विरोध, न्याय और दया को उभारने वाला नए ज़माने का सिनेमा

हम सभी जिस नफ़रत, अन्याय और डर के ज़हरीले धुंध में घिरे हुए हैं, उसे चीरते हुए 2025 में कुछ बेहतरीन फिल्में आईं, जिन्होंने मानवता का संदेश दिया. इन फ़िल्मों ने अन्याय, दुख तथा विरोध का प्रतिकार किया और जोखिम उठाते हुए सच बोलने की हिम्मत दिखाई. प्रस्तुत है हर्ष मंदर की 2025 की पसंदीदा भारतीय फिल्में.

हमने क्या खोया: मनरेगा कार्यस्थल पर एक दिन काम करने से मैंने क्या सीखा

जब संसद ने एक ऐसा क़ानून ख़त्म कर दिया जो दस साल से ज़्यादा समय तक मज़दूरी करने वाले लोगों के संघर्षों का नतीजा था, तो मुझे उस समय की याद आ गई जब मुझे एक दिन मनरेगा कार्यस्थल पर ख़ुद काम करने का अनोखा अनुभव मिला था. उन कुछ घंटों ने मुझे यह समझने में मदद की कि दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम उन लाखों लोगों के लिए असल में क्या मायने रखता है, जो इसके अंतर्गत

संविधान, समाजवाद और नव-फ़ासीवाद: प्रभात पटनायक की किताब के बहाने भारत का विश्लेषण

प्रभात पटनायक की नई पुस्तक 'सोशलिज़्म एंड द इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन' के ज़रिए हर्ष मंदर भारत के उत्तर-औपनिवेशिक समाजवाद, नव-उदारवाद के संकट और नव-फ़ासीवाद के उभार का गहन विश्लेषण करते हैं. यह लेख संविधान में निहित समतावादी मूल्यों को पुनः हासिल करने की ज़रूरत पर ज़ोर देता है.

नेल्ली के पीड़ितों ने 42 साल इंतज़ार किया, लेकिन उन्हें अब भी इंसाफ़ नहीं मिला

नेल्ली के पीड़ितों का दर्द हमें याद दिलाता है कि जो लोग बड़े पैमाने पर हिंसा झेल चुके हैं, उनमें से कई लोग अब भी इंसाफ़ का इंतज़ार कर रहे हैं. लेकिन सरकार ने आज तक किसी को भी इस हद तक बेसहारा नहीं छोड़ा है, जैसा इन लोगों के साथ हुआ है.

रोहिंग्या मुसलमान जिन्हें भारतीय सत्ता ने समुद्र में फेंक दिया..

इस बरस भारत सरकार ने देश में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों को जबरन देश से बाहर करने के लिये उन्हें समुद्र में फेंक दिया. इस अमानवीय कृत्य की कथा कुछ बचे रह गये रोहिंग्या मुसलमानों ने हर्ष मंदर को सुनायी. पढ़िए इस त्रासदी की आपबीती...

शिक्षा जो मैंने हासिल की: वंचित और असहाय के प्रति करुणा सबसे बड़ा मूल्य है

कई दशक पहले हर्ष मंदर ने मध्य भारत के ग्रामीण तथा आदिवासी इलाक़ों में कई बरस प्रशासनिक अधिकारी बतौर काम किया था. इस संस्मरण में वे उन बरसों को याद करते हैं जब उन्होंने तमाम किस्म के आर्थिक स्वास्थ्य संकटों से जूझ रहे लोगों को क़रीब से देखा था, और दयालुता व करुणा के मूल्य को पहचाना था.

आखिरकार पूर्व न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने हिंदुत्व के प्रति अपनी निष्ठा साबित कर दी…

डीवाई चंद्रचूड़ का तर्क कि सैकड़ों वर्ष पहले बाबरी मस्जिद का निर्माण 'अपवित्र कृत्य' था, आरएसएस और भाजपा के हिंदुत्व के प्रति उनकी अडिग निष्ठा को दर्शाता है.

