एनआईए के मुकदमों से जुड़े वकील ‘दोषी याचिकाओं’ का खेल बखूबी समझते हैं

आतंकवाद के आरोपी अपने मुवक्किलों द्वारा दोषी याचिकाएं देने के बाद भी उनका पक्ष लेने को लेकर वकीलों के पास अलग-अलग कारण हैं, लेकिन वे सब इस बात पर सहमत हैं कि एनआईए ही इन याचिकाओं को बढ़ावा दे रही है और यहां तक कि उसके लिए दबाव भी बना रही है.

एल्गार परिषद: गिरफ़्तारी के करीब साढ़े पांच साल बाद सागर गोरखे, रमेश गायचोर को ज़मानत मिली

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एल्गार परिषद केस में गिरफ़्तार किए गए सांस्कृतिक कलाकार तथा कार्यकर्ता सागर गोरखे और रमेश गायचोर को ज़मानत दे दी. दोनों 2020 से मुंबई के तलोजा जेल में बंद हैं. इस रिहाई के आदेश के बाद अब गिरफ़्तार किए गए 16 लोगों में से केवल मानवाधिकार कार्यकर्ता सुरेंद्र गाडलिंग ही जेल में हैं.

भाजपा की आलोचना वाली पोस्ट के लिए हिरासत में लिए गए लंदन के डॉक्टर से दोबारा पूछताछ होगी

लंदन में रहने वाले डॉक्टर और लोकप्रिय यूट्यूबर संग्राम पाटिल, जो भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार की तीखी आलोचना के लिए जाने जाते हैं, को अपनी भारत यात्रा के दौरान मानहानि के मुकदमे से लेकर लुकआउट सर्कुलर जारी होने और यहां तक ​​कि हवाई अड्डे पर हिरासत में लिए जाने तक की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है.

बरसों तक ट्रायल नहीं, फिर जुर्म के कबूलनामे का प्रस्ताव: एक ही पटकथा को दोहराती एनआईए

एनआईए के प्रभावित करने वाले दोषसिद्धि आंकड़ों को लेकर कई आरोपियों, उनके वकीलों और यहां तक ​​कि एजेंसी से जुड़े रहे एक व्यक्ति ने द वायर से बात की और बताया कि क्यों एनआईए के इतने सारे मामले आरोपियों के कबूलनामों के साथ उन्हें दोषी मान लिए जाने के साथ ख़त्म होते हैं.

‘परफेक्ट’ नहीं एनआईए के दोषसिद्धि रिकॉर्ड, लंबी हिरासत के चलते बढ़ी है जुर्म कबूलने की प्रवृत्ति

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा 100% दोषसिद्धि दर का दावा करने के एक साल बाद द वायर की एक पड़ताल में सामने आया है कि लंबे समय तक हिरासत, ज़मानत न मिलने और जांचकर्ताओं के दबाव के कारण दर्जनों आरोपी, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम हैं, अपने मुक़दमे शुरू होने से पहले ही ख़ुद को दोषी मान लेने के लिए मजबूर हो रहे हैं.

एल्गार परिषद केस: बिना ट्रायल के जेल में पांच साल से अधिक रहने के बाद हेनी बाबू को ज़मानत मिली

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एल्गार परिषद केस में गिरफ़्तार किए गए दिल्ली यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर हेनी बाबू को मुकदमे में देरी के आधार पर ज़मानत दे दी. वह 28 जुलाई 2020 से मुंबई के तलोजा जेल में बंद हैं. एनआईए ने उनके ज़मानत का विरोध करते हुए आदेश पर रोक लगाने की मांग की. अदालत ने अनुरोध को ख़ारिज कर दिया.

दिल्ली विस्फोट के बाद पुलिस मुंबई हमले में बरी लोगों के घर पहुंची, वे बोले- तंग करने के तरीके ढूंढे जा रहे हैं

दिल्ली के लाल क़िला मेट्रो स्टेशन के पास हुए एक कार धमाके के कुछ ही घंटों बाद मुंबई पुलिस 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट मामले में बरी किए गए लोगों के घर पहुंची थी. हालांकि, पुलिस के पास इसके लिए कोई वैध अदालती दस्तावेज़ या कागज़ नहीं थे.

