भारतीय उद्योगपति रिसर्च में निवेश क्यों नहीं करते?

भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर क्या ग़लतफ़हमियां हैं? क्या सच में उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सरकारी फंड के बंटवारे में असमानता है?
क्यों हमारे देश में ऐसे अरबपति हैं जिन्होंने शोध और इनोवेशन में निवेश किया है? पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन और राजनीतिक वैज्ञानिक देवेश कपूर से उनकी नई किताब A Sixth of Humanity पर बात कर रहे हैं द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज.

लाज़्लो क्राज़्नाहोरकाई का रचनाकर्म: पूर्णविराम की तलाश

लाज़्लो क्राज़्नाहोरकाई के रचनात्मक अवदान का एक पहलू अगर उनके उपन्यास हैं, दूसरा है सिनेमा. लाज़्लो और बेला तार की फिल्में किसी फिल्मकार और उपन्यासकार की जुगलबंदी का श्रेष्ठतम उदाहरण हैं.

राजभाषा दिवस: हिंदी ने क्या खोया, क्या पाया?

हिंदी क्षेत्र राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा ताकतवर है. शिक्षा, सामाजिक विज्ञान और पत्रकारिता के क्षेत्र में इसकी यह शक्ति किस तरह दिखाई देती है? क्या इसका योगदान इसकी शक्ति के अनुरूप है? 14 सितंबर को राजभाषा दिवस के अवसर पर द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज की वरिष्ठ लेखक अशोक वाजपेयी और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद से बातचीत.

ऑपरेशन सिंदूर: भारत ने कितने लड़ाकू विमान खोए? भारत को क्या फायदा हुआ?

भारत-पाकिस्तान के संघर्ष में भारत ने कितने विमान खोए? इस कार्रवाई से भारत को क्या हासिल हुआ? क्या भारत को युद्ध की स्थिति में धकेला गया? ऑपरेशन सिंदूर के महीनेभर बाद सेंटर फॉर जॉइंट वॉर स्टडीज के महानिदेशक मेजर जनरल (रिटा.) अशोक कुमार से द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज की बातचीत.

सुलगता बस्तर: नक्सलियों का शांति प्रस्ताव

बीते दिनों नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी ने कहा है कि अगर सरकार नक्सलियों के ख़िलाफ़ चल रहे अभियानों को रोक देती है, तो वे बिना शर्त शांति वार्ता के लिए तैयार हैं. छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद के ख़िलाफ़ केंद्र सरकार के युद्ध, उसके सामाजिक नुकसान पर द वायर के पॉलिटिकल एडिटर अजॉय आशीर्वाद से चर्चा कर रहे हैं द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज.

ट्रंप का टैरिफ युद्ध: भारत की आर्थिक संप्रभुता को ख़तरा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर के देशों पर भारी टैरिफ लगा दिया है. इसका असर न केवल वैश्विक व्यापार पर बल्कि कई तरह की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है. भारत की अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव को लेकर द वायर के संस्थापक संपादक एमके वेणु से चर्चा कर रहे हैं द वायर के हिंदी संपादक आशुतोष भारद्वाज.

‘शहरी झुग्गियों में राजनीति की समझ कहीं ज़्यादा गहरी है’

ऐसा माना जाता है कि शहरी झुग्गियों में रहने वाले राजनीति को कम समझते हैं लेकिन ऐसा नहीं है. पलायन और शहरी झुग्गियों पर किताब लिखने वाले स्कॉलर तारिक थैचिल कहते हैं कि झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले नेताओं के मोहरे भर नहीं हैं. उनसे वायर हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज की बातचीत.

संघ भाजपा संबंधों में नई गरमाहट?

संघ भाजपा के रिश्तों ने पिछले एक साल में उतार-चढ़ाव देखा है. 2024 के लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद से भाजपा संघ की खुलकर प्रशंसा करती नज़र आ रही है. हाल ही नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार संघ मुख्यालय पहुंचे. क्या संघ बदल रहा है? संघ भाजपा की समीकरण पर वरिष्ठ पत्रकारों- राहुल देव और धीरेंद्र झा से आशुतोष भारद्वाज का संवाद.

सिनेमा, कॉमेडी, ज़िंदगी…

वरुण ग्रोवर को गीतकार, पटकथा लेखक और स्टैंडअप कॉमिक के बतौर जाना जाता है. हालांकि बीते दिनों उन्होंने डायरेक्टर के तौर पर अपनी नई पहचान बनाई है. इसके अलावा वह बाल साहित्य भी लिखते हैं. उनसे द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज का संवाद.

कथावाचक इतिहासकार: रामचंद्र गुहा का अनूठा सृजन-संसार

रामचंद्र गुहा के हालिया प्रकाशित निबंध संकलन, 'शताब्दी के झरोखे से', की भूमिका में आशुतोष भारद्वाज लिखते हैं कि वे किसी कथावाचक की दृष्टि से इतिहास लिखते हैं. उनके प्रिय शीर्षक को थोड़ा फेर कर कहें, वे ‘इतिहासकारों के बीच स्थित उपन्यासकार’ हैं.

फिल्मों के बारे में ऐसी बातें जो कोई नहीं करता

वीडियो: फिल्मकार अनुभव सिन्हा मुंबई को क्रूर भी मानते हैं और बहुत कुछ देने वाला भी. उनके एक छोटे शहर से बम्बई तक के सफर, फिल्म थिएटर से ओटीटी मंच तक की यात्रा, सिनेमा, कला और उनके तजुर्बों को लेकर उनसे द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज की बातचीत.

क्या ह्वाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी पश्चिम के लिए ख़तरा है?

वीडियो: डोनाल्ड ट्रंप की वापसी यूरोप और पश्चिमी दुनिया के लिए गंभीर ख़तरा बन गई है. ऐसे में कभी अमेरिका की रहनुमाई में चलने वाली वैश्विक व्यवस्था के लिए आने वाली चुनौतियां क्या होंगी, इस बारे में बता रहे हैं द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज.

डायरी की दुनिया: कितनी सच्ची, कितनी फ़रेबी

वीडियो: साहित्यिक डायरी लेखन साहित्य की वो विधा है, जिसके बारे में माना जाता है कि यहां लेखक उन बातों साझा करता है जिन्हें उन्होंने दुनिया से छिपाया था. लेखक-पत्रकार अमिताव कुमार ने कोविड महामारी के बाद से कई ऐसे जर्नल्स में अपने अनुभव दर्ज किए हैं. उनसे द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज की बातचीत.

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