बम्बई ट्रेन धमाकों के बाद गिरफ़्तार हुए मुसलमान युवक की कथा: ‘पुलिस की यातना आजीवन याद रहेगी’

उस पत्नी के बारे में सोचिए जो अपने पति के लौटने का 19 साल तक इंतज़ार करती है. उस बेटी के बारे में सोचिए जो अपने पिता के जेल जाने के बाद पैदा हुई. उसने कभी अपने पिता का चेहरा नहीं देखा. वह पढ़ाई करके डॉक्टर या इंजीनियर बन सकती थी. लेकिन उसके पिता के जेल में होने के कारण, यह संभव नहीं था.

आतंक के झूठे आरोपों में अरसे तक जेल में बंद रिहा हुए मुस्लिम: लेकिन उनका खोया जीवन कौन लौटाएगा?

एक वक्त देश में कई आतंकी हमले हुए थे. हर हमले के बाद कुछ अपवादों को छोड़कर, मुस्लिम पुरुषों पर जघन्य आरोप लगाये गये और उन्हें सालों तक जेल में रखा गया. उनके परिवार ग़रीबी और अपमान में जीते रहे. और फिर ये मामले निराधार साबित होने लगे. अदालतों ने आरोपियों को निर्दोष घोषित कर दिया. लेकिन उनका खोया जीवन कौन लौटाएगा?

हिंदुत्व और भारतीय सिनेमा का नाज़ीकरण

मोदी युग का हिंदुत्व सिनेमा एक नया अवतार है. नाज़ी युग के सिनेमा की तरह, हिंदुत्व फ़िल्में न केवल अपनी कट्टरता को पूरी तरह से उजागर करती हैं, बल्कि उसका भौंडा प्रदर्शन भी करती हैं.

राजनीतिक इच्छाशक्ति से स्वास्थ्य सेवाओं में भ्रष्टाचार का निवारण संभव

डॉक्टर और दवाई की कंपनियों के गठजोड़ के कारण मरीज़ों को चिकित्सा सेवा के लिए बहुत अधिक ख़र्च वहन करना पड़ता है. मरीज़ दवा के लिए भुगतान करता है, लेकिन दवा के चुनाव पर उसका कोई नियंत्रण नहीं होता है.

बुनियादी स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था के अभाव में निजी क्षेत्र की लूट और शोषण का शिकार नागरिक

जब मरीज़ों की भलाई से अधिक लाभ को प्राथमिकता दी जाती है, तब स्वास्थ्य सेवा का क्षेत्र किसी भी तरह से धन पाने का व्यवसाय बन जाता है. इसी कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र का अपेक्षाकृत नेक व सेवा-उन्मुख पेशा पहले बाज़ार-आधारित वस्तु में बदला, और फिर कॉरपोरेट आधारित मुनाफ़ाख़ोरी उद्योग में बदल गया . 

राजनीति में भारतीय मुसलमान और उनके हितों की वकालत

भले ही मुसलमानों को उनकी जनसंख्या के बराबर अनुपात में संसद और राज्य विधानसभाओं में जगह मिल जाए, लेकिन यह अपने आप में उनके हितों के पर्याप्त प्रतिनिधित्व की गारंटी नहीं देता है.

भारतीय मुसलमानों का राजनीतिक सफ़ाया, द्वितीय श्रेणी का नागरिक जीवन

भारत के मुसलमानों को राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेल दिया जाना कोई आकस्मिक घटना नहीं है, हालांकि 2014 के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा के सत्ता में आने के बाद इसकी गति बहुत तेज़ हो गई है. आरएसएस और भाजपा की हिंदू बहुसंख्यक राजनीति ने भारत के मुसलमानों को देश की शासन व्यवस्था में भागीदारी से बाहर करने के उनके लक्ष्य के सबसे अधिक क़रीब पहुंचा दिया है.

अलीगढ़ लिंचिंग: दिल दहला देने वाली हिंसा, नफ़रत फ़ैलाने की राजनीतिक परियोजना

लिंचिंग के दौरान युवक डरे हुए निहत्थे लोगों पर हिंसक हमला करते हैं. यह देश का नेतृत्व करने वालों द्वारा फैलाई गई नफ़रत से प्रेरित उनकी क्रूरता की कहानी है. सनकी लोगों द्वारा जबरन वसूली की कहानी है. पुलिस के मिलीभगत की कहानी है. चुपचाप खड़े तमाशबीन की कहानी है.

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