नागपुर: छह साल बाद बरी हुई आदिवासी महिला, जेल से निकलते ही पुलिस ने बिना नोटिस फिर पकड़ा

30 वर्षीय पार्वती संडमेक कथित माओवादी संबंध के मामले में छह साल जेल में बिताने और पांच केसों में बरी होने के बाद 30 अक्टूबर नागपुर केंद्रीय कारागार से रिहा हुई थीं. जैसे ही वह जेल से बाहर निकलीं, पुलिस की एक टीम बिना किसी वॉरंट या नोटिस के उन्हें अपने साथ ले गई.

साउथ एशियन यूनिवर्सिटी: छात्रा से गैंगरेप की कोशिश का आरोप, कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन

दक्षिणी दिल्ली के मैदानगढ़ी इलाके में स्थित साउथ एशियन यूनिवर्सिटी की एक स्नातक छात्रा ने आरोप लगाया है कि रविवार को चार लोगों ने विश्वविद्यालय परिसर में उनके साथ सामूहिक बलात्कार करने की कोशिश की. हालांकि, पुलिस ने इस मामले में मंगलवार को एफआईआर दर्ज की है.

टिस: जीएन साईबाबा की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम को लेकर छात्रों को हिरासत में लिया गया

मुंबई पुलिस ने सोमवार को टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के कुछ छात्रों को हिरासत में लेकर उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है. छात्रों पर आरोप है कि उन्होंने दिवंगत प्रोफेसर जीएन साईबाबा की पहली पुण्यतिथि पर एकत्रित होकर कार्यक्रम आयोजित किया था.

केरल: मीडिया पर कार्रवाई का विरोध करने वाले पत्रकारों, कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ एफआईआर

बीते 13 सितंबर को कोच्चि में पत्रकार और कार्यकर्ताओं ने मई महीने में महाराष्ट्र एटीएस द्वारा गिरफ़्तार पत्रकार रेज़ाज एम. शीबा सिदीक़ की रिहाई की मांग करते हुए बैठक की थी. अब केरल पुलिस ने आयोजकों और वक्ताओं के ख़िलाफ़ अवैध जमावड़ा और पुलिस कर्तव्य में बाधा जैसे आरोपों में एफआईआर दर्ज की है.

मालेगांव विस्फोट: बरी किए गए आरोपियों के ख़िलाफ़ पीड़ित परिवार हाईकोर्ट पहुंचे

2008 मालेगांव विस्फोट के पीड़ित परिवारों ने विशेष एनआईए अदालत द्वारा प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित समेत सात आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है. बरी किए जाने को 'त्रुटिपूर्ण' बताते हुए पीड़ितों ने तर्क दिया है कि फैसले में आरोपियों के अपराध की ओर सीधे इशारा करने वाले ठोस सबूतों को नज़रअंदाज़ किया गया.

मुंबई ट्रेन विस्फोट केस में हाईकोर्ट के आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को मिसाल नहीं माना जाएगा: सुप्रीम कोर्ट

जुलाई 2006 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार ट्रेन विस्फोट मामले में निचले कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए सभी 12 लोगों को बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा बरी किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसले पर आंशिक रोक लगाते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश को मकोका के अन्य मामलों में मिसाल नहीं माना जाएगा.

मुंबई ट्रेन विस्फोट: 12 लोगों को बरी करने वाले फैसले ने खोली पुलिस यातना, न्यायिक विफलता की परतें

मुंबई हाईकोर्ट ने 2006 के ट्रेन ब्लास्ट मामले में 12 आरोपियों को उन्नीस साल बाद बरी किया. फैसले ने दिखाया कि कैसे पुलिस ने यातना देकर कुबूलनामे लिए, जांच में खामियां रहीं और ट्रायल कोर्ट ने इसे नज़रअंदाज़ किया. हाईकोर्ट ने गंभीर टिप्पणियां की हैं, पर यातना के लिए दोषी अधिकारियों को जवाबदेह नहीं ठहराया.

मुंबई ट्रेन ब्लास्ट: 19 साल की क़ैद के बाद सभी दोषी बरी, कहा- टॉर्चर करके करवाए थे कुबूलनामे

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 21 जुलाई को उन सभी 12 लोगों को बरी कर दिया, जिन्हें 11 जुलाई, 2006 के श्रृंखलाबद्ध ट्रेन धमाकों के लिए पहले दोषी ठहराया गया था और मौत की सज़ा (उनमें से पांच) और आजीवन कारावास (सात) दंड मिला था. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के ख़िलाफ़ मामला साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है. यह विश्वास करना कठिन है कि आरोपियों ने अपराध किया है.

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