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तन्मय चक्रबर्ती

त्रिपुराः मीडिया संस्थानों पर हमले के आरोप में भाजपा युवा मोर्चा नेता गिरफ़्तार

त्रिपुरा के विभिन्न हिस्सों में आठ सितंबर को हुई हिंसा में 10 से अधिक लोग घायल हो गए और छह वाहनों में आग लगा दी गई थी. यह हिंसा भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा तीन मीडिया संस्थानों के दफ़्तरों और माकपा के तीन कार्यालयों पर हमले के बाद हुई.

पूर्वोत्तर राज्यों में राजनीतिक संघर्षों में त्रिपुरा शीर्ष परः एनसीआरबी रिपोर्ट

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की ‘क्राइम इन इंडिया 2020’ रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में बलात्कार के मामलों में पूर्वोत्तर के राज्यों में असम शीर्ष पर है. असम में बलात्कार के 1,657 मामले दर्ज किए गए. इसके बाद त्रिपुरा में 79, मेघालय में 67  और अरुणाचल प्रदेश में 60 मामले दर्ज किए गए.

त्रिपुराः मवेशी चोरी के शक़ में ग्रामीणों ने तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या की

घटना खोवई ज़िले की है, जहां ग्रामीणों ने रविवार सुबह पांच मवेशी ले जा रहे एक मिनी ट्रक को अगरतला की तरफ जाते देखा और पीछा कर उसमें सवार तीनों लोगों की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उनकी मौत हो गई. पुलिस के अनुसार जांच जारी है और अभी तक कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है.

त्रिपुरा: पत्रकारों पर हमले बढ़े, पुलिस ने 2020 से अब तक 24 मामले दर्ज किए

साल 2018 में राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से ही पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं और बीते सितंबर में मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब के पत्रकारों को धमकी देने के बाद से इसमें इज़ाफ़ा हुआ है. 2020 में पत्रकारों पर हमले के 17 मामले दर्ज किए हुए जबकि 2021 में अब तक ऐसे सात मामले दर्ज किए गए हैं.

त्रिपुराः भाजपा समर्थित हमलावरों को रोकने की पोस्ट करने पर वाम नेताओं पर कई एफआईआर

लेफ्ट फ्रंट के संयोजक बिजन धर ने अगरतला में हुए कुछ हमलों को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखी थीं, जिसके बाद त्रिपुरा पुलिस ने उन पर कथित तौर पर हिंसा भड़काने के लिए मामला दर्ज किया है. धर के अलावा माकपा के पूर्व सांसद जितेंद्र चौधरी और विधायक भानु लाल साहा के ख़िलाफ़ भी उनकी कई पोस्ट को लेकर एफआईआर दर्ज हुई है.

त्रिपुराः भाजपा समर्थकों ने किया वरिष्ठ पत्रकार के घर पर हमला

2018 में राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से त्रिपुरा के वरिष्ठ पत्रकार समीर धर के आवास पर हुआ यह इस तरह का तीसरा हमला है. आरोप है कि पिछले साल सितंबर में मुख्यमंत्री बिप्लब देव द्वारा सार्वजनिक बैठक में मीडिया को धमकाने के बाद से पत्रकारों पर इस तरह के हमले तेज़ हुए हैं.