देशभर में लाखों खाद्य नमूनों की जांच के बावजूद लाइसेंस रद्द करने जैसे कड़े कदमों में गिरावट दर्ज हुई है. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि उल्लंघन लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई कमज़ोर होती जा रही है. इससे खाद्य सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.
ग्राउंड रिपोर्ट: ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के हमलों के बाद प्रभावित हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (समुद्री मार्ग) के बीच दिल्ली के कई इलाकों में घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बुकिंग नहीं हो रही, डिलिवरी में देरी है और कई जगह कालाबाजारी के मामले मिल रहे हैं, जबकि सरकार एलपीजी की किल्लत से इनकार कर रही है.
नई दिल्ली में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने ‘घर वापसी’ को वैचारिक युद्ध बताया. उन्होंने मुस्लिम शासनकाल में बाल विवाह और पर्दा प्रथा को ‘महिलाओं की सुरक्षा’ से जोड़ा.
दिल्ली विश्वविद्यालय के आर्ट्स फैकल्टी में आयोजित ‘समता उत्सव’ के दौरान इतिहासकार प्रो. एस. इरफ़ान हबीब पर पानी और कूड़ेदान फेंके जाने की घटना सामने आई है. वामपंथी छात्र संगठन आइसा ने आरोप लगाया है कि हमला एबीवीपी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने किया. एबीवीपी ने आरोपों को झूठा बताया है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के नेता विभिन्न विधानसभा चुनावों से पूर्व 'घुसपैठियों' को निकालने के दावे कर चुके हैं. बीते दिनों असम में अमित शाह ने ‘64 लाख घुसपैठियों’ के क़ब्ज़े का दावा किया, हालांकि इस बारे में गृह मंत्रालय का जवाब गंभीर सवाल खड़े करता है. एक आरटीआई आवेदन के जवाब में मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि उसके पास घुसपैठियों से जुड़ा कोई समेकित आंकड़ा नहीं है.
एक आरटीआई के जवाब से पता चला है कि ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के पास बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है. उच्चायोग ने जो आंकड़े दिए हैं, वे एक ग़ैर-सरकारी संगठन से लिए गए हैं, जिससे भारत सरकार की निगरानी और दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू कामगारों के न्यूनतम वेतन पर राज्यों से विचार का आग्रह किया, लेकिन निर्देश देने से इनकार कर दिया. सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की ट्रेड यूनियनों और न्यूनतम मजदूरी पर टिप्पणियों ने अर्थशास्त्रियों, श्रमिक संगठनों और नागरिक अधिकार समूहों में तीखी असहमति और बहस को जन्म दिया है.
गुजरात के सूरत के सलाबतपुरा इलाके में भाजपा कारपोरेटर पर फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर सैकड़ों मुस्लिम मतदाताओं को ‘मृत’ घोषित कर नाम कटवाने का आरोप लगा है. स्थानीय लोगों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कर कार्रवाई और जांच की मांग की है.
पीएम मोदी की घाना यात्रा: पहले सरकारी ख़र्च से इनकार के बाद मंत्रालय ने स्वीकारा- 4.69 करोड़ ख़र्चे गए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जुलाई 2025 में की गई घाना यात्रा पर हुए ख़र्च को लेकर विदेश मंत्रालय ने 63 दिनों में अपना रुख़ बदल दिया. पहले ‘राजकीय अतिथि’ का हवाला देकर कोई पैसा ख़र्च होने से इनकार किया गया था, मगर फिर एक आरटीआई अपील के बाद मंत्रालय ने स्वीकार किया कि इस यात्रा पर 4.69 करोड़ रुपये ख़र्च हुआ था.
साक्षात्कार: केंद्र सरकार 4 फरवरी को लद्दाख के प्रमुख संगठनों से बातचीत करने जा रही है. सितंबर 2025 की हिंसा के बाद बदले हालात में लेह एपेक्स बॉडी और केडीए साझा मसौदे के साथ बैठक में शामिल होंगे. द वायर हिंदी से बातचीत में केडीए संयोजक सज्जाद करगिली कहते हैं कि केंद्र शासित प्रदेश का मॉडल विफल हो चुका है और लद्दाख को पूर्ण लोकतांत्रिक अधिकार चाहिए.
योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयानों व आयोजनों के ज़रिये ‘अखंड भारत’ की अवधारणा को नए सिरे से सार्वजनिक किया जा रहा है. इतिहासकार इसे तथ्यहीन और राजनीतिक नारा बताते हैं, जो हिंदुत्व की वैचारिक परियोजना, इतिहास की पुनर्व्याख्या और धार्मिक राष्ट्रवाद से गहराई से जुड़ा है.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत सरकार ने 32 देशों में सात बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने पर 13 करोड़ रुपये से अधिक ख़र्च किए. लेकिन सवाल यह है कि क्या इस महंगे कूटनीतिक अभियान से भारत को कोई ठोस अंतरराष्ट्रीय समर्थन या रणनीतिक लाभ मिला?
सरकार ने ई20 पेट्रोल के प्रचार पर करदाताओं का पैसा ख़र्च किया है या नहीं- इस बारे में आरटीआई के ज़रिये जानकारी मांगी गई, पर सरकार ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया. सरकारी तेल कंपनियों ने एक ही तरह के सवालों पर अलग जवाब दिए. जहां भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने ‘व्यावसायिक गोपनीयता’ का हवाला देकर जानकारी नहीं दी, वहीं इंडियन ऑयल ने कहा कि ‘मांगी गई जानकारी काल्पनिक प्रकृति की है.’
छत्तीसगढ़ सरकार ने स्थापना दिवस के प्रचार पर क़रीब 6 करोड़ 90 लाख रुपये ख़र्च किए, जबकि राज्य के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों का वार्षिक फंड लगभग 64 प्रतिशत घटा दिया गया है. स्कूलों के सामने बिजली बिल चुकाने समेत बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो गया है.
विश्व हिंदू परिषद ने ‘सांस्कृतिक सजगता’ के नाम पर हिंदुओं से क्रिसमस न मनाने की अपील की है. क़ानून के जानकारों का कहना है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान की प्रस्तावना में निहित बंधुत्व के सिद्धांत के विरुद्ध है.