपये ख़र्च किए, जबकि राज्य के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों का वार्षिक फंड लगभग 64 प्रतिशत घटा दिया गया है. स्कूलों के सामने बिजली बिल चुकाने समेत बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो गया है.
विश्व हिंदू परिषद ने ‘सांस्कृतिक सजगता’ के नाम पर हिंदुओं से क्रिसमस न मनाने की अपील की है. क़ानून के जानकारों का कहना है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान की प्रस्तावना में निहित बंधुत्व के सिद्धांत के विरुद्ध है.
भारतीय फिल्म एवं टेलीविज़न संस्थान (एफटीआईआई), ईटानगर का पहला बैच अधूरे कैंपस, बुनियादी ढांचे की कमी और प्रशासनिक अव्यवस्था के खिलाफ तीसरी बार शैक्षणिक हड़ताल पर है. छात्रों का कहना है कि संस्थान वादों पर खरा नहीं उतरा और वे तब तक कक्षाओं में नहीं लौटेंगे, जब तक सभी आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं.
नेशनल कैम्पेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर द्वारा जारी नई रिपोर्ट बताती है कि भारत में बंधुआ मज़दूरी आज भी गहराई से जाति आधारित शोषण पर टिकी है. रिपोर्ट बताती है कि बचाए गए 950 बंधुआ मज़दूरों में एक भी सवर्ण समुदाय से नहीं था. इसी तरह 80% मामलों में एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई. पुनर्वास, मुआवजा और क़ानूनी कार्रवाई- तीनों मोर्चों पर हालात बेहद ख़राब हैं.
कांग्रेस की विफलता को इस तरह देखिए कि पार्टी ने इस साल दलित नेता राजेश कुमार को बिहार का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी दलित हैं. ये दोनों मिलकर बिहार के दलित समुदाय को अपनी ओर ला सकते थे, लेकिन पार्टी का चुनाव प्रचार पूरी तरह राहुल गांधी के इर्द-गिर्द घूमता रहा.